अमित शाह का कांग्रेस पर प्रहार: 1937 में वंदे मातरम के दो टुकड़े कर रखी थी विभाजन की नींव

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अमित शाह का कांग्रेस पर प्रहार: 1937 में वंदे मातरम के दो टुकड़े कर रखी थी विभाजन की नींव
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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने वंदे मातरम से जुड़े हालिया विवाद को लेकर कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला है और यह विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस पार्टी ने यह स्पष्ट किया कि उनके आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल शुरुआती दो छंद ही गाए जाएंगे। गौरतलब है कि संसद में पूरे वंदे मातरम को गाने को लेकर पहले ही एक कानून पारित किया जा चुका है। इसी विरोधाभास को लेकर अब राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। अमित शाह ने कांग्रेस के इस कदम को तुष्टिकरण की राजनीति का एक और उदाहरण बताया है।

1937 का प्रस्ताव और विभाजन की नींव

अमित शाह ने अपने संबोधन में इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने ही 1937 में तुष्टिकरण के उद्देश्य से वंदे मातरम के दो हिस्से किए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी फैसले ने देश के विभाजन की नींव डाली थी। शाह के अनुसार, उस समय लिए गए इस निर्णय से दो राष्ट्र के सिद्धांत को मजबूती मिली, जिसका अंतिम परिणाम देश के बंटवारे और पाकिस्तान के जन्म के रूप में सामने आया। उन्होंने देश की जनता को आगाह किया कि भारत एक बार वंदे मातरम को दो टुकड़ों में बांटने का भयानक असर देख चुका है और अब दोबारा ऐसा होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

स्वतंत्रता दिवस की घटना और कांग्रेस की सफाई

इस विवाद की पृष्ठभूमि में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस कार्यालय में हुई एक घटना भी शामिल है। उस दिन कांग्रेस कार्यालय में पूरा वंदे मातरम बजाया गया था, लेकिन इस दौरान सोनिया गांधी किसी बात को लेकर नाखुश दिखाई दी थीं। बाद में कांग्रेस नेताओं ने इस पर सफाई देते हुए कहा था कि वह मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी मंगवा रही थीं क्योंकि वह काफी देर से खड़े थे। हालांकि, इस घटना के महज चार दिन बाद ही कांग्रेस ने यह आधिकारिक घोषणा कर दी कि उनके नेता अब से वंदे मातरम के केवल दो ही छंद गाएंगे। अमित शाह ने कांग्रेस कार्य समिति के इस फैसले को आश्चर्यजनक और देश विरोधी करार दिया है।

शहीदों का अपमान और 150वां वर्ष

गृहमंत्री ने जोर देकर कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने उस ऐतिहासिक गलती को सुधारने का काम किया है। उन्होंने बताया कि बंकिम बाबू की इस अमर कृति के प्रागट्य के 150 वें साल में सरकार ने इसे पूर्ण रूप से गाने का निर्णय लिया है ताकि राष्ट्रीय एकात्मता को सुदृढ़ किया जा सके। शाह ने कहा कि इस निर्णय को कानूनी जामा भी पहनाया गया है, लेकिन कांग्रेस अब इसकी अवहेलना कर रही है और उन्होंने आरोप लगाया कि वोट बैंक के तुष्टिकरण के लिए कांग्रेस न केवल बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का अपमान कर रही है, बल्कि उन लाखों शहीदों का भी अपमान कर रही है जो वंदे मातरम का नारा लगाते हुए फांसी पर चढ़ गए या जिन्होंने वर्षों जेल में बिताए।

संसद के कानून को नकारने का आरोप

अमित शाह ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि कांग्रेस पार्टी आज भी 1937 के अपने पार्टी प्रस्ताव को संसद द्वारा पारित कानून से ऊपर मान रही है। उन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में कांग्रेस एक बार फिर तुष्टिकरण की राजनीति को जोर-शोर से आगे बढ़ा रही है और शाह ने देश की जनता से अपील की कि वे एकजुट होकर कांग्रेस के इस फैसले के खिलाफ आवाज उठाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आजादी के 80 साल बाद अब देश में तुष्टिकरण की राजनीति नहीं चलेगी। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के इस फैसले की कड़ी निंदा की है और घोषणा की है कि वे इसका जनता के बीच और विधाई सदनों में पुरजोर विरोध करेंगे।

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