चीन पाकिस्तान बॉर्डर पर सेना की ताकत बढ़ेगी, K9 वज्र तोपों को मंजूरी, जानें मुख्य अपडेट

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चीन पाकिस्तान बॉर्डर पर सेना की ताकत बढ़ेगी, K9 वज्र तोपों को मंजूरी, जानें मुख्य अपडेट
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भारतीय सेना हर मोर्चे पर अपनी सामरिक स्थिति को लगातार मजबूत करने में पूरी शिद्दत के साथ जुटी हुई है और उत्तर में चीन और पश्चिम में पाकिस्तान के साथ लगती सीमाओं पर लगातार बढ़ते तनाव और सुरक्षा चुनौतियों को पूरी गंभीरता से देखते हुए, अब भारतीय सेना अपने तोपखाने यानी आर्टिलरी रेजिमेंट की ताकत और गोलाबारी क्षमता को भारी पैमाने पर बढ़ाने की पुख्ता तैयारी में जुट चुकी है। इसी कड़ी में देश के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली महत्वपूर्ण डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने एक बड़ा और दूरगामी फैसला लेते हुए नई ट्रैक्ड सेल्फ-प्रोपेल्ड तोपों की खरीद के प्रस्ताव को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है और रक्षा मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली विशेष जानकारी के मुताबिक, इस नए और बड़े रक्षा प्रोजेक्ट के तहत भारतीय सेना को तीन सौ पैंतीस और आधुनिक K9 वज्र होवित्जर तोपें मिल सकती हैं। इन सभी अत्याधुनिक तोपों की कुल अनुमानित कीमत करीब बीस हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है, जो देश के रक्षा बजट और सैन्य आधुनिकीकरण के लिहाज से एक बहुत बड़ा निवेश माना जा रहा है।

सत्तर फीसदी से अधिक स्वदेशी तकनीक का होगा इस्तेमाल

रक्षा मंत्रालय के इस नए प्रस्ताव के तहत तैयार की जाने वाली इन नई K9 वज्र तोपों के निर्माण कार्य में सत्तर फीसदी से भी अधिक स्वदेशी सामग्री और तकनीक का इस्तेमाल किए जाने की बेहद ठोस योजना बनाई गई है। इस महत्वाकांक्षी स्वदेशी पहल की वजह से देश के भीतर रक्षा उत्पादन और विनिर्माण क्षेत्र को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा, जिससे भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी ज़मीन पर और अधिक मजबूती मिलेगी और इसके साथ ही देश की विभिन्न निजी तथा सार्वजनिक रक्षा कंपनियों को भी इसका सीधा और बड़ा वित्तीय लाभ पहुंचेगा। आपको यह जानकर हैरानी नहीं होगी कि इन अत्याधुनिक तोपों का निर्माण कार्य भारत की बेहद प्रतिष्ठित और अग्रणी इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टुब्रो यानी एलएंडटी द्वारा दक्षिण कोरियाई रक्षा कंपनियों के तकनीकी सहयोग और समन्वय के साथ किया जाता है। स्वदेशी तकनीक के बड़े पैमाने पर इस तरह के इस्तेमाल से न केवल विदेशी निर्भरता में भारी कमी आएगी, बल्कि भविष्य में इन तोपों के रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता भी देश के भीतर ही बेहद आसानी से और कम लागत में सुनिश्चित की जा सकेगी।

भारतीय सेना के बेड़े में पहले से मौजूद हैं दो सौ तोपें

मौजूदा समय की बात करें तो भारतीय सेना के पास पहले से ही लगभग दो सौ K9 वज्र तोपें पूरी तरह से ऑपरेशनल स्थिति में मौजूद हैं और देश की सीमाओं की चौकसी में अहम भूमिका निभा रही हैं। अब इस मौजूदा मजबूत बेड़े में तीन सौ पैंतीस और नई अत्याधुनिक तोपें शामिल हो जाने के बाद, भारतीय सेना की मोबाइल आर्टिलरी क्षमता में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक इजाफा दर्ज किया जाएगा। ये सभी तोपें अपनी अद्भुत गतिशीलता और मारक क्षमता के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती हैं, क्योंकि ये बहुत ही कम समय में अपनी जगह बदलकर यानी मूव करते हुए दुश्मन के ठिकानों और बंकरों पर सटीक और विनाशकारी हमला करने में पूरी तरह से सक्षम हैं। इन शक्तिशाली तोपों के सीमा पर तैनात हो जाने से पाकिस्तान और चीन से लगी हुई देश की तमाम संवेदनशील सीमाओं पर भारतीय सेना की आक्रामक और रक्षात्मक दोनों ही प्रकार की ताकत में जबरदस्त वृद्धि होगी, जिससे दुश्मन देश किसी भी प्रकार की हिमाकत करने से पहले सौ बार सोचेंगे।

कड़ाके की ठंड और ऊंचे पहाड़ों पर भी करेंगी अचूक काम

इन नई और आधुनिक तोपों की सबसे बड़ी तकनीकी खासियत यह होगी कि इनमें देश के बेहद ऊंचे पहाड़ी इलाकों और कड़ाके की ठंड वाले क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों के मुताबिक विशेष प्रकार के बदलाव किए जाने की पूरी संभावना है और खास तौर पर पूर्वी लद्दाख जैसे दुर्गम और अत्यधिक ठंडे क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए ये बदलाव किए जाएंगे, जहां सर्दियों के मौसम में तापमान शून्य से बहुत नीचे यानी माइनस में चला जाता है और सामान्य मशीनें तक काम करना बंद कर देती हैं। ऐसे में विशेष विंटराइजेशन किट की आधुनिक तकनीक की मदद से इन तोपों के सभी जरूरी इंजन और फायरिंग सिस्टम को अत्यधिक ठंड के चुनौतीपूर्ण माहौल में भी पूरी तरह से सुचारू रूप से काम करने लायक बनाया जा सकेगा। K9 वज्र तोपें मूल रूप से दक्षिण कोरिया की बेहद प्रसिद्ध K9 थंडर तोप का ही विशेष इंडियन वर्जन यानी भारतीय संस्करण हैं, जिन्हें भारतीय जलवायु और सैन्य जरूरतों के मुताबिक ढाला गया है। ये सभी तोपें एक सौ पचपन मिलीमीटर और बावन कैलिबर की स्वचलित स्वचालित तोपें हैं जो अपनी भीषण मारक क्षमता के लिए सेना के भीतर जानी जाती हैं। भारत की धरती पर ही इनके बड़े पैमाने पर निर्माण होने से देश की कुल रक्षा उत्पादन क्षमता में लगातार मजबूती आ रही है और इस नए और बड़े ऑर्डर के मिलने से विशेष तौर पर गुजरात के हजीरा में स्थित एलएंडटी के विशाल निर्माण संयंत्र और देश भर की तमाम छोटी-बड़ी घरेलू सप्लायर कंपनियों को भी भारी वित्तीय लाभ और व्यावसायिक बढ़ावा मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

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