बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने धाम आने वाले लाखों श्रद्धालुओं, विशेष रूप से महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सतर्क करने वाली अपील जारी की है। मंच से अपने संबोधन के दौरान उन्होंने महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं पर विस्तार से चर्चा की और बाहरी तत्वों द्वारा धार्मिक संस्थानों की छवि खराब करने की कोशिशों के प्रति आगाह किया। शास्त्री ने जोर देकर कहा कि वर्तमान सामाजिक और धार्मिक परिवेश में सनातन धर्म और इसके पवित्र स्थलों को बदनाम करने के सुनियोजित प्रयास किए जा रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने माताओं और बहनों को सलाह दी है कि वे बागेश्वर धाम अकेले आने का जोखिम न उठाएं।
सेवादारों और अनजानों पर न करें भरोसा
धीरेंद्र शास्त्री के इस संदेश का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह चेतावनी थी, जिसमें उन्होंने धाम में मौजूद लोगों और सेवादारों के प्रति सतर्क रहने को कहा। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि किसी अनिवार्य कारणवश किसी महिला को अकेले धाम आना पड़ता है, तो उसे किसी भी अनजान व्यक्ति पर भरोसा नहीं करना चाहिए। उन्होंने इस चेतावनी को और कड़ा करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं को वहां के सेवादारों पर भी आंख मूंदकर विश्वास नहीं करना चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि श्रद्धालु अपनी सूझबूझ का परिचय दें और किसी के भी कहने पर किसी सुनसान या अनजान स्थान पर न जाएं, चाहे वह व्यक्ति खुद को धाम से जुड़ा हुआ ही क्यों न बताए। यह कदम किसी भी ऐसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए उठाया गया है जिसका उपयोग इस आध्यात्मिक केंद्र को बदनाम करने के लिए किया जा सकता है।
लॉजिस्टिक चुनौतियां और सुरक्षा की सीमाएं
अपनी अपील के पीछे के व्यावहारिक कारणों को समझाते हुए शास्त्री ने बागेश्वर धाम की बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था की सीमाओं के बारे में भी जानकारी दी और उन्होंने बताया कि धाम में वर्तमान में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के रुकने या ठहरने के लिए कोई विशेष या व्यापक प्रबंध नहीं हैं। इसलिए उन्होंने सुझाव दिया कि लोग यहां लंबे समय तक रुकने की योजना न बनाएं और दर्शन के बाद जल्द से जल्द प्रस्थान करें। सुरक्षा के दायरे पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि धाम प्रशासन मंदिर परिसर और दरबार क्षेत्र तक की सुरक्षा की जिम्मेदारी तो ले सकता है, लेकिन 5 किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैली हर गतिविधि पर नजर रखना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। शास्त्री के अनुसार, इतने बड़े क्षेत्र के हर कोने में सीसीटीवी कैमरे लगाना मुमकिन नहीं है, इसलिए सुरक्षा की पहली कड़ी स्वयं श्रद्धालु ही हैं।
धार्मिक स्थलों की गरिमा की रक्षा
बागेश्वर धाम के प्रमुख ने देश के विभिन्न तीर्थ स्थलों से समय-समय पर सामने आने वाले विवादों पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के विवादों से आम जनता के बीच पवित्र स्थलों की छवि नकारात्मक होती है और बागेश्वर धाम को ऐसे किसी भी विवाद से बचाने के लिए उन्होंने श्रद्धालुओं से अपनी सुरक्षा के प्रति स्वयं सजग रहने का आह्वान किया। उन्होंने दोहराया कि धाम में हर तरह के लोग आते हैं और सावधानी बरतना ही किसी भी साजिश या दुर्घटना से बचने का एकमात्र तरीका है। उन्होंने श्रद्धालुओं को सलाह दी कि वे मंदिर के प्रांगण और निर्धारित सुरक्षित क्षेत्रों के भीतर ही रहें और किसी भी अजनबी के साथ कहीं बाहर न जाएं।
सामूहिक जागरूकता का आह्वान
अपने संबोधन के अंत में धीरेंद्र शास्त्री ने समाज में महिलाओं की सुरक्षा के व्यापक मुद्दे पर बात की। उन्होंने वर्तमान समय को महिलाओं और बेटियों के लिए अत्यंत गंभीर और चुनौतीपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि बेटियों को घर के भीतर और बाहर, दोनों ही जगहों पर हर समय सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने केवल सलाह देने तक ही सीमित न रहकर श्रद्धालुओं से इस सुरक्षा संदेश का प्रसार करने का भी अनुरोध किया। उन्होंने वहां मौजूद लोगों से कहा कि वे इस अपील को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड करें और इसे सोशल मीडिया के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं। उनका मानना है कि यदि श्रद्धालु धाम आने से पहले ही इन सुरक्षा दिशानिर्देशों और जमीनी हकीकत से अवगत होंगे, तो वे अधिक सुरक्षित रहेंगे और धाम की पवित्रता भी बनी रहेगी।