बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव के लिए गुरुवार 12 फरवरी को मतदान की प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न हो गई है। निर्वाचन आयोग से प्राप्त प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस चुनाव में 47 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। यह चुनाव बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि अगस्त 2024 में हुए व्यापक हिंसक प्रदर्शनों और तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद यह पहली बार है जब देश में आम चुनाव आयोजित किए गए हैं। इस चुनावी प्रक्रिया के पूरा होने के साथ ही मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के 18 महीने के कार्यकाल के समाप्त होने की संभावना है।
निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, मतदान सुबह 8 बजे शुरू हुआ और शाम 4 बजे तक चला। चुनाव के दौरान सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके। अवामी लीग की अनुपस्थिति में हो रहे इन चुनावों पर अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की भी पैनी नजर रही है। चुनाव आयोग अब मतों की गिनती और परिणामों की घोषणा की तैयारी कर रहा है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि आगामी पांच वर्षों के लिए बांग्लादेश की सत्ता की कमान किसके हाथों में होगी।
संसदीय सीटों का ढांचा और निर्वाचन प्रक्रिया
बांग्लादेश की संसद, जिसे 'जातीय संसद' के नाम से जाना जाता है, में कुल 350 सीटें हैं। इन सीटों का वितरण दो श्रेणियों में किया गया है। पहली श्रेणी में 300 सीटें आती हैं, जिन पर प्रत्यक्ष मतदान के माध्यम से जनप्रतिनिधि चुने जाते हैं। इन सीटों के लिए देश के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता सीधे अपने पसंदीदा उम्मीदवार को वोट देते हैं और दूसरी श्रेणी में 50 सीटें शामिल हैं, जो विशेष रूप से महिलाओं के लिए आरक्षित रखी गई हैं। इन आरक्षित सीटों का आवंटन सीधे चुनाव के माध्यम से नहीं होता है।
नियमों के अनुसार, चुनाव के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों को प्राप्त हुई कुल सीटों के अनुपात में इन 50 आरक्षित सीटों का बंटवारा किया जाता है। जिस दल को 300 प्रत्यक्ष सीटों में से जितनी अधिक सीटें मिलती हैं, उसे उसी अनुपात में महिला सदस्यों को नामित करने का अधिकार प्राप्त होता है। इस प्रकार, संसद की कुल सदस्य संख्या 350 तक पहुंचती है। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि विधायी प्रक्रिया में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बना रहे।
बहुमत का आंकड़ा और चुनावी समीकरण
बांग्लादेश में सरकार बनाने के लिए किसी भी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत की आवश्यकता होती है। सामान्य परिस्थितियों में, 300 प्रत्यक्ष सीटों वाली संसद में बहुमत का जादुई आंकड़ा 151 सीटों का होता है। हालांकि, इस बार के चुनाव में एक विशेष स्थिति उत्पन्न हुई है। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इस बार मतदान केवल 299 सीटों पर ही आयोजित किया गया है। एक सीट पर तकनीकी या अन्य कारणों से मतदान स्थगित होने की स्थिति में बहुमत का गणित थोड़ा बदल गया है।
वर्तमान चुनावी समीकरणों के आधार पर, 299 सीटों के लिए हुए मतदान में सरकार बनाने के लिए 150 सीटों की आवश्यकता होगी। जो भी दल या गठबंधन इस आंकड़े को छू लेगा, वह ढाका में अगली सरकार का गठन करने का दावा पेश कर सकेगा। बहुमत प्राप्त करने वाला दल ही प्रधानमंत्री का चयन करेगा और कैबिनेट का गठन करेगा। इन 299 सीटों के परिणाम ही यह तय करेंगे कि आरक्षित 50 सीटों पर किस दल का कितना वर्चस्व होगा।
प्रमुख राजनीतिक दल और उम्मीदवारों का विवरण
इस बार का चुनाव बांग्लादेश की सबसे पुरानी और प्रमुख राजनीतिक पार्टी, अवामी लीग की अनुपस्थिति में लड़ा गया है। मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार द्वारा अवामी लीग को भंग किए जाने और उसके चुनाव लड़ने पर रोक लगाए जाने के बाद मुकाबला मुख्य रूप से बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लामी के बीच सिमट गया है। ये दोनों दल पूर्व में सहयोगी रहे हैं, लेकिन इस बार की राजनीतिक परिस्थितियां काफी भिन्न हैं।
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इस चुनावी मैदान में कुल 50 राजनीतिक दलों ने हिस्सा लिया है। इन दलों की ओर से कुल 1,755 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, 273 निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में हैं, जो कई सीटों पर मुख्य दलों के समीकरण बिगाड़ सकते हैं। उम्मीदवारों की इतनी बड़ी संख्या यह दर्शाती है कि अवामी लीग के हटने के बाद देश में एक नया राजनीतिक शून्य भरने की कोशिश की जा रही है।
मतदान प्रतिशत और मतदाता सांख्यिकी
7 करोड़ है। इस विशाल मतदाता आधार में युवाओं की भागीदारी काफी महत्वपूर्ण रही है। 58 प्रतिशत ऐसे मतदाता हैं जिन्होंने पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। युवाओं की यह भागीदारी नई सरकार के गठन में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
गुरुवार को हुए मतदान में 47 प्रतिशत से अधिक वोटिंग दर्ज की गई है। हालांकि यह आंकड़ा पिछले कुछ चुनावों की तुलना में अलग हो सकता है, लेकिन मौजूदा सुरक्षा स्थितियों और राजनीतिक बदलावों के बीच इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखी गईं। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए हर संभव तकनीक और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया है।
अंतरिम सरकार और सत्ता परिवर्तन का संदर्भ
यह चुनाव बांग्लादेश के लिए केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह 18 महीने से चल रहे अंतरिम शासन के अंत का प्रतीक भी है। अगस्त 2024 में शेख हसीना के इस्तीफे के बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने मुख्य सलाहकार के रूप में कार्यभार संभाला था। अंतरिम सरकार का प्राथमिक उद्देश्य देश में कानून-व्यवस्था बहाल करना और निष्पक्ष चुनाव आयोजित करना था।