घड़साना में किसानों का महापड़ाव: 22 से मंडियां बंद और 24 को चक्काजाम की चेतावनी

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घड़साना में किसानों का महापड़ाव: 22 से मंडियां बंद और 24 को चक्काजाम की चेतावनी
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श्रीगंगानगर जिले के अनूपगढ़ क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले घड़साना में सिंचाई पानी की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है और खेत बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में नई मंडी घड़साना में किसानों का महापड़ाव आज 9वें दिन भी पूरी मजबूती के साथ जारी रहा। किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी जायज मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे इस महापड़ाव स्थल से पीछे नहीं हटेंगे। आंदोलनकारी किसानों ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि इस संघर्ष को हल्के में लेने की भूल न की जाए, क्योंकि किसान अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।

आंदोलन का अगला चरण: मंडियां बंद और चक्काजाम

किसान नेताओं ने आंदोलन को और अधिक उग्र बनाने के लिए दो बड़े फैसलों की घोषणा की है। किसान नेता नरेंद्र मान के अनुसार, 22 सितंबर से अनूपगढ़ शाखा से जुड़ी सभी अनाज मंडियों को अनिश्चितकाल के लिए बंद रखा जाएगा। किसानों का मानना है कि आर्थिक गतिविधियों को रोककर ही सरकार को उनकी समस्याओं की गंभीरता का अहसास कराया जा सकता है। इसके साथ ही, किसानों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि 22 सितंबर के बंद के बाद भी सरकार की ओर से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो 24 सितंबर को पूरे क्षेत्र में सड़कों पर चक्काजाम किया जाएगा। इस चक्काजाम के जरिए किसान अपनी आवाज को शासन और प्रशासन के उच्च स्तर तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

21 सितंबर की रेगुलेशन समीक्षा बैठक पर टिकी उम्मीदें

किसानों की नजरें अब 21 सितंबर को हनुमानगढ़ में होने वाली महत्वपूर्ण रेगुलेशन समीक्षा बैठक पर टिकी हैं। इस बैठक में सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर और अन्य संबंधित अधिकारी नहरों के पानी के रेगुलेशन की समीक्षा करेंगे। उम्मीद जताई जा रही है कि सोमवार को इस बैठक के बाद नया रेगुलेशन जारी किया जा सकता है। किसानों की प्रमुख मांग है कि आगामी रबी सीजन को ध्यान में रखते हुए कम से कम 6 माह का सिंचाई पानी रिजर्व रखा जाए। इसके अलावा, उनकी एक और महत्वपूर्ण मांग यह है कि सिंचाई के लिए निर्धारित 4 समूहों में से कम से कम 2 समूहों को नियमित रूप से पानी उपलब्ध कराया जाए। किसानों का कहना है कि फसलों की बुवाई और सुरक्षा के लिए पानी का पर्याप्त और समयबद्ध रेगुलेशन अत्यंत आवश्यक है।

9 दिनों से जारी संघर्ष और प्रशासन की बेरुखी

खेत बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले पिछले 9 दिनों से चल रहे इस महापड़ाव में किसानों ने एकजुटता का परिचय दिया है। आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ घड़साना पहुंचे और उपखंड कार्यालय का घेराव कर प्रशासनिक कामकाज ठप करने की कोशिश की। किसानों ने आरोप लगाया कि शुक्रवार को प्रशासन की ओर से वार्ता के लिए कोई पहल नहीं की गई और न ही कोई न्योता दिया गया। किसानों ने इसे प्रशासन की संवेदनहीनता करार देते हुए भारी नाराजगी व्यक्त की है। नरेंद्र मान ने कहा कि जब तक सिंचाई पानी और रेगुलेशन से जुड़ी मांगों पर कोई ठोस और लिखित निर्णय नहीं होता, तब तक यह महापड़ाव इसी तरह जारी रहेगा।

जिला कलेक्टर का बयान और तकनीकी आंकड़े

इस पूरे मामले पर जिला कलेक्टर डॉ अमित यादव ने प्रशासनिक पक्ष रखते हुए बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत घड़साना क्षेत्र में निर्धारित 100 में से 91 स्थानों पर मूंग की क्रॉप कटिंग का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। शेष बचे 9 स्थानों पर यह कार्य अगले 2 से 3 दिनों में संपन्न हो जाएगा। उन्होंने बताया कि पटवारियों को प्रारंभिक आकलन और विशेष गिरदावरी के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं और जल स्तर की जानकारी देते हुए कलेक्टर ने बताया कि वर्तमान में पौंग और रणजीत सागर बांधों का जलस्तर लगभग 1372 फीट है। 21 सितंबर को बीबीएमबी की उच्चस्तरीय बैठक में जल शेयर और आगामी रेगुलेशन पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि किसानों के साथ कुछ बिंदुओं पर सहमति बनी है और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को हटाने की उनकी मांग से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।

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