चुनाव आयोग ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण एसआईआर (SIR) बैठक के बाद कई सख्त निर्देश जारी किए हैं, जिनका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और अखंडता को बनाए रखना है और इन निर्देशों में विशेष रूप से बूथ अधिकारियों और चुनाव संबंधी कार्यों में प्रतिनियुक्ति पर तैनात अन्य सरकारी कर्मचारियों को किसी भी प्रकार की धमकी या प्रभाव से बचाने पर जोर दिया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए सभी हितधारकों को इन दिशानिर्देशों का पालन करना होगा।
तृणमूल कांग्रेस के आरोपों का खंडन
एसआईआर बैठक के दौरान, अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग के समक्ष कुछ आशंकाएं और आरोप प्रस्तुत किए थे और चुनाव आयोग ने इन सभी आशंकाओं और हर निराधार आरोप का बिंदुवार खंडन किया। आयोग ने स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सभी कदम उठाए जा रहे हैं। आयोग ने तृणमूल कांग्रेस से अनुरोध किया कि वे 9 दिसंबर के बाद, जब मसौदा सूची उनके साथ साझा की जाएगी, अपने दावे और आपत्तियां प्रस्तुत करें। यह प्रक्रिया चुनावी प्रणाली का एक अभिन्न अंग है, जो सभी राजनीतिक दलों को अपनी चिंताओं को विधिवत उठाने का अवसर प्रदान करती है।
चुनाव कर्मियों के स्वतंत्र कामकाज पर जोर
चुनाव आयोग ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया है कि चुनाव संबंधी कार्यों में प्रतिनियुक्ति पर तैनात राज्य सरकार के कर्मचारी, बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ), निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) और जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) के स्वतंत्र कामकाज में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। बीएलओ मतदाता सूची को अद्यतन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जबकि ईआरओ और डीईओ चुनावी प्रक्रिया के समग्र प्रबंधन और पर्यवेक्षण के लिए जिम्मेदार होते हैं। इन अधिकारियों का स्वतंत्र रूप से कार्य करना यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि मतदाता सूची सटीक हो और चुनाव प्रक्रिया बिना किसी पूर्वाग्रह के संचालित हो। किसी भी प्रकार का दबाव या धमकी इन अधिकारियों की कार्यप्रणाली को बाधित। कर सकती है, जिससे चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग सकता है।
पुलिस महानिदेशक और पुलिस आयुक्त को निर्देश
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक और कोलकाता पुलिस आयुक्त को एक पत्र भी लिखा है। इस पत्र में उन्हें यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) पर राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं द्वारा किसी भी प्रकार का दबाव या धमकी न डाली जाए। यह कदम बीएलओ की सुरक्षा और उनके स्वतंत्र कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है, क्योंकि वे जमीनी स्तर पर मतदाताओं के साथ सीधे संपर्क में रहते हैं और अक्सर राजनीतिक दबाव का सामना करते हैं और पुलिस को यह सुनिश्चित करना होगा कि बीएलओ बिना किसी डर या पक्षपात के अपने कर्तव्यों का पालन कर सकें, जो एक स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
नए मतदान केंद्रों की स्थापना
मतदाताओं की पहुंच और सुविधा को बढ़ाने के लिए, चुनाव आयोग ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को झुग्गी-झोपड़ियों, ऊँची इमारतों और गेटबंद आवासीय कॉलोनियों में नए मतदान केंद्र सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है और यह निर्देश पूरे भारत में चुनाव आयोग के निर्देशों के आधार पर किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी नागरिक, चाहे वे किसी भी प्रकार के आवास में रहते हों, आसानी से अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। यह पहल शहरी और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुंचने में। होने वाली कठिनाइयों को कम करने में मदद करेगी, जिससे मतदान प्रतिशत में वृद्धि हो सकती है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की सुरक्षा
पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय में सुरक्षा उल्लंघन से संबंधित हालिया घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए, चुनाव आयोग ने कार्यालय को सुरक्षा के लिहाज से उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है। यह कदम चुनाव संबंधी महत्वपूर्ण डेटा और कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, चुनाव आयोग ने कोलकाता पुलिस आयुक्त को पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के मौजूदा और नए कार्यालय की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है और यह सुनिश्चित करेगा कि सीईओ का कार्यालय, जो चुनावी प्रक्रिया का केंद्रीय बिंदु है, किसी भी बाहरी हस्तक्षेप या सुरक्षा खतरे से मुक्त होकर कार्य कर सके। इन सभी निर्देशों के माध्यम से, चुनाव आयोग ने स्वतंत्र, निष्पक्ष। और सुरक्षित चुनावी माहौल सुनिश्चित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।