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नेचुरल गैस की कीमतों में बड़ी गिरावट: MCX और ग्लोबल मार्केट में दाम टूटे

नेचुरल गैस की कीमतों में बड़ी गिरावट: MCX और ग्लोबल मार्केट में दाम टूटे
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ग्लोबल और भारतीय कमोडिटी बाजारों में नेचुरल गैस की कीमतों में इस साल की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। 50 प्रति यूनिट के स्तर पर पहुंच गई हैं। 02 प्रति MMBtu तक आ गई हैं। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट मुख्य रूप से मांग में कमी और आपूर्ति के अधिशेष के कारण देखी जा रही है।

मौसम का प्रभाव और हीटिंग डिमांड में कमी

नेचुरल गैस की कीमतों में आई इस भारी गिरावट का सबसे बड़ा कारण अमेरिका और यूरोप के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक गर्म मौसम का होना है। आमतौर पर सर्दियों के मौसम में हीटिंग के लिए नेचुरल गैस की मांग चरम पर होती है, लेकिन इस साल सर्दियों का प्रभाव कम रहने के कारण हीटिंग डिमांड में भारी कमी आई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमानों के अनुसार, आने वाले दिनों में भी तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है, जिससे गैस की खपत पर प्रतिकूल असर पड़ा है। 80 तक पहुंच गई थीं, वे अब मौसम के बदलते मिजाज के कारण लगभग 54% तक नीचे आ चुकी हैं।

अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के स्टोरेज आंकड़े

अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) द्वारा जारी हालिया आंकड़ों ने बाजार पर दबाव और बढ़ा दिया है। आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 के दौरान स्टोरेज से केवल 71 bcf (बिलियन क्यूबिक फीट) गैस की निकासी की गई, जबकि बाजार को कम से कम 90 bcf की निकासी की उम्मीद थी। पिछले साल इसी अवधि के दौरान 227 bcf गैस की निकासी हुई थी। कम निकासी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि घरेलू खपत में भारी गिरावट आई है और स्टोरेज में गैस का भंडार पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। हालांकि कुल इन्वेंटरी अभी भी पांच साल के औसत से 130 bcf कम है, लेकिन निकासी की धीमी गति ने कीमतों को नीचे धकेलने का काम किया है।

रिकॉर्ड उत्पादन और सप्लाई का दबाव

सप्लाई पक्ष की बात करें तो अमेरिका में नेचुरल गैस और कच्चे तेल का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। नई ड्रिलिंग तकनीकों और मौजूदा कुओं से बेहतर रिकवरी के कारण बाजार में गैस की उपलब्धता काफी बढ़ गई है। जब एक तरफ उत्पादन अपने उच्चतम स्तर पर हो और दूसरी तरफ घरेलू मांग कमजोर पड़ जाए, तो कीमतों में सुधार की गुंजाइश कम हो जाती है। हालांकि अमेरिका से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का निर्यात मजबूत बना हुआ है, लेकिन यह वैश्विक स्तर पर बढ़ती सप्लाई और घरेलू मांग की कमी की भरपाई करने में फिलहाल असमर्थ दिख रहा है।

भारतीय बाजार और MCX पर कीमतों का रुख

वैश्विक संकेतों का सीधा असर भारतीय वायदा बाजार पर भी देखने को मिला है और mCX पर नेचुरल गैस के अनुबंधों में लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है। 50 के स्तर पर पहुंच गई हैं। भारतीय बाजार में यह गिरावट अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आई कमजोरी और घरेलू स्तर पर औद्योगिक मांग के स्थिर रहने के कारण हुई है। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौसम और स्टोरेज के आंकड़ों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आता, तब तक कीमतों में स्थिरता आने की संभावना कम है।

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