मध्य पूर्व में शनिवार को युद्ध की स्थिति उस समय और अधिक गंभीर हो गई जब अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान के विभिन्न ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले शुरू किए। इन हमलों के जवाब में ईरान ने भी विभिन्न देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इस सैन्य संघर्ष की आंच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) तक पहुंच गई है, जहां शनिवार को दुबई में जोरदार धमाकों की आवाज सुनी गई। सुरक्षा कारणों से दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा को तत्काल खाली करा लिया गया। इसके साथ ही सऊदी अरब की राजधानी रियाद में भी धमाकों की सूचना मिली है, जिससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
दुबई में अफरा-तफरी और बुर्ज खलीफा का घटनाक्रम
शनिवार सुबह दुबई के निवासियों ने शहर के विभिन्न हिस्सों में तेज धमाकों की आवाज सुनी और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाके इतने जोरदार थे कि इमारतों की खिड़कियां हिल गईं। सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए अधिकारियों ने बुर्ज खलीफा को खाली कराने का आदेश दिया। अबू धाबी के निवासियों ने भी अमेरिकी सैन्य कर्मियों की उपस्थिति वाले क्षेत्रों के पास विस्फोटों की आवाज सुनी। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से शांत रहने की अपील की है, लेकिन अचानक हुई इस कार्रवाई से पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों पर गहरा असर पड़ा है। सुरक्षा एजेंसियां वर्तमान में प्रभावित क्षेत्रों की घेराबंदी कर जांच कर रही हैं।
यूएई रक्षा मंत्रालय का आधिकारिक बयान और हताहत
संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की है कि देश पर ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया था। मंत्रालय के अनुसार, यूएई की वायु रक्षा प्रणालियों (Air Defense Systems) ने सक्रियता दिखाते हुए कई मिसाइलों को हवा में ही सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। हालांकि, मिसाइलों का मलबा एक आवासीय क्षेत्र में गिरने से संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। अधिकारियों ने दुखद जानकारी साझा करते हुए बताया कि मलबे की चपेट में आने से एक एशियाई नागरिक की मौत हो गई है। रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि स्थिति अब नियंत्रण में है और सभी एजेंसियां चौबीसों घंटे निगरानी कर रही हैं।
अमेरिका और इजरायल की ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई
यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ एक व्यापक सैन्य अभियान छेड़ा। रिपोर्टों के अनुसार, इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालय सहित कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को जारी रखे हुए है और ऐसी मिसाइलें विकसित कर रहा है जो अमेरिका के लिए खतरा बन सकती हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से ईरानी जनता से वर्तमान शासन के खिलाफ खड़े होने का आह्वान किया है। वहीं, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य ईरान द्वारा उत्पन्न अस्तित्वगत खतरे को समाप्त करना है।
ईरान की जवाबी कार्रवाई और रक्षा का संकल्प
हमलों के जवाब में ईरान के विदेश मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि तेहरान अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगा। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि मातृभूमि की रक्षा का समय आ गया है और दुश्मन के सैन्य अतिक्रमण का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा और ईरान ने दावा किया है कि उसने क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए हैं। मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि ईरान का इतिहास गवाह है कि उसने कभी विदेशी आक्रमण के आगे घुटने नहीं टेके हैं और इस बार भी प्रतिक्रिया निर्णायक होगी। इस सैन्य टकराव ने वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय निगरानी
मिडिल-ईस्ट में जारी इस संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं बढ़ गई हैं और यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों में हुए धमाकों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह युद्ध केवल दो देशों तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, बैलिस्टिक मिसाइलों का उपयोग और नागरिक क्षेत्रों में मलबे का गिरना एक गंभीर मानवीय संकट की ओर इशारा करता है। वर्तमान में यूएई के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि सुरक्षा स्थिति स्थिर बनी हुई है, लेकिन हाई अलर्ट जारी रखा गया है और विभिन्न देशों के दूतावासों ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है और प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी है।