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जनगणना 2027: डिजिटल प्रक्रिया और हाउस लिस्टिंग अप्रैल 2026 से होगी शुरू

जनगणना 2027: डिजिटल प्रक्रिया और हाउस लिस्टिंग अप्रैल 2026 से होगी शुरू
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भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने देश की आगामी जनगणना 2027 के संचालन को लेकर विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की है। एक आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार की जनगणना पूरी तरह से डिजिटल होगी और इसे दो मुख्य चरणों में संपन्न किया जाएगा। जनगणना की प्रक्रिया को आधुनिक बनाने के लिए सरकार ने तकनीकी बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। यह स्वतंत्रता के बाद भारत की आठवीं और देश की कुल 16वीं जनगणना होगी।

जनगणना 2027 की समय सीमा और चरण

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जनगणना 2027 के लिए गजट अधिसूचना 16 जून 2025 को जारी की गई थी। जनगणना का पहला चरण, जिसे 'हाउस लिस्टिंग और आवास जनगणना' कहा जाता है, अप्रैल 2026 से सितंबर 2026 के बीच आयोजित किया जाएगा। इस चरण के लिए फील्डवर्क की तैयारियां उन्नत स्तर पर हैं और जनगणना आयुक्त ने बताया कि पहले चरण के प्रश्नों की अधिसूचना 22 जनवरी 2026 को जारी की गई थी। दूसरे चरण, जिसमें जनसंख्या गणना और जाति आधारित डेटा संग्रह शामिल होगा, उसकी समय सीमा और प्रश्नों की सूची बाद में अधिसूचित की जाएगी।

हाउस लिस्टिंग के लिए निर्धारित 34 प्रश्न

सरकार ने पहले चरण के दौरान पूछे जाने वाले 34 प्रश्नों को अधिसूचित कर दिया है। इन प्रश्नों का उद्देश्य देश के आवासीय ढांचे और नागरिकों की बुनियादी सुविधाओं की स्थिति का आकलन करना है। गणनाकर्ता प्रत्येक परिवार से भवन संख्या, जनगणना मकान संख्या और घर के निर्माण में उपयोग की गई सामग्री (फर्श, दीवार और छत) के बारे में जानकारी मांगेंगे। इसके अतिरिक्त, परिवार के मुखिया का नाम, लिंग, घर में रहने वाले व्यक्तियों की संख्या, और विवाहित जोड़ों की संख्या जैसे विवरण एकत्र किए जाएंगे। बुनियादी सुविधाओं के तहत पेयजल के स्रोत, बिजली, शौचालय की उपलब्धता, और खाना पकाने के लिए उपयोग किए जाने वाले ईंधन के प्रकार पर भी प्रश्न पूछे जाएंगे।

डिजिटल बुनियादी ढांचा और स्व-गणना पोर्टल

इस बार की जनगणना की सबसे बड़ी विशेषता 'स्व-गणना' (Self-Enumeration) का विकल्प है। नागरिक एक समर्पित पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। जनगणना आयुक्त के अनुसार, यह पोर्टल जनगणना के दोनों चरणों के लिए उपलब्ध होगा। इसके अलावा, डेटा संग्रह के लिए एक विशेष मोबाइल ऐप विकसित किया गया है जो 16 भाषाओं में कार्य करेगा। जनगणना नियमावली (मैनुअल) को 19 विभिन्न भाषाओं में तैयार किया गया है ताकि देश के विभिन्न क्षेत्रों में गणनाकर्ताओं को प्रशिक्षण देने में आसानी हो। इस पूरी डिजिटल प्रक्रिया के लिए सरकार ने ₹11,000 करोड़ से अधिक का बजट स्वीकृत किया है।

जाति गणना और डेटा गोपनीयता के नियम

रजिस्ट्रार जनरल ने पुष्टि की है कि जाति आधारित गणना जनगणना के दूसरे चरण का हिस्सा होगी और जनगणना की प्रक्रिया को अत्यंत गोपनीय रखा जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, जनगणना के दौरान एकत्र की गई व्यक्तिगत जानकारी को सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के दायरे से बाहर रखा गया है, जिसका अर्थ है कि व्यक्तिगत डेटा सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। राज्य सरकारों की प्रशासनिक मशीनरी इस कार्य को संपन्न करेगी, जिसके लिए जिला स्तर पर अधिकारियों की नियुक्ति पहले ही की जा चुकी है। गृह मंत्रालय के निर्देशों के तहत राज्यों के मुख्य सचिवों को इस प्रक्रिया के सुचारू संचालन के लिए उत्तरदायी बनाया गया है।

वैवाहिक स्थिति और सामाजिक मानकों पर स्पष्टीकरण

स्व-गणना पोर्टल पर उपलब्ध 'अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों' (FAQ) के माध्यम से सरकार ने कुछ सामाजिक मानकों पर भी स्थिति स्पष्ट की है। जनगणना के मानदंडों के अनुसार, यदि लिव-इन संबंध में रहने वाले दो व्यक्ति एक-दूसरे को स्थायी रूप से अपना साथी मानते हैं, तो उन्हें जनगणना के दौरान विवाहित जोड़े के रूप में दर्ज किया जाएगा। इसके अलावा, आधुनिक आवश्यकताओं तक पहुंच के तहत स्वामित्व वाले वाहनों के प्रकार और उपभोग किए जाने वाले अनाज के प्रकार जैसे डेटा भी एकत्र किए जाएंगे ताकि भविष्य की सरकारी योजनाओं के लिए सटीक सामाजिक-आर्थिक आधार तैयार किया जा सके।

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