Yogi Adityanath Case: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर 15 साल पुराने एक मामले में मुकदमा दर्ज होगा या नहीं, सुप्रीम कोर्ट आज अपना फैसला सुनाएगा. बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. सीएम योगी आदित्यनाथ पर साल 2007 में भड़काऊ भाषण देने का आरोप है. इस मामले में केस दायर करने पर रोक लगा दी गई है. वहीं सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार ने याचिका दायर की है, जिसमें मुकदमे की इजाजत न देने की गुजारिश की गई है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट आज फैसला सुनाएगा.
सरकार ने दी ये दलील
इससे पहले बुधवार को उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने चीफ जस्टिस एन वी रमन्ना, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस सी.टी. रविकुमार की बेंच से कहा कि मामले में कुछ भी नहीं बचा है और सीडी को सीएफएसएल को भेजा गया था, जिसमें पाया गया कि इसमें छेड़छाड़ की गई थी. यह देखते हुए कि याचिका में उठाए गए मुद्दे पर पहले ही हाई कोर्ट विचार कर चुका है, उन्होंने कहा, 'आप 15 साल बाद अब एक मरे हुए घोड़े की पिटाई नहीं कर सकते क्योंकि वह आदमी आज सीएम है.'
सुप्रीम कोर्ट से लगाई थी गुहार
फरवरी 2018 में, हाई कोर्ट ने कहा था कि उसे मुकदमा चलाने की मंजूरी देने से इनकार करने का फैसला लेने की प्रक्रिया में कोई प्रक्रियात्मक गलती नहीं मिली. याचिकाकर्ता परवेज परवाज और अन्य ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. बेंच ने याचिकाकर्ताओं के वकील से कहा कि अगर कोई आपराधिक कार्यवाही नहीं होती है, तो मंजूरी का सवाल ही कहां है.