अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्रवाई अब और अधिक तेज हो गई है। रविवार 28 जून की सुबह पुलिस की विभिन्न टीमों ने इस मामले में नामजद मुख्य आरोपी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव समेत सभी 8 आरोपियों के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। पुलिस की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य चोरी किए गए चढ़ावे के हिस्से की बरामदगी और आरोपियों की संपत्ति से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जुटाना है। पुलिस इस मामले में हर उस कड़ी को जोड़ने की कोशिश कर रही है जो इस बड़ी चोरी से जुड़ी हो सकती है।
6 टीमों ने सुबह 7 बजे दी दबिश
जानकारी के अनुसार रविवार सुबह करीब 7 बजे पुलिस की 6 अलग-अलग टीमों ने एक साथ आरोपियों के घरों पर दबिश दी। इस दौरान पुलिस ने आरोपियों के परिजनों से गहन पूछताछ की और उनके बयानों को दर्ज किया। पुलिस की टीमों ने आरोपियों के घरों के कोने-कोने की तलाशी ली और वहां मौजूद प्रॉपर्टी के कागजात तथा अन्य वित्तीय दस्तावेजों को अपने कब्जे में लेकर उनकी जांच शुरू कर दी है। पुलिस को संदेह है कि चढ़ावा चोरी से अर्जित धन का उपयोग संपत्तियों की खरीद में किया गया हो सकता है और इसके अलावा पुलिस ने पड़ोसियों से भी बातचीत की ताकि आरोपियों की गतिविधियों के बारे में अधिक जानकारी मिल सके।
इन आरोपियों के घरों पर हुई कार्रवाई
बताया जा रहा है कि पुलिस की टीमें अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मुख्य आरोपी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, मनीष यादव, करुणेश पांडे और रमाशंकर मिश्रा के घर पहुंची थीं। छापेमारी के दौरान मुख्य आरोपी टिन्नू यादव के घर पर ताला लगा मिला, लेकिन पुलिस ने अन्य आरोपियों के घरों की सघन तलाशी ली। कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार के व्यवधान को रोकने और अनधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश को वर्जित करने के लिए आरोपियों के घरों के मुख्य द्वारों पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस का मानना है कि इन घरों की तलाशी से चोरी किए गए चढ़ावे का कुछ हिस्सा बरामद किया जा सकता है।
8 आरोपियों की गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई
इस मामले में 25 जून को मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर पहली एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके तुरंत बाद पुलिस ने टिन्नू यादव समेत 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। 26 जून को सीजेएम कोर्ट ने इन सभी आरोपियों को तीन दिन के लिए जेल भेज दिया। जब से यह मामला सामने आया है, रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव का नाम लगातार चर्चाओं में बना हुआ है। पुलिस अब इन आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर जांच के दायरे को और बढ़ा रही है।
चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा
चढ़ावा चोरी के इस विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे की खबर ने सबको चौंका दिया है। शनिवार को ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने इन इस्तीफों की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्हें त्यागपत्र मिल गया है। उन्होंने बताया कि 11 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में इन इस्तीफों पर विचार किया जाएगा। स्वामी गोविंद देव गिरि ने उन भक्तों को भी आश्वस्त किया जिन्होंने प्रभु श्रीराम की सेवा में चांदी की ईंटें और सोने-चांदी के आभूषण अर्पित किए हैं और उन्होंने स्पष्ट किया कि भक्तों द्वारा दान की गई सभी वस्तुएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। इस बीच खबर है कि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंदानंद सरस्वती एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए चंदा और धन की अनियमितता के मुद्दे पर अपना पक्ष रखेंगे।
एसआईटी जांच और एफआईआर का घटनाक्रम
राम मंदिर में कथित चोरी का यह मामला सबसे पहले 7 जून को सामने आया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने इसकी जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था और एसआईटी ने अपनी जांच पूरी कर 23 जून को एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (गृह) संजय प्रसाद को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर पहली एफआईआर दर्ज हुई, जिसमें रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू समेत 8 लोगों को नामजद किया गया। इसके बाद शुक्रवार को चंपत राय और डॉ और अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया, जिससे यह मामला और अधिक गरमा गया है।