संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले कांग्रेस पार्टी ने एक बड़ा राजनीतिक रुख अपनाते हुए घोषणा की है कि वह सदन में परिसीमन बिल का पुरजोर विरोध करेगी। यह निर्णय दिल्ली में आयोजित कांग्रेस संसदीय दल की एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद लिया गया है। गुरुवार को 10 जनपथ पर सोनिया गांधी के नेतृत्व में हुई इस बैठक में पार्टी की भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा, केसी वेणुगोपाल, शशि थरूर, पी चिदंबरम, कुमारी शैलजा और मनीष तिवारी जैसे दिग्गज नेता और सांसद शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य सोमवार से शुरू होने वाले मानसून सत्र के दौरान सरकार को घेरने की योजना बनाना था।
विपक्षी एकजुटता और परिसीमन बिल पर रुख
बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि पार्टी को ऐसी खबरें मिली हैं कि सरकार परिसीमन बिल लाने की तैयारी में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी इस बिल का विरोध करेगी और इस मुद्दे पर समान विचारधारा वाले अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर काम करेगी। जयराम रमेश ने बताया कि हालांकि अभी तक सरकार की ओर से कौन-कौन से बिल लाए जाएंगे, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन रविवार को होने वाली सर्वदलीय बैठक में स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। हालांकि, उन्होंने सर्वदलीय बैठक को महज एक औपचारिकता करार दिया और कहा कि वहां चर्चा तो बहुत होती है लेकिन अंत में सरकार अपनी मर्जी ही थोपती है।
विभिन्न विधेयकों पर विरोध की तैयारी
कांग्रेस ने केवल परिसीमन बिल ही नहीं, बल्कि कई अन्य प्रस्तावित कानूनों पर भी अपना विरोध दर्ज कराने का मन बना लिया है। जयराम रमेश के अनुसार, पार्टी FCRA बिल और 2013 के खाद्य सुरक्षा कानून में प्रस्तावित संशोधनों का भी विरोध करेगी। उन्होंने याद दिलाया कि 17 अप्रैल को 131वें संविधान संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान सरकार को हार का सामना करना पड़ा था, इसलिए अब वह परिसीमन बिल के जरिए अपनी योजनाएं आगे बढ़ाने की कोशिश कर सकती है। इसके अलावा, 'एक देश, एक चुनाव' और सांसदों, विधायकों व प्रधानमंत्री के कार्यकाल से जुड़े उन प्रावधानों का भी विरोध किया जाएगा जिनका विपक्ष ने जेपीसी में बहिष्कार किया था।
सदन में आंकड़ों का गणित
संसद में इस बार सरकार के लिए राह इतनी आसान नहीं होगी क्योंकि संविधान संशोधन बिल पास कराने के लिए 360 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होगी। वर्तमान में सरकार के पास 324 सांसदों का समर्थन है। हालांकि, राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं। शरद पवार की एनसीपी, जिसके पास 8 सांसद हैं, ने संकेत दिया है कि यदि परिसीमन बिल 50 प्रतिशत वाले फॉर्मूले पर आता है, तो वे इसका समर्थन कर सकते हैं। इसके अलावा डीएमके के भी सरकार के साथ आने की संभावना जताई जा रही है, जिससे यह आंकड़ा 354 तक पहुंच सकता है। यदि वाईएसआर और उद्धव गुट के 3 सांसदों ने भी साथ दिया, तो सरकार आसानी से 360 का जादुई आंकड़ा पार कर लेगी। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपनी तैयारी तेज कर दी है और हाल ही में अमित शाह और नितिन नवीन के साथ करीब दो घंटे और तीस मिनट तक मैराथन बैठक की है।