इथेनॉल नीति पर अशोक गहलोत का मोदी सरकार पर हमला, चीनी के दाम और माइलेज पर उठाए सवाल

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इथेनॉल नीति पर अशोक गहलोत का मोदी सरकार पर हमला, चीनी के दाम और माइलेज पर उठाए सवाल
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राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की केंद्र सरकार की नीति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। गहलोत ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने बिना किसी पर्याप्त तैयारी और इसके दूरगामी प्रभावों का सही आकलन किए बिना पेट्रोल में बड़ी मात्रा में इथेनॉल मिलाने का फैसला लागू कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस अदूरदर्शी फैसले का खामियाजा अब देश की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात रखते हुए गहलोत ने इस नीति के आर्थिक और तकनीकी पहलुओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और सरकार की कार्यप्रणाली की आलोचना की है।

चीनी की कीमतों में भारी उछाल

अशोक गहलोत ने अपने पोस्ट में विस्तार से बताया कि इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के चक्कर में गन्ने के एक बहुत बड़े हिस्से को चीनी उत्पादन से हटाकर इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका सीधा असर बाजार में चीनी की उपलब्धता पर पड़ा है, जिससे कीमतों में अचानक और भारी तेजी आई है और उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि महज 15 दिनों के भीतर चीनी के दाम 14 से 17 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं। चीनी जैसी बुनियादी वस्तु की कीमतों में इस तरह की बढ़ोतरी ने आम आदमी के रसोई के बजट को पूरी तरह से बिगाड़ दिया है, जिससे मध्यम और गरीब परिवारों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं।

खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता हितों की अनदेखी

पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन इसके लिए देश की खाद्य सुरक्षा और आम उपभोक्ताओं के हितों को दांव पर नहीं लगाया जा सकता। उन्होंने कहा कि चीनी एक ऐसी वस्तु है जिसका इस्तेमाल हर परिवार में रोज होता है, और इसके दाम बढ़ने का सीधा असर आम परिवार के बजट पर पड़ता है। गहलोत के अनुसार, सरकार को इथेनॉल नीति लागू करने के साथ-साथ चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और उसकी कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए भी एक ठोस रणनीति बनानी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने केवल एक पक्ष को देखा और आम जनता की जरूरतों को नजरअंदाज कर दिया।

वाहनों के इंजन और माइलेज पर बुरा असर

गहलोत ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के तकनीकी पहलुओं पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों के इंजन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और वाहन मालिकों की ओर से माइलेज कम होने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। माइलेज कम होने का सीधा मतलब है कि वाहन मालिक को समान दूरी तय करने के लिए अब पहले से अधिक ईंधन खर्च करना पड़ेगा और उन्होंने यह भी ध्यान दिलाया कि भारत में आज भी बड़ी संख्या में पुराने वाहन सड़कों पर चल रहे हैं। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि क्या सभी पुराने और नए वाहनों के इंजन इस मिश्रण के लिए पूरी तरह अनुकूल हैं। इस फैसले से एक तरफ खाद्य वस्तुओं की महंगाई बढ़ रही है और दूसरी तरफ गाड़ियों की माइलेज कम हो रही है, जिससे आम परिवार का बजट पूरी तरह बिगड़ रहा है।

उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने का आरोप

सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि इथेनॉल नीति का फायदा केवल कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों को पहुंचाने के लिए जनता पर यह आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार अब जनता का भरोसा खो चुकी है और यही कारण है कि वह अपनी नीतियों को लेकर जनता को भरोसा नहीं दिला पा रही है। गहलोत ने मांग की कि सरकार केवल बड़े-बड़े दावे करने के बजाय यह स्पष्ट करे कि उसकी इन नीतियों का आम आदमी, किसान, उपभोक्ता, वाहन मालिक और पर्यावरण पर वास्तव में क्या असर पड़ रहा है। उन्होंने इस पूरे मामले में सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने और जनता को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

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