अमेरिकी डॉलर के सामने भारतीय रुपए ने एक बार फिर से बेहद जबरदस्त और शानदार छलांग लगाई है। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों को गहराई से देखें तो पता चलता है कि भारतीय रुपया करीब दो सौ दिन के लंबे अंतराल के बाद चौदह रुपये के कमजोर स्तर से मजबूत होकर सीधे तिरानवे रुपये के स्तर पर आ गया है। इस पूरी वित्तीय हलचल की सबसे खास बात यह है कि बीते सात कारोबारी दिनों में डॉलर के मुकाबले में रुपए में लगातार एक दशमलव इकतीस फीसदी की भारी तेजी देखने को मिल चुकी है। जब से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है, विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों में जमकर खरीदारी की है और साथ ही अमेरिका में हुए मध्यावधि चुनावों यानी मिडटर्म इलेक्शन में डोनाल्ड ट्रंप को हार का सामना करना पड़ा है, तब से भारतीय मुद्रा यानी रुपए में अभूतपूर्व उछाल देखने को मिला है। वित्तीय बाजार के तमाम बड़े जानकारों की मानें तो आने वाले दिनों और हफ्तों में डॉलर के मुकाबले में रुपया और अधिक मजबूती दिखाते हुए नब्बे रुपये के स्तर के आसपास देखने को मिल सकता है। आइए आपको विस्तार से बताते हैं कि आखिर रुपए और डॉलर के मुकाबले में किस तरह के हैरान करने वाले और महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपए में आई ऐतिहासिक तेजी
अमेरिकी मुद्रा यानी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया शुक्रवार के कारोबारी सत्र में तैंतालीस पैसे की जोरदार और शानदार तेजी के साथ तिरानवे रुपये अट्ठानवे पैसे प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ। अमेरिकी डॉलर सूचकांक में लगातार बने हुए कमजोर रुख, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट और आयात लागत को लेकर निवेशकों के मन में बनी चिंताओं में कमी आने की वजह से कारोबारी धारणा काफी मजबूत हुई, जिससे रुपए में यह बड़ी तेजी दर्ज की गई। फॉरेन करेंसी एक्सचेंज मार्केट के विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, घरेलू शेयर बाजारों में आई जबरदस्त तेजी और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी एआई पर होने वाले खर्च में सुस्ती की आशंकाओं की वजह से भी रुपए को लेकर बाजार की धारणा काफी मजबूत हुई है। इंटरबैंक फॉरेन करेंसी एक्सचेंज मार्केट में रुपया कारोबार की शुरुआत में चौदह रुपये पचास पैसे प्रति डॉलर के स्तर पर खुला था। दिनभर के कामकाज के दौरान यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले तिरानवे रुपये बयासी पैसे के उच्च स्तर तथा चौदह रुपये पचास पैसे के निचले स्तर तक गया। अंत में यह तिरानवे रुपये अट्ठानवे पैसे प्रति डॉलर के भाव पर बंद हुआ, जो इसके पिछले बंद भाव के मुकाबले तैंतालीस पैसे की साफ बढ़त को दर्शाता है। इससे पहले बृहस्पतिवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पांच पैसे की मामूली तेजी के साथ चौदह रुपये इकतालीस पैसे के स्तर पर बंद हुआ था।
दो सौ दिन के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा भारतीय रुपया
