Bangladesh Violence: बांग्लादेश में हिंदू व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या, अल्पसंख्यकों में गहराया डर

Bangladesh Violence - बांग्लादेश में हिंदू व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या, अल्पसंख्यकों में गहराया डर
| Updated on: 10-Jan-2026 05:51 PM IST
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर लगातार हो रहे हमलों और। हत्याओं ने गहरे डर और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। हाल ही में सुनामगंज जिले में जॉय महापात्रो नामक एक हिंदू व्यक्ति की निर्मम हत्या ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। महापात्रो को एक स्थानीय व्यक्ति ने बेरहमी से पीटा और फिर जहर दे दिया, जिसके बाद इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। यह घटना बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाती है।

जॉय महापात्रो की निर्मम हत्या

गुरुवार को सुनामगंज जिले में जॉय महापात्रो पर हुए जानलेवा हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। परिवार के सदस्यों के अनुसार, महापात्रो को एक स्थानीय व्यक्ति द्वारा बुरी तरह से पीटा गया था। इस क्रूर पिटाई के बाद उन्हें जहर भी दिया गया, जिससे उनकी हालत गंभीर रूप से बिगड़ गई। घटना के तुरंत बाद, उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता के लिए सिलहट एमएजी उस्मानी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया।

अस्पताल में इलाज और दुखद अंत

सिलहट एमएजी उस्मानी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जॉय महापात्रो को गहन चिकित्सा इकाई (ICU) में रखा गया था, जहां डॉक्टरों ने उनकी जान बचाने की पूरी कोशिश की। हालांकि, गंभीर चोटों और जहर के प्रभाव के कारण, इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इस दुखद घटना ने बांग्लादेश के हिंदू समुदाय में शोक की लहर दौड़ा दी है और उनके बीच पहले से मौजूद भय को और गहरा कर दिया है।

अल्पसंख्यक समुदाय में बढ़ता भय

जॉय महापात्रो की हत्या के बाद से बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू आबादी में भय का माहौल और भी अधिक बढ़ गया है और समुदाय के सदस्य अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और उन्हें लगता है कि वे लगातार हमलों का निशाना बन रहे हैं। इस तरह की घटनाएं अल्पसंख्यकों के बीच असुरक्षा की भावना को बढ़ावा देती हैं और उन्हें अपने ही देश में पराया महसूस कराती हैं।

अंतरिम सरकार के कार्यकाल में बढ़ते हमले

बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल के दौरान अल्पसंख्यकों पर हमलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। मानवाधिकार समूहों और अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों ने इस अवधि में हुई कई घटनाओं पर चिंता व्यक्त की है, जहां हिंदू व्यक्तियों को निशाना बनाया गया है। इन लगातार हमलों ने सरकार की कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

नरसिंगदी में एक और हिंदू व्यक्ति की हत्या

कुछ ही समय पहले, बांग्लादेश के नरसिंगदी शहर में एक 40 वर्षीय हिंदू व्यक्ति की अज्ञात हमलावरों ने धारदार हथियार से वार करके निर्मम हत्या कर दी थी। इस घटना ने भी समुदाय में भारी आक्रोश और भय पैदा किया था। नरसिंगदी की घटना के बाद से ही हिंदू आबादी में एक तरह का डर बना हुआ है, जो अब जॉय महापात्रो की हत्या के बाद और भी गहरा गया है।

पत्रकार राणा प्रताप की गोली मारकर हत्या

5 जनवरी को जशोर के कोपलिया बाजार में एक और भयावह घटना सामने आई थी, जहां हिंदू व्यापारी और पत्रकार राणा प्रताप की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। एक पत्रकार और व्यवसायी के रूप में राणा प्रताप की पहचान ने इस घटना को और भी गंभीर बना दिया था, क्योंकि यह दर्शाता है कि समाज के विभिन्न वर्गों के लोग भी इन हमलों से सुरक्षित नहीं हैं।

दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या और शव जलाना

पिछले महीने की 18 दिसंबर को मयमनसिंह में एक कपड़ा कारखाने में काम करने वाले दीपू चंद्र दास की ईशनिंदा के आरोपों पर पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। यह घटना विशेष रूप से क्रूर थी, क्योंकि उनकी हत्या के बाद उनके शव को एक पेड़ से बांधकर जला दिया गया था। इस तरह की बर्बरतापूर्ण घटनाएं अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के बढ़ते स्तर को दर्शाती हैं।

खोकन चंद्र दास की चाकू मारकर हत्या

31 दिसंबर 2025 को शरियतपुर में व्यापारी खोकन चंद्र दास को चाकू मारकर जला दिया गया था। इस हमले के तीन दिन बाद ढाका में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। यह घटना भी अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा की एक और कड़ी थी, जिसने समुदाय में चिंता और भय को और बढ़ा दिया था।

मानवाधिकार समूहों की चिंता और मांगें

मानवाधिकार समूहों और अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों ने हिंदू लोगों की बार-बार हो रही हत्याओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इन मामलों में गिरफ्तारी में देरी और स्थानीय अधिकारियों की कमजोर कार्रवाई अपराधियों को बढ़ावा दे रही है। यह स्थिति कमजोर समुदायों में भय बढ़ा रही है और उन्हें न्याय से वंचित कर रही है। इन समूहों ने सरकार से तत्काल और प्रभावी कदम उठाने की मांग की है ताकि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और अपराधियों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जा सके।

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।