बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के लिए एक अत्यंत दुखद खबर सामने आई है और पार्टी के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन हो गया है। वह पिछले काफी समय से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और उनका इलाज चल रहा था। उमाशंकर सिंह बलिया जिले की रसड़ा तहसील के अंतर्गत आने वाले खनवर गांव के मूल निवासी थे और वर्तमान उत्तर प्रदेश विधानसभा में वह बसपा के एकमात्र विधायक के रूप में पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। उनके निधन से राजनीतिक गलियारों और उनके निर्वाचन क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
मायावती ने जताया गहरा शोक
बसपा सुप्रीमो मायावती ने उमाशंकर सिंह के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी संवेदनाएं प्रकट करते हुए कहा कि पार्टी के कर्मठ, ईमानदार और पूरी तरह से वफादार विधायक उमाशंकर सिंह की आज शाम लंबी बीमारी की वजह से इलाज के दौरान देहांत हो जाने की खबर अति-दुखद है। मायावती ने उनके परिवार और उनके सभी चाहने वालों के प्रति अपनी गहरी शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने अपने पोस्ट में आगे लिखा कि पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा की जितनी भी तारीफ की जाए वह कम है। मायावती ने बताया कि उमाशंकर सिंह का पूरा परिवार बसपा परिवार की तरह है और उनके परिवार के सभी लोग उन्हें बड़ी बहन की तरह ही पूरा आदर-सम्मान देते हैं। उन्होंने यह भी साझा किया कि वह उनके बेटे से लगातार संपर्क में थीं और आज शाम उनके देहांत की खबर भी उनके बेटे के माध्यम से ही प्राप्त हुई। मायावती ने कहा कि इस दुख की घड़ी में वह और पूरी पार्टी परिवार के साथ खड़ी है और उन्होंने परिवार को हिम्मत न हारने की सलाह दी है।
लगातार तीन बार दर्ज की जीत
उमाशंकर सिंह का राजनीतिक सफर काफी प्रभावशाली रहा है। उन्होंने रसड़ा विधानसभा सीट से लगातार तीन बार जीत दर्ज की। पहली बार उन्होंने 2012 में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और विधानसभा पहुंचे। इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनावों में जब पूरे प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की लहर थी, तब भी मायावती ने उन पर भरोसा जताया और वह अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे। उनकी यह जीत उनकी जमीनी पकड़ को दर्शाती थी। साल 2022 के चुनावों में भी उन्होंने बसपा के ही टिकट पर जीत हासिल की और सदन में अपनी पार्टी के इकलौते विधायक बने।
लोकायुक्त जांच और सदस्यता का विवाद
उमाशंकर सिंह का कार्यकाल विवादों से भी घिरा रहा और एडवोकेट सुभाष चंद्र सिंह ने 18 दिसंबर 2013 को एक शपथ पत्र देकर उनके खिलाफ लोकायुक्त संगठन में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप यह था कि विधायक होने के बावजूद उमाशंकर सिंह लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) से सरकारी ठेके लेकर सड़क निर्माण का कार्य कर रहे थे। इस मामले की जांच तत्कालीन लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा ने की थी। जांच में उमाशंकर सिंह को दोषी पाया गया, जिसके बाद 2015 में उन्हें विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। हालांकि, वह इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंचे और साल 2016 में हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को इस प्रकरण की खुद जांच करने और राज्यपाल को अवगत कराने का आदेश दिया। इसके बाद 14 जनवरी 2017 को उनकी विधायकी समाप्त कर दी गई थी, लेकिन उन्होंने फिर से चुनाव जीतकर सदन में वापसी की।
छात्र राजनीति से लेकर बड़े कारोबारी बनने तक का सफर
उमाशंकर सिंह की शुरुआती शिक्षा बलिया में ही हुई थी। कॉलेज के दिनों में उन्होंने छात्र राजनीति में कदम रखा था, हालांकि उस समय उन्हें विशेष कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने ठेकेदारी के क्षेत्र में प्रवेश किया, जहां उन्हें जबरदस्त सफलता मिली और उन्होंने काफी संपत्ति अर्जित की। इसी दौरान उन्होंने जिला पंचायत का चुनाव भी लड़ा और जीत हासिल की। ठेकेदारी में नाम कमाने के बाद उन्होंने छात्र शक्ति कन्स्ट्रक्शन्स नाम की कंपनी बनाई, जो मुख्य रूप से सड़क निर्माण का कार्य करती है। उनका कारोबार माइनिंग सेक्टर, होटल इंडस्ट्री और शिक्षा क्षेत्र (स्कूल) तक फैला हुआ है। उनकी पत्नी पुष्पा भी उनके व्यावसायिक कार्यों में हाथ बटाती हैं और वह सीएस इन्फ्रा कंस्ट्रक्शन लिमिटेड की मैनेजिंग डायरेक्टर हैं।