जयपुर में छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर शुक्रवार को छात्र राजनीति में भारी उबाल देखने को मिला। बड़ी संख्या में छात्र 22 गोदाम पुलिया के पास एकत्रित हुए और वहां से राजस्थान विधानसभा की ओर कूच करने का प्रयास किया। छात्रों के इस प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए थे। मौके पर 3 लेयर की बैरिकेडिंग की गई थी और पुलिस बल के साथ-साथ स्पेशल टास्क फोर्स के जवानों को भी तैनात किया गया था। बैरिकेडिंग के कारण छात्र विधानसभा की ओर आगे नहीं बढ़ सके, जिसके चलते पुलिस और छात्रों के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई।
सुरक्षा घेरा और पुलिस के साथ संघर्ष
विधानसभा की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे छात्रों को रोकने के लिए पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया। 22 गोदाम पुलिया पर लगाए गए अवरोधकों को पार करने की कोशिश में छात्रों और पुलिसकर्मियों के बीच काफी देर तक संघर्ष चला। पुलिस प्रशासन ने छात्रों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बल प्रयोग भी किया। सुरक्षा व्यवस्था इतनी चाक-चौबंद थी कि छात्रों का हुजूम बैरिकेड्स को पार नहीं कर सका और इस दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण बना रहा और छात्र अपनी मांगों के समर्थन में लगातार नारेबाजी करते रहे।
आंदोलन की पृष्ठभूमि और 10 दिन का अल्टीमेटम
छात्रों की ओर से इस घेराव की घोषणा करीब 10 दिन पहले ही कर दी गई थी। विश्वविद्यालय कैंपस से सरकार को 21 अगस्त तक छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग करते हुए चेतावनी दी गई थी कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो विधानसभा का घेराव किया जाएगा। इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए छात्र नेता नीरज खीचड़ ने प्रदेशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों का दौरा किया था और छात्रों को इस मुहिम से जोड़ने का प्रयास किया था। इसी आह्वान के तहत शुक्रवार को छात्र बड़ी संख्या में 22 गोदाम पहुंचे थे।
छात्र नेताओं की हिरासत और पुलिस कार्रवाई
प्रदर्शन के दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने छात्र नेता नीरज खीचड़ समेत 3 छात्र नेताओं को हिरासत में ले लिया। इसके बाद पुलिस ने अन्य छात्रों को भी मौके से खदेड़ना शुरू कर दिया। काफी देर तक छात्र अपने साथियों को रिहा करने की मांग पर अड़े रहे। छात्रों का स्पष्ट कहना था कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करे और छात्रसंघ चुनाव को जल्द से जल्द बहाल किया जाए और पुलिस की कार्रवाई के बाद भी छात्रों में आक्रोश कम नहीं हुआ और वे मौके पर डटे रहे।
छात्र नेता नीरज खीचड़ के तीखे तेवर
प्रदर्शन से पहले छात्र नेता नीरज खीचड़ ने मीडिया और छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि छात्रसंघ चुनाव छात्रों का संवैधानिक हक और अधिकार है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार यह अधिकार नहीं देगी तो छात्र इसे हासिल करने के लिए सरकार की कुर्सी हिला देंगे और खीचड़ ने उच्च शिक्षा मंत्री डॉ प्रेमचंद बैरवा पर भी सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वे उन्हें उच्च शिक्षा मंत्री नहीं मानते क्योंकि उनके अनुसार मंत्री अपने फैसले खुद लेने में सक्षम नहीं हैं। खीचड़ ने वर्तमान भाजपा सरकार पर पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के ढर्रे पर चलने का आरोप लगाया और कहा कि प्रदेश का युवा अब डरने वाला नहीं है।
कांवड़ लेकर पहुंचे छात्र और भविष्य की चेतावनी
इस आंदोलन के दौरान एक अनोखा नजारा भी देखने को मिला जब विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ छात्र कांवड़ लेकर प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। इन छात्रों का कहना था कि वे भगवान भोलेनाथ के दरबार में छात्रसंघ चुनाव बहाली की अरदास लगाने जा रहे हैं। पुलिस प्रशासन ने शुरुआत में इन छात्रों को भी रोकने की कोशिश की, लेकिन बाद में कांवड़ लेकर पहुंचे छात्रों को आगे जाने की अनुमति दे दी गई, जबकि अन्य छात्रों को बैरिकेड्स पर ही रोक लिया गया। छात्र नेताओं ने अंत में सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप धारण करेगा।