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बांग्लादेश चुनाव: बीएनपी के दो हिंदू और दो बौद्ध उम्मीदवारों ने दर्ज की जीत

बांग्लादेश चुनाव: बीएनपी के दो हिंदू और दो बौद्ध उम्मीदवारों ने दर्ज की जीत
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बांग्लादेश के हालिया संसदीय चुनावों के परिणामों में अल्पसंख्यक समुदायों की भागीदारी और सफलता के महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले चार अल्पसंख्यक उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। इन विजयी उम्मीदवारों में दो हिंदू और दो बौद्ध समुदाय के प्रतिनिधि शामिल हैं। इन नेताओं ने ढाका और पश्चिमी मगुरा जैसे महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्रों में अपने प्रतिद्वंद्वियों को हराकर संसद में अपनी जगह बनाई है।

हिंदू उम्मीदवारों की जीत और राजनीतिक कद

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के टिकट पर जीत हासिल करने वाले दो प्रमुख हिंदू चेहरों में गायेश्वर चंद्र रॉय और निताई रॉय चौधरी शामिल हैं। गायेश्वर चंद्र रॉय ने ढाका सीट से जीत दर्ज की है और वह बीएनपी की सबसे शक्तिशाली नीति-निर्धारक इकाई, स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य भी हैं। वहीं, निताई रॉय चौधरी ने पश्चिमी मगुरा निर्वाचन क्षेत्र से सफलता प्राप्त की है। चौधरी पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष होने के साथ-साथ शीर्ष नेतृत्व के लिए एक वरिष्ठ सलाहकार और रणनीतिकार की भूमिका भी निभाते हैं। इन दोनों नेताओं ने जमात-ए-इस्लामी द्वारा समर्थित उम्मीदवारों के खिलाफ कड़े मुकाबले में जीत हासिल की है।

बौद्ध समुदाय का प्रतिनिधित्व और बीएनपी की रणनीति

हिंदू उम्मीदवारों के अलावा, दो बौद्ध उम्मीदवारों ने भी बीएनपी के बैनर तले जीत हासिल की है। इनमें सचिन प्रू और दीपेन दीवान के नाम शामिल हैं। सचिन प्रू बीएनपी के एक वरिष्ठ नेता हैं और बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं। वहीं, दीपेन दीवान भी बौद्ध समुदाय से आते हैं और उन्होंने अपनी सीट पर प्रभावशाली जीत दर्ज की है। इन उम्मीदवारों की सफलता को बांग्लादेश की राजनीति में अल्पसंख्यकों की सक्रिय भागीदारी के रूप में देखा जा रहा है, विशेष रूप से मुख्य विपक्षी दल के भीतर उनकी मजबूत स्थिति को यह परिणाम रेखांकित करते हैं।

जमात-ए-इस्लामी का ऐतिहासिक कदम और चुनावी परिणाम

इस चुनाव में एक अभूतपूर्व घटनाक्रम तब देखने को मिला जब जमात-ए-इस्लामी ने अपने राजनीतिक इतिहास में पहली बार किसी हिंदू उम्मीदवार को मैदान में उतारा। पार्टी ने दक्षिण-पश्चिम खुलना सीट से व्यवसायी कृष्ण नंदी को अपना उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, कृष्ण नंदी इस चुनाव में जीत हासिल नहीं कर सके और खुलना-1 सीट पर बीएनपी उम्मीदवार से हारकर दूसरे स्थान पर रहे। भले ही नंदी को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन जमात-ए-इस्लामी जैसी पार्टी द्वारा एक हिंदू चेहरे को मौका दिए जाने की चर्चा पूरे चुनावी सत्र के दौरान रही।

चुनाव में अल्पसंख्यकों की कुल भागीदारी का विवरण

बांग्लादेश चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस बार के आम चुनाव में कुल 79 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था। इनमें हिंदू धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय की 10 महिलाएं भी शामिल थीं। राजनीतिक दलों की बात करें तो बांग्लादेश की कम्युनिस्ट पार्टी (CPB) ने सबसे अधिक 17 अल्पसंख्यक उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतारे थे। कुल 22 राजनीतिक दलों ने 67 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को टिकट दिया था, जबकि 12 उम्मीदवारों ने निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ा था। 2024 के चुनाव में हिंदू सांसदों की कुल संख्या 17 रही है, जो 2018 के आंकड़ों के बराबर ही है।

बांग्लादेश का चुनावी परिदृश्य और जनसंख्या का गणित

97% वोट हासिल किए हैं और 209 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत प्राप्त किया है। 76% वोट और 68 सीटों के साथ अपना अब तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। 05% वोट मिले हैं। जनसंख्या के आंकड़ों के अनुसार, बांग्लादेश में हिंदू आबादी लगभग 8% है। पिछले चुनावों में अधिकांश हिंदू सांसद शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग से चुनकर आते थे, लेकिन इस बार बीएनपी के टिकट पर भी अल्पसंख्यकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।

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