जर्मनी में कड़े लेबर रिफॉर्म्स: पहले दिन से मेडिकल सर्टिफिकेट और अमीरों पर ज्यादा टैक्स

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जर्मनी में कड़े लेबर रिफॉर्म्स: पहले दिन से मेडिकल सर्टिफिकेट और अमीरों पर ज्यादा टैक्स
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जर्मन सरकार कार्यस्थल के नियमों और आर्थिक नीतियों में बड़े बदलाव लाने की एक व्यापक योजना पर सक्रियता से काम कर रही है। इन प्रस्तावित सुधारों के तहत, जर्मनी में काम करने वाले कर्मचारियों को अब बीमार होने पर छुट्टी लेने के लिए पहले ही दिन से मेडिकल सर्टिफिकेट दिखाना अनिवार्य होगा। यह बदलाव पिछले नियमों से काफी अलग है और इसका उद्देश्य श्रम कानूनों को अधिक प्रभावी बनाना और देश भर में उत्पादकता में सुधार करना है। इसके अतिरिक्त, सरकार नई नियुक्तियों के लिए 4 साल तक के फिक्स्ड-टर्म कॉन्ट्रैक्ट देने की संभावना पर भी विचार कर रही है, जिसे 2030 तक लागू रखा जा सकता है। साथ ही, अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए नौकरी से निकाले जाने की स्थिति में मुआवजे के साथ-साथ विशेष अरेंजमेंट की सुविधा देने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि उच्च वेतन वर्ग के लोगों के लिए एक व्यवस्थित ट्रांजिशन सुनिश्चित किया जा सके।

बीमारी की छुट्टी और कार्यस्थल दक्षता के लिए कड़े नियम

यदि आप जर्मनी में कार्यरत हैं और आपकी तबीयत अचानक खराब हो जाती है, तो केवल कॉल या मैसेज के माध्यम से सूचना देना अब पर्याप्त नहीं होगा। जर्मन सरकार कार्यस्थल के नियमों और छुट्टियों की प्रक्रिया में कड़े सुधार करने जा रही है। अब बीमार होने की सूचना देने के साथ-साथ अवकाश के लिए पहले दिन से ही मेडिकल सर्टिफिकेट प्रस्तुत करना होगा। जर्मन सरकार ने यह कड़ा फैसला काम से लंबे समय तक गैरहाजिरी के कारण होने वाले कॉम्पिटिटिव नुकसान यानी प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान से निपटने के लिए लिया है। सरकार का मानना है कि इस कदम से कार्यबल की निरंतरता और उत्पादकता बनी रहेगी, जिससे देश के समग्र आर्थिक उत्पादन को मजबूती मिलेगी।

अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए 34 सूत्रीय पैकेज

जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षा प्रदान करने और उसे फिर से मजबूत करने के लिए एक 34 सूत्रीय पैकेज पेश किया है। इस विस्तृत पैकेज में लेबर, टैक्स और पेंशन सुधारों को शामिल किया गया है। चांसलर मर्ज ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य अपने वेलफेयर स्टेट को बचाना है और टैक्स में कटौती करके कर्मचारियों और कंपनियों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को कम करना है। सत्तारूढ़ गठबंधन इन आर्थिक सुधारों पर पूरी तरह सहमत हो गया है, जिन्हें देश की मुश्किल में फंसी अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य साल के अंत तक संसद से इस 34 सूत्रीय पैकेज के मुख्य तत्वों को पारित कराना है, जो आर्थिक स्थिरता की दिशा में एक त्वरित कदम होगा।

टैक्स और पेंशन प्रणाली में बड़े बदलाव

एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रेडरिक मर्ज ने कहा है कि सरकार बिजनेस की फ्लेक्सिबिलिटी यानी लचीलापन बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। इस 34 सूत्रीय पैकेज में 10 अरब यूरो यानी 11 अरब 40 करोड़ डॉलर के इनकम टैक्स में कटौती का प्रस्ताव शामिल है। इस भारी कटौती की भरपाई के लिए सरकार ने उन लोगों पर ज्यादा टैक्स लगाने की योजना बनाई है जो सालाना 250000 यूरो से अधिक की कमाई करते हैं। यह बदलाव सुनिश्चित करता है कि सुधारों का वित्तीय भार सबसे अधिक कमाई करने वालों पर अधिक पड़े, जिससे मध्यम और निम्न आय वर्ग को व्यापक राहत मिल सके। इसके अलावा, पेंशन सिस्टम में भी बड़े बदलाव की तैयारी है, जिसके तहत रिटायरमेंट की उम्र को वर्तमान 67 साल से अधिक कर दिया जाएगा ताकि सामाजिक सुरक्षा ढांचे की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित हो सके।

आर्थिक पुनर्गठन के लिए राजनीतिक समर्थन

जर्मनी के वर्तमान वित्त मंत्री और वाइस चांसलर लार्स क्लिंगबेल ने इन नए फैसलों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि इन बदलावों से देश में सबसे ज्यादा कमाई करने वाले लोगों पर टैक्स का अधिक हिस्सा पड़ेगा, जिसे वह राष्ट्रीय सुधार के लिए एक उचित दृष्टिकोण मानते हैं। क्लिंगबेल के अनुसार, देश को आगे बढ़ाने और अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए यह कदम उठाना सही और आवश्यक है। सरकार का मानना है कि अमीरों पर अधिक कर और आम कर्मचारियों को राहत देने के इस संतुलन से भविष्य में एक अधिक लचीला और प्रतिस्पर्धी आर्थिक वातावरण तैयार होगा, जिससे जर्मनी एक प्रमुख वैश्विक आर्थिक शक्ति बना रहेगा।

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