Ali Larijani: अली लारीजानी: वह ईरानी शख्सियत जिसने अमेरिका को स्ट्राइक से रोका, अब प्रतिबंधों का सामना
Ali Larijani - अली लारीजानी: वह ईरानी शख्सियत जिसने अमेरिका को स्ट्राइक से रोका, अब प्रतिबंधों का सामना
ईरान की सरकार 1979 के बाद अपने सबसे गंभीर संकट का सामना कर रही थी। इस दौरान, अमेरिका और इजराइल ने ईरान में तख्तापलट की योजना बना ली थी, जिससे देश की स्थिरता और भविष्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा था। ऐसे नाजुक समय में, अली लारीजानी नामक एक प्रमुख ईरानी शख्सियत ने छह महीने से एक जटिल कूटनीतिक जाल बुन रखा था। उनकी रणनीतिक चालों और अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप, अमेरिका चाहकर भी ईरान पर सैन्य हमला नहीं कर पाया। इस अप्रत्याशित सफलता के बाद, अमेरिकी सरकार ने गुस्से में आकर अली लारीजानी पर प्रतिबंध लगा दिए हैं, जो उनकी कूटनीतिक जीत की एक सीधी प्रतिक्रिया मानी जा रही है।
अमेरिकी हमले का टलना और कूटनीतिक जीत
फिलहाल, अमेरिका ने ईरान पर हमला करने की अपनी योजना को टाल दिया है। यह निर्णय सऊदी अरब, कतर और ओमान जैसे प्रमुख अरब देशों की सिफारिशों के बाद आया, जिन्होंने अमेरिका से ईरान के साथ बातचीत करने का प्रस्ताव स्वीकार करने का आग्रह किया। अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाली ईरानी सरकार के लिए इसे एक बड़ी राहत माना। जा रहा है, क्योंकि यह एक संभावित विनाशकारी सैन्य संघर्ष से बचने का संकेत है। इस पूरे घटनाक्रम में, तेहरान से एक नाम लगातार चर्चा में रहा है –। वह नाम है अली लारीजानी का, जिन पर अमेरिका ने शुक्रवार को प्रतिबंध लगाए। लारीजानी ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख हैं और कहा जाता है कि उनके नेतृत्व में ईरान ने ऐसी मजबूत किलेबंदी की, जिसके कारण अमेरिका चाहकर भी तेहरान पर हमला नहीं कर पाया।कौन हैं अली लारीजानी और एक प्रभावशाली व्यक्तित्व
अगस्त 2025 में अली लारीजानी को ईरान सर्वोच्च सुरक्षा परिषद का सचिव नियुक्त किया गया था। उन्हें राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का धुर-विरोधी माना जाता है, जो ईरान की आंतरिक राजनीतिक गतिशीलता को दर्शाता है। लारीजानी का जन्म 3 जून 1958 को हुआ था और वे एक अत्यंत प्रभावशाली शिया मुस्लिम परिवार से आते हैं, जिसने उन्हें ईरानी समाज और राजनीति में एक मजबूत आधार प्रदान किया। उनकी शिक्षा भी उच्च स्तर की रही है, क्योंकि उनके पास डॉक्टरेट की डिग्री है, जो उनकी बौद्धिक क्षमता को दर्शाती है।
वर्ष 2004 में, लारीजानी पहली बार सुप्रीम लीडर खामेनेई की टीम में शामिल हुए थे, जब खामेनेई ने उन्हें अपना सलाहकार नियुक्त किया था और यह नियुक्ति उनके बढ़ते प्रभाव और खामेनेई के साथ उनकी निकटता का प्रमाण थी। लारीजानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पूर्व सदस्य भी रह चुके हैं,। जो ईरान की सबसे शक्तिशाली सैन्य और सुरक्षा संस्थाओं में से एक है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत इस्लामिक गार्ड्स में एक कमांडर के रूप। में की थी, जो उनके सैन्य और सुरक्षा अनुभव की नींव थी। 1994 में, लारीजानी को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग का प्रमुख नियुक्त किया गया, जिससे उन्हें देश के मीडिया परिदृश्य पर महत्वपूर्ण नियंत्रण मिला। 2005 में, उन्होंने राष्ट्रपति का चुनाव भी लड़ा था, हालांकि उन्हें इसमें सफलता नहीं मिली। लारीजानी को कट्टरपंथी खेमे के एक प्रमुख नेता के रूप में देखा जाता है। 2024 के चुनाव में उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया था, लेकिन खामेनेई के करीबी होने के कारण ईरान में उनका जलवा और प्रभाव बरकरार रहा।लारीजानी की कूटनीति: ईरान की किलेबंदी
ईरान सुरक्षा परिषद के प्रमुख बनते ही अली लारीजानी ने देश की सुरक्षा और कूटनीतिक स्थिति को मजबूत करने के लिए तुरंत कदम उठाए। उन्होंने सबसे पहले ईरान के कट्टर दुश्मन माने जाने वाले सऊदी अरब से संपर्क साधा, जो एक बड़ा कूटनीतिक कदम था। पिछले छह महीनों में, लारीजानी ने कम से कम तीन बार सऊदी अरब के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की, जिसमें सितंबर 2025 में सऊदी क्राउन प्रिंस के साथ उनकी बैठक भी शामिल थी। इन मुलाकातों का उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव को कम करना और ईरान के लिए समर्थन जुटाना था।
