दिल्ली में प्रदर्शन के बीच सरकार की पहल, जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने सोनम वांगचुक से की मुलाकात

Add as Preferred Source on Google News
विज्ञापन
दिल्ली में प्रदर्शन के बीच सरकार की पहल, जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने सोनम वांगचुक से की मुलाकात
विज्ञापन

दिल्ली में जारी भारी विरोध प्रदर्शनों और गतिरोध के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ी पहल की है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात की। इस मुलाकात को दिल्ली में पिछले कई दिनों से जारी तनाव को कम करने की दिशा में सरकार का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मंत्रियों ने अस्पताल में सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की जानकारी ली और उनके साथ मौजूदा स्थितियों पर चर्चा की।

सोनम वांगचुक का अनशन और स्वास्थ्य स्थिति

सोनम वांगचुक नीट (NEET) सहित कई अन्य महत्वपूर्ण परीक्षाओं में हुए पेपर लीक के मुद्दे को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए उन्हें पहले सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद मंगलवार को उन्हें सफदरजंग अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और बेहतर इलाज के लिए गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया गया और सोनम वांगचुक का अनशन छात्रों के हितों और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर है, जिसने अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है।

जंतर-मंतर पर 32वें दिन भी जारी रहा प्रदर्शन

एक तरफ जहां सरकार सोनम वांगचुक से संपर्क साध रही है, वहीं दूसरी ओर दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का प्रदर्शन लगातार जारी है। बुधवार को इस विरोध प्रदर्शन का 32वां दिन था। छात्र अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं और लगातार सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अब वे सरकार से बातचीत करने के लिए कहीं नहीं जाएंगे। दीपके का कहना है कि अगर सरकार वास्तव में समाधान चाहती है, तो उसे खुद जंतर-मंतर पर आकर छात्रों से बात करनी होगी।

सड़क से संसद तक गरमाई राजनीति

नीट पेपर लीक के मुद्दे ने देश की राजनीति को सड़क से लेकर संसद तक गरमा दिया है। विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। विपक्ष के कई बड़े नेता जंतर-मंतर पहुंचकर छात्रों के प्रति अपना समर्थन जता रहे हैं। बुधवार देर रात शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे भी जंतर-मंतर पहुंचे और सरकार पर तीखा हमला बोला। उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि यह सरकार छात्रों का भला नहीं चाहती और उनकी समस्याओं के प्रति संवेदनशील नहीं है।

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भी इस आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया है। अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार छात्रों की सभी जायज मांगें नहीं मान लेती, तब तक उनका प्रदर्शन और विरोध जारी रहेगा और विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सरकार का रवैया तानाशाही पूर्ण है और वह युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। जंतर-मंतर पर विपक्षी नेताओं के जमावड़े ने इस छात्र आंदोलन को एक नई राजनीतिक धार दे दी है।

सरकार का पक्ष और कार्रवाई का दावा

विपक्ष के हमलों और बढ़ते प्रदर्शनों के बीच सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया है। सरकार का कहना है कि वह संसद के भीतर इस विषय पर किसी भी समय चर्चा के लिए तैयार है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, पेपर लीक मामले में शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जा रही है और जांच एजेंसियां मुस्तैदी से काम कर रही हैं। सरकार ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्षी दल केवल राजनीति कर रहे हैं और छात्रों को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। सरकार के अनुसार, वे समाधान की दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन विपक्ष जानबूझकर हंगामा कर रहा है। केंद्रीय मंत्रियों की सोनम वांगचुक से यह मुलाकात इसी समाधान प्रक्रिया का हिस्सा मानी जा रही है ताकि आंदोलनकारियों के साथ संवाद का रास्ता खुल सके।

विज्ञापन