ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने देश में सार्वजनिक सड़कों पर नमाज पढ़ने को लेकर चल रहे विवाद पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। हाल ही में बकरीद के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ी जाएगी। इस पृष्ठभूमि में ओवैसी ने तर्क दिया है कि यदि सार्वजनिक सड़कों पर नमाज अदा करना प्रशासन को नामंजूर है, तो यही नियम दूसरे धर्मों से जुड़े आयोजनों और कार्यक्रमों के लिए भी अनिवार्य रूप से लागू होना चाहिए।
सभी धर्मों के लिए समान मानदंड की मांग
एआईएमआईएम अध्यक्ष ने कहा कि सड़कों पर नमाज के लिए जो नियम और कानून बनाए गए हैं, उन्हें सभी धर्मों के आयोजनों और धार्मिक कार्यक्रमों पर भी समान रूप से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी एक समुदाय के लिए अलग और दूसरे के लिए अलग मानदंड नहीं होने चाहिए। ओवैसी के अनुसार, सभी के लिए एक ही मानक अपनाया जाना चाहिए ताकि देश की धर्मनिरपेक्ष छवि बनी रहे और उन्होंने सवाल उठाया कि सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल को लेकर केवल एक विशेष समुदाय को ही निशाना क्यों बनाया जाता है।
मुसलमानों को हाशिये पर धकेलने का गंभीर आरोप
शुक्रवार 29 मई को हैदराबाद स्थित एआईएमआईएम मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ओवैसी ने आरोप लगाया कि देश में जानबूझकर मुसलमानों को हाशिये पर धकेलने और उन्हें दोयम दर्जे का नागरिक बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर सड़कों पर नमाज पढ़ना गलत है, तो सड़कों पर हर धर्म के त्योहारों का आयोजन भी गलत माना जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि यह बात सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होनी चाहिए और त्योहारों तथा धार्मिक गतिविधियों के लिए एक जैसे नियम होने चाहिए।
सार्वजनिक स्थानों का उपयोग और लोकतांत्रिक अधिकार
ओवैसी ने आगे कहा कि अगर सड़क पर नमाज को गलत माना जाता है, तो फिर सड़कों पर आयोजित होने वाले सभी धार्मिक जुलूसों, त्योहारों और अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए भी वही कड़े नियम लागू किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल को लेकर किसी विशेष समुदाय को लक्षित करना अनुचित है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि आखिर सड़कों पर नमाज अदा करने में कितना वक्त लगता है और उन्होंने दोहराया कि भारत देश मुसलमानों का भी उतना ही है जितना दूसरों का, और वे अपने मुद्दों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।
मांस की दुकानों और शराब की बिक्री पर तुलना
धार्मिक मामलों में समानता की बात करते हुए ओवैसी ने कहा कि अगर किसी विशेष त्योहार पर मांस की दुकानें बंद करने की मांग की जाती है, तो रमजान के पवित्र महीने में पूरे 30 दिन तक शराब की सभी दुकानें भी बंद की जानी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि धार्मिक संवेदनशीलता के मामलों में सभी समुदायों के साथ एक जैसा व्यवहार होना चाहिए। उनके अनुसार, यदि एक समुदाय की भावनाओं का सम्मान करने के लिए व्यावसायिक प्रतिबंध लगाए जाते हैं, तो दूसरे समुदाय के लिए भी वैसा ही प्रावधान होना चाहिए।
ईंधन की बढ़ती कीमतों और रूसी तेल पर सवाल
धार्मिक मुद्दों के अलावा एआईएमआईएम प्रमुख ने ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार और तेल कंपनियों को भी कटघरे में खड़ा किया और उन्होंने उल्लेख किया कि होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट जैसे विभिन्न वैश्विक कारणों से कीमतें प्रभावित हो रही हैं, लेकिन रूस से सस्ते तेल के आयात के दौरान भारतीय कंपनियों ने भारी मुनाफा कमाया है। ओवैसी ने कहा कि इस मुनाफे के बारे में केंद्र सरकार से सवाल पूछे जाने चाहिए। उन्होंने आम जनता पर बढ़ते ईंधन खर्च के बोझ को कम करने के लिए पारदर्शिता की मांग की और कहा कि कंपनियों के मुनाफे का लाभ जनता को मिलना चाहिए।