देश में E20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे थे। इन सवालों और मिलावट के दावों के बीच अब देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों ने अपनी चुप्पी तोड़ी है और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन ने एक संयुक्त बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि E20 पेट्रोल में क्लोराइड या पानी की मिलावट के दावों में कोई सच्चाई नहीं है। कंपनियों ने कहा है कि उन्होंने इस मामले की गहराई से जांच की है और ग्राहकों को घबराने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है क्योंकि सप्लाई किया जा रहा ईंधन पूरी तरह सुरक्षित और मानक के अनुरूप है।
सप्लाई चेन के हर स्तर पर हुई सघन जांच
तेल कंपनियों ने बताया कि मिलावट के दावों की सच्चाई जानने के लिए उन्होंने देशभर में एक व्यापक जांच अभियान चलाया। यह जांच केवल पेट्रोल पंपों तक सीमित नहीं थी, बल्कि सप्लाई चेन के हर स्तर पर सैंपल लिए गए। इसमें तेल रिफाइनरियां, एथेनॉल बनाने वाली डिस्टिलरी, स्टोरेज डिपो, टर्मिनल और अंत में पेट्रोल पंप शामिल थे। इस विस्तृत जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि पेट्रोल की शुद्धता और गुणवत्ता में कहीं भी कोई कमी न रह जाए। कंपनियों के अनुसार, पूरी प्रक्रिया की निगरानी उच्च स्तर पर की जा रही है ताकि उपभोक्ताओं को बेहतरीन गुणवत्ता का ईंधन मिल सके।
रिफाइनरी और एथेनॉल की जांच के नतीजे
गुणवत्ता की जांच सबसे पहले रिफाइनरी स्तर पर की गई, जहां से पेट्रोल की मुख्य सप्लाई शुरू होती है। तेल कंपनियों ने देश की विभिन्न रिफाइनरियों से 100 से अधिक पेट्रोल के सैंपल लिए। इन सैंपलों की लैब में जांच करने पर पाया गया कि क्लोराइड की मात्रा 1 पीपीएम या उससे भी कम थी। यह इस बात का प्रमाण है कि रिफाइनरी से निकलने वाला पेट्रोल अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतर रहा है। इसके बाद, पेट्रोल में मिलाए जाने वाले एथेनॉल की भी जांच की गई। इसके लिए देशभर की 80 डिस्टिलरी से सैंपल इकट्ठा किए गए। पिछले 10 दिनों के भीतर तीनों तेल कंपनियों और सेंटर फॉर हाई टेक्नोलॉजी की एक विशेष टीम ने इन सैंपलों का परीक्षण किया। जांच में एथेनॉल में क्लोराइड की मात्रा 3 पीपीएम से कम पाई गई, जो कि सरकार द्वारा तय की गई अधिकतम सीमा से बहुत कम है।
डिपो और टर्मिनल पर निगरानी
रिफाइनरी से निकलने के बाद पेट्रोल को डिपो और टर्मिनल पर स्टोर किया जाता है, जहां से इसे पेट्रोल पंपों तक भेजा जाता है। तेल कंपनियों ने इन केंद्रों पर भी कड़ी नजर रखी है। जांच के दौरान डिपो और टर्मिनल से 80 से अधिक सैंपल लिए गए। इन सभी सैंपलों की रिपोर्ट में क्लोराइड की मात्रा निर्धारित सीमा के भीतर ही पाई गई। कंपनियों का कहना है कि स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन के दौरान पेट्रोल की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सभी जरूरी प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है और नियमित अंतराल पर टेस्टिंग की जा रही है।
पेट्रोल पंपों पर की गई बड़ी कार्रवाई और रिपोर्ट
E20 पेट्रोल में क्लोराइड की मात्रा बहुत अधिक होने के दावों की जांच के लिए तेल कंपनियों ने पेट्रोल पंपों पर सबसे बड़ा अभियान चलाया। अब तक देशभर के पेट्रोल पंपों से 1000 से ज्यादा सैंपल लिए जा चुके हैं। हाल ही में जांचे गए 160 सैंपलों की विस्तृत रिपोर्ट में क्लोराइड की मात्रा 0 से 3 पीपीएम के बीच मिली है। यह उन दावों को पूरी तरह गलत साबित करता है जिनमें क्लोराइड की मात्रा कई 100 पीपीएम होने की बात कही गई थी। हालांकि, जांच के दौरान चार ऐसी जगहें मिलीं जहां क्लोराइड की मात्रा सामान्य से कुछ अधिक थी और कंपनियों ने इन जगहों पर तुरंत कार्रवाई करते हुए पेट्रोल की सप्लाई रोक दी। इसके बाद वहां तकनीकी जांच की गई और खामियों को दूर करने के बाद ही दोबारा सप्लाई शुरू करने की अनुमति दी गई।
पानी की मिलावट के दावों पर स्पष्टीकरण
पेट्रोल में नमी या पानी की मौजूदगी को लेकर भी कंपनियों ने स्थिति साफ की है। उन्होंने बताया कि देशभर के लगभग 90000 पेट्रोल पंपों पर जमीन के नीचे बने स्टोरेज टैंकों की सघन जांच की जा रही है। इन टैंकों में पानी की मौजूदगी का पता लगाने के लिए दिन में 8 से 12 बार तक टेस्टिंग की जा रही है। अब तक की जांच में किसी भी टैंक में पानी जाने या नमी मिलने का कोई सबूत नहीं मिला है। तेल कंपनियों ने यह भी जानकारी दी कि वे ईंधन की शुद्धता जांचने के लिए अत्याधुनिक मोबाइल फ्यूल टेस्टिंग लैब का उपयोग कर रही हैं। इसके अलावा, सैंपलों की जांच स्वतंत्र और मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं से भी कराई जा रही है ताकि किसी भी प्रकार के संदेह की गुंजाइश न रहे और कंपनियों ने उपभोक्ताओं को आश्वस्त किया है कि E20 पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित है।