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ब्लैकरॉक CEO लैरी फिंक ने भारत की आर्थिक वृद्धि की सराहना की

ब्लैकरॉक CEO लैरी फिंक ने भारत की आर्थिक वृद्धि की सराहना की
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विश्व की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी ब्लैकरॉक के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) लैरी फिंक ने भारतीय अर्थव्यवस्था के भविष्य पर गहरा विश्वास व्यक्त किया है। मुंबई में आयोजित 'इन्वेस्टिंग फॉर अ न्यू एरा' कार्यक्रम के दौरान फिंक ने कहा कि अगले 20-25 साल भारत के विकास के युग के रूप में देखे जा रहे हैं। उन्होंने इस अवधि को एक लंबी दौड़ वाली ग्रोथ स्टोरी बताया, जो वैश्विक निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत है और इस कार्यक्रम में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी भी उपस्थित थे, जहां दोनों दिग्गजों ने भारत के बदलते निवेश परिदृश्य पर चर्चा की।

दीर्घकालिक विकास और बाजार की स्थिरता पर जोर

लैरी फिंक ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष बल दिया कि निवेशकों को बाजार की दैनिक अस्थिरता और अल्पकालिक सुर्खियों से प्रभावित नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, भारत की विकास यात्रा एक संरचनात्मक बदलाव है जिसे केवल दीर्घकालिक दृष्टिकोण से ही समझा जा सकता है और फिंक ने कहा कि पूंजी बाजारों में निरंतर और लंबे समय तक भागीदारी ही वास्तविक संपत्ति निर्माण का आधार बनती है। उन्होंने ऐतिहासिक डेटा का हवाला देते हुए उल्लेख किया कि इक्विटी बाजारों में लंबे समय तक निवेशित रहने का प्रतिफल पारंपरिक बैंक जमा या अन्य सुरक्षित विकल्पों की तुलना में ऐतिहासिक रूप से बेहतर रहा है।

पूंजी बाजार में घरेलू भागीदारी का महत्व

फिंक ने भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में घरेलू निवेशकों की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया और उन्होंने कहा कि जिन देशों में पूंजी बाजारों में स्थानीय परिवारों की भागीदारी बढ़ती है, वहां व्यापक स्तर पर संपत्ति का सृजन होता है। उनके विश्लेषण के अनुसार, जब आम नागरिक अर्थव्यवस्था की विकास प्रक्रिया में सीधे तौर पर हिस्सेदार बनते हैं, तो यह न केवल व्यक्तिगत समृद्धि लाता है बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करता है। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों को बाजार से जोड़ने और उन्हें कंपाउंडिंग के लाभों के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

जियो ब्लैकरॉक और निवेश का नया युग

यह कार्यक्रम जियो ब्लैकरॉक के लॉन्च और भारत में वेल्थ क्रिएशन प्लेटफॉर्म की स्थापना के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है और फिंक और अंबानी की बातचीत ने यह स्पष्ट किया कि तकनीक और वित्तीय विशेषज्ञता का मेल भारत के खुदरा निवेशकों के लिए नए द्वार खोल सकता है। फिंक ने बताया कि भारत में डिजिटल बुनियादी ढांचे का विकास और वित्तीय समावेशन की गति इसे अन्य उभरते बाजारों से अलग बनाती है और उन्होंने इसे एक ऐसा अवसर बताया जहां धैर्य और विश्वास के साथ किया गया निवेश देश की प्रगति के साथ तालमेल बिठा सकता है।

विश्लेषकों के अनुसार आर्थिक परिदृश्य

बाजार विश्लेषकों के अनुसार, लैरी फिंक का यह बयान वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती साख को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लैकरॉक जैसी वैश्विक संस्था का भारत पर सकारात्मक रुख विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के प्रवाह को और अधिक प्रोत्साहित कर सकता है। विश्लेषकों का यह भी कहना है कि भारत की जनसांख्यिकीय स्थिति और डिजिटल क्रांति इसे अगले दो दशकों तक उच्च विकास दर बनाए रखने में मदद करेगी। फिंक की टिप्पणियों को भारत के व्यापक आर्थिक सुधारों और विनिर्माण क्षेत्र में बढ़ती सक्रियता के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।

निष्कर्ष के तौर पर, लैरी फिंक का संदेश स्पष्ट है कि भारत एक लंबी अवधि के विकास पथ पर अग्रसर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अल्पकालिक बाजार गतिविधियों की भविष्यवाणी करने के बजाय, देश की संरचनात्मक वृद्धि पर भरोसा करना अधिक प्रभावी रणनीति हो सकती है। भारत के पूंजी बाजारों का विस्तार और घरेलू निवेशकों की सक्रियता आने वाले दशकों में वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति को और अधिक सुदृढ़ करने की संभावना रखती है।

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