अजमेर जिले के केकड़ी क्षेत्र में स्थित मीणों का नयागांव में भगवान देवनारायण धाम पर भादवीं छठ के पावन अवसर पर गुरुवार को लक्खी मेले का भव्य आयोजन हुआ। इस मेले में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा हो गई। भगवान देवनारायण के दर्शन पाने के लिए भक्तों की लंबी-लंबी कतारें सुबह से ही लगनी शुरू हो गई थीं। श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था और पूरा क्षेत्र देवनारायण भगवान के जयकारों से गूंज उठा।
बारिश के बावजूद बना रहा श्रद्धालुओं का उत्साह
मेले के दौरान दोपहर के समय मौसम ने करवट ली और तेज बारिश का दौर शुरू हो गया। अचानक हुई इस बारिश की वजह से खुले में खड़े दर्शनार्थियों को कुछ समय के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनकी आस्था के आगे मौसम की बाधा टिक नहीं सकी। शाम करीब 4 बजे जैसे ही मौसम साफ हुआ, मेले की रौनक और भी बढ़ गई। पूरे दिन के दौरान करीब 200000 से अधिक श्रद्धालुओं ने भगवान देवनारायण के दरबार में मत्था टेका। भीड़ का आलम यह था कि देवनारायण धाम से करीब 3 किलोमीटर की दूरी तक केवल श्रद्धालुओं का सिर ही नजर आ रहा था। भक्तों को दर्शन के लिए कई घंटों तक कतारों में अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा।
धार्मिक अनुष्ठान और मेले के आकर्षण
श्रद्धालुओं ने भगवान देवनारायण को अपनी श्रद्धा के अनुसार खीर, चूरमे और नारियल का भोग लगाया और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए मन्नतें मांगी और मेले के सांस्कृतिक पक्ष की बात करें तो यहां आयोजित घोड़ी नृत्य लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा। मेले में आए बच्चों, महिलाओं और पुरुषों ने विभिन्न प्रकार के झूलों और चकरियों का जमकर आनंद लिया। वहीं, ग्रामीण परिवेश की महिलाओं और युवतियों ने मनिहारी की दुकानों से चूड़ियां और अन्य श्रृंगार के सामानों की जमकर खरीदारी की।
400 हलवाइयों ने तैयार की 150000 लोगों की प्रसादी
मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी की अभूतपूर्व व्यवस्था की गई थी। इस विशाल कार्य के लिए 400 से अधिक हलवाइयों की एक बड़ी टीम पिछले 2 दिनों से दिन-रात भोजन तैयार करने में जुटी हुई थी। करीब 150000 श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी का लक्ष्य रखा गया था। सुबह भगवान देवनारायण को विधिवत भोग लगाने के बाद आम जनता के लिए प्रसादी का वितरण शुरू किया गया। देर शाम तक करीब 150000 से अधिक श्रद्धालुओं ने पंगत में बैठकर भोजन प्रसादी ग्रहण की, जो अपने आप में एक बड़ा कीर्तिमान है।
सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन
इतनी बड़ी संख्या में उमड़ी भीड़ को नियंत्रित करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। मेले में केकड़ी सदर, केकड़ी सिटी, सरवाड़, सराना और सावर पुलिस थानों के जाप्ते के साथ-साथ पुलिस लाइन से अतिरिक्त बल भी तैनात किया गया था। सुरक्षा व्यवस्था की कमान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार मील और पुलिस उपाधीक्षक मनोज कुमार गुप्ता ने संभाली, जिन्होंने दिनभर मेले का भ्रमण कर स्थिति का जायजा लिया। यातायात को सुचारू रखने के लिए केकड़ी रोड, उन्दरी गांव और गुलगांव की ओर से आने वाले वाहनों को करीब 1 किलोमीटर पहले ही बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया गया था। हालांकि, शाम के समय भीड़ बढ़ने से कुछ स्थानों पर जाम की स्थिति बनी, जिसे सदर थानाधिकारी मुकेश गौरा और उनके जवानों ने कड़ी मशक्कत के बाद सुचारू कराया।
पैदल यात्राएं और भजन संध्या का उल्लास
मेले में केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि शाहपुरा, भीलवाड़ा, बूंदी, टोंक और अजमेर सहित कई जिलों से श्रद्धालु पहुंचे और कई भक्त डीजे की धुनों पर नाचते-गाते और हाथों में ध्वज-पताकाएं लेकर पैदल यात्रा के रूप में धाम पहुंचे। एकलसिंहा से 51 ध्वजों के साथ आई पैदल यात्रा विशेष रूप से चर्चा का विषय रही। मेले की पूर्व संध्या पर बुधवार रात को एक विशाल भजन संध्या का आयोजन भी किया गया था, जिसमें प्रसिद्ध गायक कलाकार राजू रावल, पूरण गुर्जर और हंसराज गुर्जर ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। श्रद्धालु देर रात तक भगवान के भजनों पर झूमते रहे।