कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल: ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर के पार, मिडिल ईस्ट में तनाव से बढ़ी चिंताएं

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कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल: ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर के पार, मिडिल ईस्ट में तनाव से बढ़ी चिंताएं
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मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और प्रमुख तेल परिवहन मार्गों पर मंडराते खतरों के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर बड़ी तेजी देखी जा रही है। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 5 प्रतिशत से अधिक का उछाल आया है, जिसके बाद यह 95 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गया है। यह पिछले 6 हफ्तों का उच्चतम स्तर है, जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों में नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव और यमन में ईरान समर्थित हूती मिलिशिया द्वारा शिपिंग को दी जा रही धमकियों ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

बुधवार को तेल की कीमतों ने लगभग छह हफ्ते के सबसे ऊंचे स्तर को छू लिया। ब्रेंट क्रूड की कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकल गई और यह 95 डॉलर 47 सेंट के उच्च स्तर पर दिखाई दी। इसी तरह, अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड में भी 5 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई और यह 88 डॉलर 61 सेंट प्रति बैरल पर पहुंच गया। ये दोनों ही बेंचमार्क 11 जून के बाद से अपने सबसे ऊंचे स्तर पर हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि अगर तनाव इसी तरह बना रहा, तो कीमतें जल्द ही 100 डॉलर के आंकड़े को भी छू सकती हैं।

सैन्य संघर्ष और हवाई हमले

मिडिल ईस्ट में स्थिति तब और बिगड़ गई जब अमेरिकी सेना ने घोषणा की कि उसने ईरान पर लगातार 11वीं रात हमले किए हैं। ये हमले उस समय हुए जब कुवैती सेना ने जानकारी दी कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ईरानी ड्रोन्स को रोकने में जुटे थे। इस सैन्य टकराव ने तेल की सप्लाई चेन को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है। निवेशकों को डर है कि अगर यह संघर्ष और फैला, तो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल उत्पादक क्षेत्रों से होने वाली सप्लाई पूरी तरह बाधित हो सकती है।

शिपिंग रूट्स पर बढ़ता खतरा

अब ऊर्जा बाजार की नजरें दो प्रमुख जलडमरूमध्य यानी स्ट्रेट्स पर टिकी हैं: होर्मुज स्ट्रेट और बाब अल-मंडेब स्ट्रेट और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंडेब स्ट्रेट में सऊदी अरब का तेल ले जाने वाले जहाजों को निशाना बनाने की धमकी दी है। इसके साथ ही उन्होंने सऊदी अरब की नौसैनिक नाकेबंदी की भी घोषणा की है। केसीएम ट्रेड के चीफ मार्केट एनालिस्ट टिम वॉटरर के अनुसार, अब ट्रेडर्स रेड सी यानी लाल सागर में शिपिंग की संख्या पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।

बाब अल-मंडेब स्ट्रेट, जो लाल सागर के दक्षिणी प्रवेश द्वार पर स्थित है, सऊदी अरब के कच्चे तेल के निर्यात के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग बन गया है। इसका मुख्य कारण यह है कि इस महीने की शुरुआत में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम टूटने के बाद से होर्मुज स्ट्रेट से होने वाला ट्रैफिक काफी कम हो गया है। ऐसे में बाब अल-मंडेब पर किसी भी प्रकार का खतरा वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए घातक साबित हो सकता है।

टैंकरों का मार्ग परिवर्तन और रिफाइनरियों की रणनीति

हूती विद्रोहियों की धमकियों का असर अब जमीन पर दिखने लगा है और चीन और भारत के लिए सऊदी कच्चा तेल ले जा रहे तीन तेल टैंकरों ने मंगलवार को लाल सागर में अपना रास्ता बदल लिया। यमनी तट के जोखिम भरे रास्ते से बचने के लिए इन टैंकरों ने यू-टर्न लिया और स्वेज नहर की ओर बढ़ गए और नागा डॉट कॉम के मार्केट एनालिस्ट फ्रैंक वालबाम का कहना है कि टैंकरों के रास्ता बदलने से फिजिकल मार्केट और सऊदी निर्यात पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे कीमतों में और उछाल आने की संभावना है।

इस खतरे को देखते हुए एशियाई रिफाइनर अब वैकल्पिक रास्तों की तलाश कर रहे हैं। वे सऊदी अरब के लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह से स्वेज नहर और अफ्रीका के रास्ते कच्चा तेल मंगाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि जोखिम को कम किया जा सके। हालांकि, इन लंबे रास्तों के कारण परिवहन लागत में बढ़ोतरी हो रही है, जिसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ रहा है।

अमेरिकी इन्वेंट्री और बाजार का भविष्य

वैश्विक स्तर पर तेल के स्टॉक में कमी के बावजूद, अमेरिका से आए हालिया आंकड़े कुछ अलग संकेत दे रहे हैं। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के अनुसार, पिछले हफ्ते अमेरिका में कच्चे तेल और डिस्टिलेट की इन्वेंट्री में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि गैसोलीन के स्टॉक में कमी आई है। ये आंकड़े आधिकारिक सरकारी डेटा आने से पहले जारी किए गए हैं। हालांकि अमेरिकी स्टॉक में बढ़ोतरी से बाजार को थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन मिडिल ईस्ट का तनाव फिलहाल कीमतों को ऊपर बनाए रखने वाला सबसे बड़ा कारक बना हुआ है।

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