विज्ञापन

परमाणु हथियारों पर दुनिया ने खर्च किए 119 अरब डॉलर भारत और चीन ने बढ़ाया अपना जखीरा

परमाणु हथियारों पर दुनिया ने खर्च किए 119 अरब डॉलर भारत और चीन ने बढ़ाया अपना जखीरा
विज्ञापन

दुनिया में परमाणु हथियारों को लेकर एक विरोधाभासी स्थिति बनी हुई है। एक तरफ जहां विश्व के 99 देशों ने परमाणु हथियारों के निषेध की संधि (टीपीएनडब्ल्यू) पर हस्ताक्षर करके शांति का संदेश दिया है, वहीं दूसरी तरफ दुनिया के 9 शक्तिशाली देशों ने परमाणु हथियारों पर 119 अरब डॉलर की भारी-भरकम राशि खर्च कर दी है। इंटरनेशनल कैंपेन टू एबॉलिश न्यूक्लियर वेपन्स (आईकैन) की ताजा रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत, चीन, पाकिस्तान और अमेरिका जैसे देश अपने परमाणु शस्त्रागार को आधुनिक बनाने और उनके रखरखाव पर पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं। यह रिपोर्ट दर्शाती है कि वैश्विक स्तर पर परमाणु निरस्त्रीकरण की कोशिशों के बावजूद हथियारों की होड़ कम नहीं हो रही है।

परमाणु बजट में भारी बढ़ोतरी और नए हथियारों का विकास

आईकैन की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में दुनिया के केवल नौ देशों के पास परमाणु हथियार मौजूद हैं। वर्ष 2025 के दौरान इन देशों ने अपने परमाणु हथियारों के रखरखाव, देखरेख और आधुनिकीकरण पर कुल 119 अरब डॉलर खर्च किए। इस खर्च का एक बड़ा हिस्सा नए और अधिक उन्नत परमाणु हथियारों को विकसित करने में भी इस्तेमाल किया गया। पिछले एक साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो चीन ने अपने परमाणु शस्त्रागार में 20 नए हथियार जोड़े हैं, जबकि भारत ने 10 नए परमाणु हथियार अपने बेड़े में शामिल किए हैं। यह स्पष्ट करता है कि देश न केवल पुराने हथियारों का रखरखाव कर रहे हैं, बल्कि अपनी मारक क्षमता को भी लगातार बढ़ा रहे हैं।

अमेरिका और ब्रिटेन के खर्च में रिकॉर्ड वृद्धि

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने परमाणु हथियारों पर होने वाले खर्च में सबसे बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की है और अमेरिका ने अपने परमाणु बजट में 22 प्रतिशत का इजाफा किया है और साल 2025 में कुल 69 अरब 20 करोड़ डॉलर खर्च किए हैं। ब्रिटेन भी इस दौड़ में पीछे नहीं है, उसने अपने खर्च में 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है और कुल 12 अरब 60 करोड़ डॉलर परमाणु हथियारों पर व्यय किए हैं। चीन ने अपने बजट में 7 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए 13 अरब 50 करोड़ डॉलर खर्च किए। वहीं रूस ने अपने परमाणु खर्च में 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है, जिसका कुल आंकड़ा 9 अरब डॉलर रहा है। ये आंकड़े बताते हैं कि विकसित देश अपनी सैन्य शक्ति को परमाणु स्तर पर और अधिक सुदृढ़ करने में जुटे हैं।

दक्षिण एशिया में भारत और पाकिस्तान की स्थिति

दक्षिण एशियाई क्षेत्र में भी परमाणु हथियारों पर खर्च तेजी से बढ़ा है। भारत ने अपने परमाणु बजट में 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है और कुल 2 अरब 80 करोड़ डॉलर खर्च किए हैं। वहीं पाकिस्तान ने अपने खर्च में 18 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी करते हुए 1 अरब 50 करोड़ डॉलर इस मद में खर्च किए हैं। अन्य देशों की बात करें तो फ्रांस ने 8 प्रतिशत और इजराइल ने 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की है। उत्तर कोरिया जैसे देश ने भी परमाणु हथियारों के रखरखाव और देखरेख पर 656 मिलियन डॉलर खर्च किए हैं। यह खर्च उन देशों की तुलना में बहुत अधिक है जो परमाणु मुक्त दुनिया की वकालत कर रहे हैं और टीपीएनडब्ल्यू संधि का समर्थन कर रहे हैं।

सिपरी की रिपोर्ट: किसके पास कितने हथियार

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (सिपरी) के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 तक दुनिया भर में कुल 12187 परमाणु हथियार मौजूद थे। इनमें से लगभग 9745 हथियार सैन्य भंडारों में संभावित उपयोग के लिए रखे गए थे, जबकि 4012 हथियारों को मिसाइलों और विमानों के साथ तैनात किया गया था। रूस के पास दुनिया का सबसे बड़ा जखीरा है जिसमें 5500 परमाणु हथियार शामिल हैं। इसके बाद अमेरिका के पास 5300 परमाणु हथियार हैं। चीन के पास हथियारों की संख्या 620 होने का अनुमान है। भारत के पास वर्तमान में 190 और पाकिस्तान के पास 170 परमाणु हथियार हैं। ये आंकड़े वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य की गंभीरता को दर्शाते हैं।

विज्ञापन