वर्ष 2026 की पहली तिमाही में वैश्विक स्वर्ण बाजार में बड़ी हलचल देखी गई है। जनवरी में $5,602 प्रति औंस के ऐतिहासिक उच्चतम स्तर को छूने के बाद, सोने की कीमतों में लगभग 20% की गिरावट आई है। बाजार आंकड़ों के अनुसार, मार्च के अंत तक कीमतें $4,495 के स्तर पर पहुंच गईं, जिसे तकनीकी रूप से 'बेयर मार्केट' की शुरुआत माना जा रहा है। यह गिरावट अक्टूबर 2022 से शुरू हुई उस लंबी तेजी के बाद आई है, जिसमें सोने ने करीब 275% का रिटर्न दिया था। उस समय सोना $1,500 के आसपास कारोबार कर रहा था।
ऐतिहासिक गिरावटों का तुलनात्मक विवरण
स्वर्ण बाजार के इतिहास पर नजर डालें तो बड़ी तेजी के बाद सुधार की प्रक्रिया सामान्य रही है। 1971 से 1974 के बीच सोने की कीमतों में 353% की वृद्धि हुई थी, लेकिन इसके बाद 1974 से 1976 के बीच इसमें 43% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। उस दौर में मुद्रास्फीति में कमी और बढ़ती ब्याज दरों ने सोने की चमक को कम कर दिया था। इसी तरह, 1976 से 1980 के बीच सोने में 541% की भारी तेजी आई, जिसके बाद 1980 से 1982 के बीच कीमतों में 52% की कमी आई थी।
2011 से 2015 के बीच का बाजार चक्र
आधुनिक दौर में भी सोने ने इसी तरह के उतार-चढ़ाव दिखाए हैं। 1999 से 2011 के बीच सोने की कीमतों में 612% का उछाल आया था। हालांकि, वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार और डॉलर की मजबूती के कारण 2011 से 2015 के बीच कीमतों में 42% की गिरावट देखी गई। विशेषज्ञों के अनुसार, जब भी वैश्विक आर्थिक स्थिरता बढ़ती है और वैकल्पिक निवेश माध्यम बेहतर रिटर्न देने लगते हैं, तब सोने की मांग में कमी आने लगती है।
ब्याज दरों और डॉलर की मजबूती का प्रभाव
वर्तमान में सोने की कीमतों पर दबाव का मुख्य कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां और डॉलर इंडेक्स की मजबूती है। जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो सोना रखने की अवसर लागत (Opportunity Cost) बढ़ जाती है क्योंकि सोना कोई नियमित आय या ब्याज नहीं देता है और डॉलर के मजबूत होने से अन्य मुद्राओं का उपयोग करने वाले खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी वैश्विक मांग प्रभावित होती है।
भू-राजनीतिक तनाव और मुद्रास्फीति का दबाव
ईरान से जुड़े हालिया संघर्षों और मध्य पूर्व में अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है। तेल की बढ़ती कीमतों ने वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति के दबाव को बढ़ा दिया है, जिससे केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, जब तक ब्याज दरें उच्च स्तर पर बनी रहेंगी, तब तक सोने की कीमतों में सुधार की संभावना सीमित रह सकती है।
केंद्रीय बैंकों की भूमिका और तकनीकी स्तर
गिरावट के बावजूद, विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की निरंतर खरीद एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। तकनीकी चार्ट के अनुसार, $3,600 का स्तर एक महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है। यदि गिरावट जारी रहती है, तो ऐतिहासिक पैटर्न के आधार पर कीमतें $2,800 से $3,000 के दायरे में भी जा सकती हैं। हालांकि, लंबी अवधि में भू-राजनीतिक अनिश्चितता और डॉलर की संभावित कमजोरी सोने को सहारा दे सकती है।