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अमित शाह की नक्सलियों को चेतावनी: हथियार डालें या परिणाम भुगतें

अमित शाह की नक्सलियों को चेतावनी: हथियार डालें या परिणाम भुगतें
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नक्सल मुक्त भारत पर आयोजित चर्चा का जवाब देते हुए वामपंथी उग्रवाद पर सरकार के कड़े रुख को स्पष्ट किया। उन्होंने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि देश के 12 राज्य कभी नक्सलवाद की चपेट में थे, लेकिन वर्तमान सरकार की नीतियों के कारण अब यह समस्या सिमट रही है। शाह ने नक्सलियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि जो लोग हथियार उठाएंगे, उन्हें सुरक्षा बलों की ओर से उसी भाषा में जवाब दिया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान को चुनौती देने वालों के साथ कोई बातचीत नहीं होगी, हालांकि मुख्यधारा में लौटने वालों के लिए पुनर्वास के रास्ते खुले हैं।

नक्सलियों को अंतिम चेतावनी और समर्पण का विकल्प

गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में घोषणा की कि नक्सली हिंसा करने वालों के दिन अब समाप्त हो गए हैं। उन्होंने कहा कि वह कई बार सार्वजनिक मंचों से अपील कर चुके हैं कि नक्सली अपने हथियार डाल दें। शाह के अनुसार, यदि नक्सली हिंसा का रास्ता नहीं छोड़ते हैं, तो सरकार अब 'गोली का जवाब गोली से' देने की नीति पर अडिग है और उन्होंने स्पष्ट किया कि बंदूक चलाने वालों से कोई बातचीत नहीं की जाएगी। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो नक्सली हथियार डालकर आत्मसमर्पण करेंगे, सरकार उनकी हर संभव मदद करेगी और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कार्य करेगी।

कांग्रेस शासन और नक्सलवाद के विस्तार पर प्रहार

चर्चा के दौरान अमित शाह ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला और उन्होंने आरोप लगाया कि देश में माओवादी विचारधारा का प्रसार कांग्रेस के शासनकाल में हुआ। शाह के अनुसार, 1970 के दशक में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी से शुरू हुआ यह आंदोलन 1970 से 2004 के बीच देश के बड़े हिस्से में फैल गया। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर आदिवासियों के विकास की अनदेखी करने का आरोप लगाया। शाह ने सवाल किया कि 75 वर्षों में से लगभग 60 वर्षों तक शासन करने वाली कांग्रेस ने आदिवासियों को घर, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं दीं। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों की विफलता के कारण ही नक्सलवाद को पनपने का अवसर मिला।

बस्तर में विकास और बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण

छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र का उल्लेख करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि यह क्षेत्र लंबे समय तक लाल आतंक की छाया में रहा, जिसके कारण वहां विकास कार्य बाधित हुए। उन्होंने बताया कि अब बस्तर के लगभग हर गांव में स्कूल बनाए जा रहे हैं और बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। शाह के अनुसार, सुरक्षा बलों द्वारा नए कैंप स्थापित किए जाने से नक्सलियों का प्रभाव कम हुआ है और उन क्षेत्रों में सड़क, बिजली और स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच रही हैं जहां पहले जाना असंभव था। उन्होंने दावा किया कि बस्तर से नक्सलवाद अब लगभग समाप्त होने की कगार पर है और स्थानीय जनता अब विकास की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग ले रही है।

माओवादी विचारधारा और हिंसा का प्रभाव

अमित शाह ने माओवादी विचारधारा की आलोचना करते हुए कहा कि इस सोच में सत्ता बंदूक की नली से निकलती है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है और उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने आदिवासियों को बरगलाकर उनके हाथों में हथियार थमाए और उनके ही लोगों का खून बहाया। शाह ने तर्क दिया कि रेड कॉरिडोर में गरीबी नक्सलवाद के कारण आई है, न कि गरीबी के कारण नक्सलवाद फैला है। उन्होंने उदाहरण दिया कि नक्सलियों ने आदिवासियों को शिक्षित होने से रोकने के लिए स्कूलों को निशाना बनाया और उन्हें जला दिया। गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अब जनता का सहयोग मिल रहा है, जिससे वामपंथी उग्रवाद को खत्म करने में सफलता मिल रही है।

आदिवासी कल्याण और भविष्य की रणनीति

सरकार की भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए शाह ने कहा कि आदिवासियों का वास्तविक विकास अब हो रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार आदिवासियों को पक्के घर, स्वच्छ पेयजल, बैंकिंग सुविधाएं और शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है और उन्होंने विपक्ष से कहा कि वे नक्सलियों के प्रति सहानुभूति दिखाने के बजाय आदिवासियों की स्थिति पर आत्मचिंतन करें। शाह ने दोहराया कि नक्सलवाद का विकास से कोई लेना-देना नहीं है और यह केवल विनाश का मार्ग है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सुरक्षा बलों के साहस और सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों के समन्वय से भारत जल्द ही पूरी तरह से नक्सल मुक्त होगा।

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