राजस्थान के भरतपुर जिले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग की तीन महिला कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई शुक्रवार को शहर के सूरजपोल सेक्टर में अंजाम दी गई। एसीबी की इस मुस्तैदी ने सरकारी महकमों में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा संदेश दिया है। पकड़ी गई महिलाओं पर आरोप है कि उन्होंने एक कर्मचारी को उसकी नौकरी बचाने और उसे कार्यस्थल पर परेशान न करने के बदले में रिश्वत की मांग की थी।
आरोपियों का विवरण और उनके पद
एसीबी द्वारा गिरफ्तार की गई महिला कर्मचारियों में सूरजपोल सेक्टर की महिला पर्यवेक्षक क्षमा दहिया मुख्य आरोपी के रूप में सामने आई हैं। उनके साथ इस भ्रष्टाचार के खेल में दो अन्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी शामिल थीं। इनमें से एक सुनीता मुदगल है, जो कारे का नगला सेंटर पर कार्यरत है, और दूसरी राजबाला है, जो डी ब्लॉक रंजीत नगर स्थित आंगनवाड़ी केंद्र में तैनात है। इन तीनों ने मिलकर परिवादी पर दबाव बनाया था और उसे आर्थिक रूप से प्रताड़ित करने की कोशिश की थी।
नौकरी का भय दिखाकर 50000 रुपये की मांग
एसीबी एडिशनल एसपी अमित कुमार ने बताया कि इस पूरी कार्रवाई की शुरुआत एक पीड़ित की शिकायत के बाद हुई और परिवादी ने एसीबी को दी गई अपनी शिकायत में बताया था कि क्षमा दहिया, सुनीता मुदगल और राजबाला उसे लगातार धमका रही थीं। उन्होंने परिवादी से कहा था कि यदि उसे अपनी नौकरी बचानी है और विभाग में बिना किसी परेशानी के काम करना है, तो उसे 50000 रुपये देने होंगे। आरोपियों ने स्पष्ट रूप से कहा था कि पैसे न देने की स्थिति में उसे नौकरी से बर्खास्त करवा दिया जाएगा।
एसीबी का सफल ट्रैप और गिरफ्तारी
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए एसीबी की टीम ने सबसे पहले मामले का सत्यापन किया और सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगे जाने की बात पूरी तरह सही पाई गई। इसके बाद शुक्रवार को एसीबी ने जाल बिछाया। योजना के मुताबिक, परिवादी रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 10000 रुपये लेकर आरोपियों के पास पहुंचा। जैसे ही इन तीनों महिला कर्मियों ने रिश्वत की राशि स्वीकार की, पास में ही तैनात एसीबी की टीम ने उन्हें मौके पर ही दबोच लिया। मौके पर ही जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं और रिश्वत की राशि 10000 रुपये बरामद कर ली गई।
कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच
गिरफ्तार की गई तीनों महिला आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। एसीबी की टीम अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह में विभाग के कुछ और लोग भी शामिल हैं। आरोपियों से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने पहले भी किसी अन्य कर्मचारी को इस तरह से डरा-धमकाकर पैसे वसूले हैं या नहीं। एसीबी की इस कार्रवाई के बाद से महिला एवं बाल विकास विभाग के अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। विभाग के रिकॉर्ड्स की भी जांच की जा सकती है ताकि भ्रष्टाचार के इस नेटवर्क का पूरी तरह से खुलासा हो सके।