इसके अलावा, लारीजानी ने ईरान के सभी पड़ोसी देशों का दौरा किया, जिनमें इराक, लेबनान और पाकिस्तान का दौरा प्रमुख था। इन दौरों का उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना और ईरान के खिलाफ किसी भी संभावित गठबंधन को कमजोर करना था और हालिया तनाव के दौरान, लारीजानी द्वारा किए गए ये सभी कूटनीतिक दौरे ईरान के लिए अत्यंत फायदेमंद साबित हुए। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अरब देशों ने अमेरिका को ईरान पर हमला न करने के लिए सफलतापूर्वक मना लिया। सऊदी अरब के नेतृत्व में कतर और ओमान के नेताओं ने अमेरिका को यह समझाया कि अगर ईरान पर हमला किया जाता है, तो इसका नुकसान पूरे क्षेत्र को भुगतना पड़ेगा। इन तीनों देशों ने ईरान से बातचीत की पहल की, जिसके बाद अमेरिका ने। हमले को लेकर अपना रुख बदल लिया और सैन्य कार्रवाई से पीछे हट गया।आंतरिक विद्रोह का प्रबंधन और रणनीतिक संचार
जब ईरान में विरोध प्रदर्शनों ने विद्रोह का रूप ले लिया, तो अली लारीजानी खुद सक्रिय हो गए और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए निर्णायक कदम उठाए। सबसे पहले, उन्होंने ईरानी सेना में तीन बड़े बदलाव कराए, जो उनकी रणनीतिक सोच को दर्शाते हैं। इसके तहत, अहमद वाहिदी को उप कमांडर नियुक्त किया गया, जिन पर अमेरिका सालों पहले प्रतिबंध लगा चुका है और साथ ही, ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमिनिया को सेना का प्रवक्ता नियुक्त किया गया, जिससे सरकार की ओर से स्पष्ट और संगठित संचार सुनिश्चित किया जा सके।
विद्रोह के दौरान, लारीजानी खुद टीवी पर इंटरव्यू देते नजर आए, जहां उन्होंने सरकार का पक्ष मजबूती से रखा। लारीजानी ने ही पूरे विद्रोह को सबसे पहले अमेरिका और इजराइल से जोड़ा। उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह दावा किया कि अमेरिका ने ईरान में। इस्लामिक स्टेट जैसा हमला करवाया है, जिसका उद्देश्य देश में अस्थिरता फैलाना था। इस बयान को ईरान की मीडिया ने खूब प्रचारित किया, जिससे जनता के बीच एक विशेष धारणा बनी और बाहरी हस्तक्षेप के खिलाफ राष्ट्रीय भावना को मजबूत किया जा सके। उनकी यह रणनीति आंतरिक विरोध को बाहरी साजिश के रूप में प्रस्तुत करने। में सफल रही, जिससे सरकार को स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखने में मदद मिली।अमेरिका द्वारा प्रतिबंध और हमले को रोकने के पीछे के कारण
अमेरिका ने अब अली लारीजानी पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। यह प्रतिबंध ट्रंप के उस फैसले के तुरंत बाद लगाया गया, जब उन्होंने ईरान पर स्ट्राइक को रोकने का आदेश दिया था और एनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस सुरक्षा परिषद की बैठक में कोई भी अधिकारी इस बात की गारंटी नहीं दे पाया कि ईरान पर सैन्य हमले के तुरंत बाद वहां तख्तापलट हो जाएगा। यह अमेरिकी प्रशासन के भीतर अनिश्चितता और संभावित परिणामों के बारे में चिंता को दर्शाता है।ईरान की सुरक्षा और लारीजानी का भविष्य
अली लारीजानी की कूटनीतिक कुशलता और रणनीतिक दूरदर्शिता ने ईरान को एक बड़े सैन्य संघर्ष से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी कार्रवाइयों ने न केवल ईरान की सुरक्षा को मजबूत किया, बल्कि क्षेत्रीय शक्तियों के साथ संबंधों में भी सुधार किया, जिससे अमेरिका के लिए सैन्य हस्तक्षेप करना और भी मुश्किल हो गया। हालांकि, उन पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंध उनकी इस सफलता की कीमत हैं और भविष्य में, लारीजानी का प्रभाव और ईरान की विदेश नीति में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी, खासकर जब ईरान क्षेत्रीय और वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। उनकी यह कहानी दर्शाती है कि कैसे एक व्यक्ति की कूटनीतिक क्षमता बड़े भू-राजनीतिक संघर्षों को प्रभावित कर सकती है।
बैठक में, अमेरिकी सेना ने राष्ट्रपति को स्पष्ट रूप से बताया कि यदि ईरान पर निर्णायक हमला नहीं होता है, तो उन्हें एक लंबी और महंगी जंग में कूदना पड़ सकता है और सेना ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी सैनिक फिलहाल ईरान से जंग लड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। इन सैन्य आकलन और कूटनीतिक दबावों के कारण ही अमेरिका ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई से पीछे हटने का फैसला किया और लारीजानी पर प्रतिबंध लगाना उनकी कूटनीतिक सफलता और अमेरिका की निराशा का प्रतीक है, क्योंकि उनके प्रयासों ने अमेरिकी योजनाओं को विफल कर दिया।