करेंसी मार्केट और फॉरेक्स बाजार के आधिकारिक आंकड़ों को यदि गौर से देखा जाए तो डॉलर के मुकाबले में भारतीय रुपया सीधे दो सौ दिन के नए और शानदार हाई पर पहुंच गया है। इससे पहले आखिरी बार रुपया चौदह रुपये के स्तर से बेहतर स्थिति में बाईस अप्रैल दो हजार सभीस को देखने को मिला था। उस समय अमेरिकी डॉलर के मुकाबले में रुपया तिरानवे रुपये अस्सी पैसे के मजबूत स्तर पर ट्रेड कर रहा था। इस पूरी अवधि की सबसे खास और उल्लेखनीय बात यह है कि पिछले सात कारोबारी दिनों के भीतर ही डॉलर के मुकाबले में रुपए की कीमत में एक दशमलव इकतीस फीसदी की तीव्र तेजी दर्ज की गई है। आंकड़ों पर अगर गहरी नजर डालें तो पता चलता है कि डॉलर के मुकाबले में रुपया अट्ठाइस अक्टूबर को पंद्रह रुपये तेईस पैसे के कमजोर स्तर पर देखने को मिला था। इसका सीधा सा मतलब यह है कि तब से लेकर अब तक डॉलर के मुकाबले रुपए में लगातार सुधार हुआ है और निवेशकों का भरोसा भारतीय अर्थव्यवस्था पर तेजी से बढ़ा है।
घरेलू शेयर बाजार और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार का हाल
इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख और बड़ी मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति और मजबूती को दर्शाने वाला अंतरराष्ट्रीय डॉलर सूचकांक शून्य दशमलव उनचास प्रतिशत की बढ़त के साथ एक सौ दो रुपये चार पैसे के स्तर पर बना हुआ था। इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल का मानक कहे जाने वाले ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव वायदा कारोबार में दो दशमलव चार प्रतिशत की तेजी के साथ एक सौ रुपये तीस पैसे प्रति बैरल दर्ज किया गया। घरेलू शेयर बाजार के मोर्चे पर भी निवेशकों के लिए बेहद खुशी का माहौल रहा जहां बंबई स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स एक हजार सात सौ अठारह रुपये इकता इक्कीस पैसे की भारी छलांग लगाते हुए इक्यासी हजार अट्ठाइस रुपये दो पैसे के स्तर पर बंद हुआ और इसके अलावा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी सूचकांक भी चार सौ तिरानवे रुपये पचहत्तर पैसे की मजबूत बढ़त हासिल करते हुए पच्चीस हजार तीस रुपये पैंतीस पैसे के स्तर पर बंद होने में कामयाब रहा। शेयर बाजार से जुड़े आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक यानी एफआईआई बाजार में इस दौरान शुद्ध रूप से खरीदार बने रहे और उन्होंने शुक्रवार के दिन कुल तेरह हजार सात सौ انچاس रुपये बयासी पैसे के भारी-भरकम मूल्य के शेयरों की शुद्ध लिवाली यानी खरीदारी की।
बाजार के विशेषज्ञों और जानकारों की क्या है राय?
प्रख्यात वित्तीय संस्थान मिराए एसेट शेयरखान के वरिष्ठ रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी राय रखते हुए कहा कि हमारा यह स्पष्ट अनुमान है कि आने वाले समय में घरेलू बाजारों में बनी मजबूती और विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई द्वारा किए जाने वाले निरंतर निवेश की वजह से रुपया बेहद सकारात्मक रुख के साथ कारोबार करता रहेगा। अमेरिका में हाल ही में संपन्न हुए मध्यावधि चुनावों के बाद डॉलर के सूचकांक में आए कमजोर रुख और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में आई गिरावट से भी भारतीय रुपए को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर मजबूत समर्थन प्राप्त हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि यूक्रेन और रूस के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया के देशों में हमलों की स्थिति बढ़ती है, तो इससे रुपए की तेज रफ्तार और बढ़त पर कुछ हद तक अंकुश लग सकता है। चौधरी ने अपने तकनीकी विश्लेषण में यह भी कहा कि आने वाले दिनों में डॉलर के मुकाबले रुपये की हाजिर यानी स्पॉट एक्सचेंज रेट तिरानवे रुपये पैंसठ पैसे से चौदह रुपये बीस पैसे के दायरे के भीतर रहने की पूरी संभावना है। सरकार और केंद्रीय बैंक की नीतियों का भी इस पर सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है।