Donald Trump News: 'प्लीज जनता को ये बात न बताएं', डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ को लेकर फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों का उड़ाया मज़ाक

Donald Trump News - 'प्लीज जनता को ये बात न बताएं', डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ को लेकर फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों का उड़ाया मज़ाक
| Updated on: 07-Jan-2026 06:06 PM IST
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने फ्रांसीसी समकक्ष इमैनुएल मैक्रों का मज़ाक उड़ाते हुए दावा किया है कि टैरिफ की धमकी के कारण मैक्रों को दवाओं की कीमतें बढ़ाने के लिए सहमत होना पड़ा और उन्होंने ट्रंप से इस बात को गोपनीय रखने की गुहार लगाई। ट्रंप ने यह टिप्पणी रिपब्लिकन सांसदों को संबोधित करते हुए की, जहां उन्होंने अपनी 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' नीति की प्रभावशीलता और अन्य देशों के साथ बातचीत में टैरिफ की धमकी के त्वरित परिणामों पर जोर दिया।

टैरिफ की धमकी और मैक्रों का कथित झुकना

डोनाल्ड ट्रंप ने विस्तार से बताया कि उन्होंने फ्रांस को अमेरिका में आयात होने वाली सभी फ्रांसीसी दवाओं पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी दी थी। ट्रंप के अनुसार, इस धमकी का तत्काल प्रभाव पड़ा, और फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों उनकी मांगों के आगे झुक गए। ट्रंप ने दावा किया कि मैक्रों ने उनसे प्रार्थना की कि 'प्लीज ये बात आप किसी को मत बताइएगा', जो इस बात का संकेत था कि मैक्रों इस समझौते को सार्वजनिक नहीं करना चाहते थे। यह घटना ट्रंप की व्यापार रणनीति का एक प्रमुख उदाहरण प्रस्तुत करती है, जिसमें वे आर्थिक दबाव का उपयोग करके अन्य देशों से रियायतें प्राप्त करने का दावा करते हैं।

अमेरिकी स्वास्थ्य सेवा सब्सिडी का दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने दावों को सही ठहराते हुए कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने दशकों से वैश्विक स्वास्थ्य सेवा को सब्सिडी दी है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी उपभोक्ता फ्रांसीसी उपभोक्ताओं की तुलना में प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के लिए 14 गुना अधिक भुगतान कर रहे थे, जो एक महत्वपूर्ण असमानता थी जिसे वे ठीक करना चाहते थे। इस पृष्ठभूमि में, ट्रंप ने फ्रांसीसी नेता से दवाओं की कीमतें बढ़ाने के लिए कहा, ताकि अमेरिकी उपभोक्ताओं पर बोझ कम हो सके और यह दावा अमेरिकी व्यापार नीति के पीछे के तर्क को उजागर करता है, जहां ट्रंप ने अक्सर अमेरिकी हितों को प्राथमिकता देने की बात कही है।

फ्रांसीसी उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ की चेतावनी

ट्रंप ने बताया कि उन्होंने फ्रांस को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि वे अमेरिकी मांगों को नहीं मानते हैं, तो उन्हें शैंपेन और वाइन सहित सभी फ्रांसीसी उत्पादों पर 25 प्रतिशत का भारी टैरिफ झेलना होगा और यह धमकी एक शक्तिशाली आर्थिक हथियार के रूप में कार्य करती है, जिसका उद्देश्य फ्रांस को अमेरिकी शर्तों को स्वीकार करने के लिए मजबूर करना था। ट्रंप ने दावा किया कि टैरिफ की इस सीधी धमकी ने मैक्रों को अमेरिकी मांगों के आगे झुकने पर मजबूर कर दिया, जिससे यह साबित हुआ कि उनकी कठोर बातचीत की रणनीति प्रभावी थी।

मैक्रों की कथित गुहार और मूल्य वृद्धि

ट्रंप के अनुसार, फ्रांसीसी नेता ने उनसे कहा, 'डोनाल्ड आपकी बात मान ली। मैं अपनी प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की कीमतें 200 प्रतिशत या जो भी आप चाहें, बढ़ाना चाहता हूं। आप जो भी चाहते हैं, डोनाल्ड, कृपया जनता को न बताएं, मैं आपसे विनती करता हूँ। ' यह कथित बातचीत ट्रंप के दावों का एक केंद्रीय बिंदु है, जो मैक्रों की कथित कमजोरी और गोपनीयता की इच्छा को उजागर करती है और ट्रंप ने आगे दावा किया कि उनकी मांग मानने पर फ्रांस ने दवाओं की कीमतें $10 प्रति गोली से बढ़ाकर $30 कर दीं, जबकि अमेरिका में कीमतें कम हो गईं। यह उनके लिए एक बड़ी जीत थी, जिसे वे अपनी 'मोस्ट। फेवर्ड नेशन' नीति की सफलता के रूप में प्रस्तुत करते हैं।

टैरिफ धमकियों की व्यापक प्रभावशीलता

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि यह रणनीति केवल फ्रांस तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि 'हर देश ने यही बात कही। ' उन्होंने कहा कि अन्य देशों के साथ बातचीत में, टैरिफ की धमकी देने के औसतन 3 और 2 मिनट के भीतर विदेशी नेताओं ने अपनी दवाओं की कीमतें चार गुना करने पर सहमति व्यक्त की। यह दावा ट्रंप की व्यापारिक बातचीत के दृष्टिकोण की व्यापक प्रभावशीलता को दर्शाता है, जहां वे मानते हैं कि कठोर धमकियां और त्वरित परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उनके अनुसार, उनकी टैरिफ धमकी उनके अनुरोध से 42 गुना अधिक थी, जो उनके दबाव की तीव्रता को दर्शाता है।

फ्रांस की ओर से तत्काल प्रतिक्रिया का अभाव

ट्रंप की इन टिप्पणियों के बाद, न तो फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल। मैक्रों और न ही फ्रांसीसी सरकार ने तुरंत कोई जवाब दिया है। यह चुप्पी इस घटना के आसपास के कूटनीतिक तनाव और संवेदनशीलता को दर्शाती है। ट्रंप के सार्वजनिक रूप से मैक्रों का मज़ाक उड़ाने और उनकी कथित गुहार का खुलासा करने से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक नया मोड़ आ गया है, जहां सार्वजनिक बयानबाजी और व्यक्तिगत उपहास कूटनीति का हिस्सा बन गए हैं।

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