चीन की सामरिक चालें हमेशा से रहस्य के घेरे में रही हैं और दुनिया उसकी सैन्य तैयारियों के बारे में केवल उतना ही जान पाती है जितना बीजिंग प्रशासन दिखाना चाहता है। लेकिन हाल ही में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों ने पूर्वी शिनजियांग प्रांत के रेगिस्तान में छिपे एक बहुत बड़े राज का पर्दाफाश कर दिया है। इन तस्वीरों में चीन का एक विशाल परमाणु चक्रव्यूह नजर आ रहा है जिसने टोक्यो से लेकर वॉशिंगटन तक खलबली मचा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ने अपनी परमाणु मिसाइलों की सुरक्षा के लिए एक ऐसा सुरक्षा कवच तैयार किया है जिसे भेदना अमेरिका के लिए भी एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
शिनजियांग में कंक्रीट का विशाल नेटवर्क
पूर्वी शिनजियांग के इस बियाबान रेगिस्तान में चीन ने 80 से ज्यादा नए कंक्रीट लॉन्च पैड्स और बंकरों का एक पूरा जाल बिछा दिया है। ये निर्माण उसकी सबसे लंबी दूरी की मिसाइलों वाले साइलो के पास किया गया है। रेगिस्तान में बनाए गए ये कंक्रीट पैड्स इतने विशाल हैं कि इनका उपयोग चीन के मोबाइल मिसाइल लॉन्चर्स के बेड़े और एयर-डिफेंस मिसाइल बैटरियों के लिए बहुत आसानी से किया जा सकता है। कुछ समय पहले तक यह इलाका पूरी तरह सुनसान नजर आता था लेकिन अब यहाँ मिसाइलों का एक पूरा शहर बस चुका है।
350 नए मिसाइल साइलो का निर्माण
चीन की परमाणु महत्वाकांक्षाएं केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं हैं। वह लगभग 350 नए मिसाइल साइलो विकसित कर रहा है जिसे वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु निर्माण कार्यक्रम माना जा रहा है। इनमें से कई साइलो इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों यानी आईसीबीएम के लिए तैयार किए गए हैं। इन मिसाइलों की मारक क्षमता 12000 किलोमीटर से भी अधिक है जिसका सीधा मतलब यह है कि चीन से दागी गई मिसाइल बहुत आसानी से अमेरिका के किसी भी हिस्से को निशाना बना सकती है।
तीन परतों वाला परमाणु चक्रव्यूह
सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से पता चला है कि चीन ने इस रेगिस्तानी इलाके में तीन ऑक्टागन यानी अष्टकोणीय आकार के मिलिट्री बेस बनाए हैं। यही चीन का वह तीन लेयर वाला चक्रव्यूह है जो उसकी परमाणु शक्ति को सुरक्षा प्रदान करता है।
- पहली परत: यह चक्रव्यूह के बिल्कुल केंद्र में स्थित है जहाँ एक मुख्य कमांड बिल्डिंग बनाई गई है।
- दूसरी परत: केंद्र के चारों ओर इमारतों का एक बड़ा घेरा है जो सैन्य कर्मचारियों और सैनिकों के रहने के लिए बनाया गया है।
- तीसरी परत: इस बाहरी घेरे का उपयोग भारी सैन्य वाहनों और घातक ट्रक-माउंटेड मिसाइल लॉन्चर्स को छिपाने और स्टोर करने के लिए किया जाता है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस निर्माण के जरिए चीन अमेरिका को यह संदेश देना चाहता है कि किसी भी हमले की स्थिति में वह अपनी मिसाइल क्षमता को नष्ट नहीं होने देगा।
2030 तक परमाणु महाशक्ति बनने का लक्ष्य
अमेरिकी रक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार चीन के पास वर्तमान में लगभग 600 परमाणु हथियार मौजूद हैं। जिस गति से चीन इन हथियारों का उत्पादन और उनके लिए बुनियादी ढांचे का विकास कर रहा है उससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्ष 2030 तक चीन के पास परमाणु वॉरहेड्स की संख्या 1000 के आंकड़े को पार कर जाएगी। चीन अब अमेरिका और रूस की तरह एक परमाणु महाशक्ति बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। वह न केवल मिसाइलें बना रहा है बल्कि उनकी सुरक्षा के लिए रेगिस्तान में पुख्ता इंतजाम भी कर रहा है ताकि भविष्य में किसी भी युद्ध की स्थिति में उसकी परमाणु ताकत पूरी तरह सुरक्षित रहे।