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आईडीएफसी फर्स्ट बैंक: हरियाणा सरकार के खातों में धोखाधड़ी, चंडीगढ़ शाखा में मामला

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक: हरियाणा सरकार के खातों में धोखाधड़ी, चंडीगढ़ शाखा में मामला
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आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने अपनी चंडीगढ़ शाखा में हरियाणा सरकार की कुछ संस्थाओं से जुड़े खातों में वित्तीय विसंगतियों की पुष्टि की है। बैंक के अनुसार, यह मामला तब प्रकाश में आया जब संबंधित विभाग ने अपने खाते बंद करने और फंड को दूसरे बैंक में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया था। इस प्रक्रिया के दौरान, बैंक रिकॉर्ड में मौजूद शेष राशि और सरकारी संस्थाओं द्वारा बताई गई राशि के बीच महत्वपूर्ण अंतर पाया गया। बैंक प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि यह घटना केवल एक विशिष्ट शाखा और कुछ चुनिंदा खातों तक सीमित है।

खाता बंद करने की प्रक्रिया से हुआ खुलासा

अधिकारियों के अनुसार, हरियाणा सरकार के एक विशिष्ट विभाग ने बैंक को अपना खाता बंद करने और उसमें जमा राशि को किसी अन्य बैंकिंग संस्थान में ट्रांसफर करने का औपचारिक अनुरोध भेजा था। बैंक के आंतरिक मिलान (reconciliation) प्रक्रिया के दौरान, अधिकारियों ने पाया कि खाते में उपलब्ध वास्तविक बैलेंस और विभाग के दावों में विसंगति है। इसके बाद, 18 फरवरी, 2026 से हरियाणा सरकार की कुछ अन्य संस्थाओं ने भी अपने खातों के संबंध में बैंक से संपर्क किया। इन मामलों में भी बैंक के रिकॉर्ड और संस्थाओं के पास मौजूद डेटा के बीच अंतर देखा गया। बैंक ने तुरंत इन खातों की गहन जांच शुरू कर दी है।

आंतरिक मिलीभगत और सुरक्षा प्रोटोकॉल

बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) वी और वैद्यनाथन ने इस घटना पर आधिकारिक बयान जारी किया है। उनके अनुसार, यह मामला बैंक की किसी संरचनात्मक कमजोरी या सिस्टम-स्तर की विफलता का परिणाम नहीं है। उन्होंने इसे 'आंतरिक मिलीभगत' (internal collusion) का मामला बताया है। सीईओ ने स्पष्ट किया कि बैंक में 'मेकर, चेकर और ऑथराइजर' जैसे कड़े नियंत्रण तंत्र मौजूद हैं, जो किसी भी लेनदेन की तीन स्तरों पर पुष्टि करते हैं। बैंक पिछले 10 वर्षों से परिचालन में है और इसकी 1,000 से अधिक शाखाएं हैं, लेकिन इस तरह की घटना पहले कभी नहीं देखी गई। बैंक अब इस बात की जांच कर रहा है कि इन सुरक्षा प्रोटोकॉल को कैसे दरकिनार किया गया।

वित्तीय प्रभाव और ब्रोकरेज फर्मों के आंकड़े

वैश्विक ब्रोकरेज फर्मों ने इस घटना के वित्तीय परिणामों पर अपनी रिपोर्ट जारी की है। यूबीएस (UBS) के आंकड़ों के अनुसार, यह धोखाधड़ी बैंक के वित्त वर्ष 2026 के अनुमानित शुद्ध मुनाफे का लगभग 22% हो सकती है। वहीं, मॉर्गन स्टेनली ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि इस घटना का प्रभाव बैंक के कर-पूर्व लाभ (pre-tax profit) के 20% के बराबर हो सकता है। इन्वेस्टेक ने बैंक के शेयरों पर अपनी रेटिंग को लेकर जानकारी दी है कि उन्होंने लक्ष्य मूल्य को ₹105 से घटाकर ₹92 कर दिया है। ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि फॉरेंसिक ऑडिट की रिपोर्ट आने तक स्थिति स्पष्ट नहीं होगी।

रिकवरी के प्रयास और फॉरेंसिक ऑडिट

बैंक ने फंड की रिकवरी के लिए सक्रिय कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। उन बैंकों को 'रिकॉल नोटिस' जारी किए गए हैं, जहां संदिग्ध रूप से धोखाधड़ी का पैसा ट्रांसफर किया गया था। बैंक प्रशासन को उम्मीद है कि इन खातों को फ्रीज करने से कुछ राशि वापस प्राप्त की जा सकती है। इसके साथ ही, मामले की गहराई से जांच के लिए फॉरेंसिक ऑडिट का सहारा लिया जा रहा है। फॉरेंसिक ऑडिट एक विशेष प्रक्रिया है जिसमें वित्तीय हेरफेर के सबूत जुटाने के लिए डिजिटल डेटा, ईमेल और लेनदेन की कड़ियों की सूक्ष्म जांच की जाती है। यह जांच सामान्य ऑडिट की तुलना में अधिक विस्तृत होती है और इसके निष्कर्षों को कानूनी कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में उपयोग किया जा सकता है।

रिटेल ग्राहकों की स्थिति और सुरक्षा उपाय

बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह धोखाधड़ी केवल चंडीगढ़ शाखा के विशिष्ट सरकारी खातों तक सीमित है और इसका बैंक के अन्य रिटेल ग्राहकों या सामान्य जमाकर्ताओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। बैंक के अनुसार, आम ग्राहकों का पैसा पूरी तरह सुरक्षित है। हालांकि, बैंक ने ग्राहकों को सलाह दी है कि वे नियमित रूप से अपने मोबाइल बैंकिंग ऐप और एसएमएस अलर्ट की निगरानी करते रहें। बैंक ने आश्वासन दिया है कि वह इस मामले में पारदर्शिता बनाए रखेगा और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान में, बैंक का ध्यान रिकवरी और दोषियों की पहचान करने पर केंद्रित है।

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