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यूपी शिक्षा मित्र मानदेय वृद्धि: योगी सरकार ने ₹18,000 तक बढ़ाई सैलरी, आदेश जारी

यूपी शिक्षा मित्र मानदेय वृद्धि: योगी सरकार ने ₹18,000 तक बढ़ाई सैलरी, आदेश जारी
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उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के शिक्षा विभाग में कार्यरत लाखों शिक्षा मित्रों और अंशकालिक अनुदेशकों के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए उनके मानदेय में महत्वपूर्ण वृद्धि की घोषणा की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी है, जिसके बाद बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है। बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने इस निर्णय की पुष्टि करते हुए बताया कि सरकार का यह कदम शिक्षा कर्मियों के जीवन स्तर में सुधार लाने और उन्हें आर्थिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

मानदेय में वृद्धि का विस्तृत विवरण और नई दरें

सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, शिक्षा मित्रों के मासिक मानदेय में ₹8,000 की सीधी वृद्धि की गई है। अब तक शिक्षा मित्रों को ₹10,000 प्रति माह का मानदेय मिल रहा था, जिसे बढ़ाकर अब ₹18,000 प्रति माह कर दिया गया है। इसी प्रकार, उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में भी ₹8,000 की बढ़ोतरी की गई है। अनुदेशकों का मानदेय ₹9,000 से बढ़ाकर अब ₹17,000 प्रति माह निश्चित किया गया है। मंत्री संदीप सिंह ने स्पष्ट किया कि यह संशोधित मानदेय 1 अप्रैल, 2026 से लागू माना जाएगा और कर्मियों को इसका वास्तविक वित्तीय लाभ मई 2026 में होने वाले भुगतान के साथ प्राप्त होगा।

लाभार्थियों की संख्या और राज्य पर वित्तीय भार

इस निर्णय से उत्तर प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत एक बड़ी आबादी को सीधा लाभ मिलेगा। 43 लाख शिक्षा मित्र कार्यरत हैं, जबकि अंशकालिक अनुदेशकों की संख्या 24,717 है। इन दोनों श्रेणियों को मिलाकर कुल 1,67,717 परिवारों को इस वेतन वृद्धि का लाभ मिलेगा। मानदेय में की गई इस भारी बढ़ोतरी के कारण उत्तर प्रदेश सरकार के खजाने पर प्रतिवर्ष ₹1,475 करोड़ से अधिक का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा। सरकार ने इस अतिरिक्त व्यय के लिए बजट में आवश्यक प्रावधानों को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

कैबिनेट की मंजूरी और कार्यान्वयन की प्रक्रिया

मानदेय बढ़ाने का यह प्रस्ताव पिछले काफी समय से विचाराधीन था, जिस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले ही सैद्धांतिक सहमति दे दी थी। हाल ही में संपन्न हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप से रखा गया और सर्वसम्मति से पारित किया गया और मंत्री संदीप सिंह ने बताया कि सरकार का लक्ष्य शिक्षा व्यवस्था को जमीनी स्तर पर मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मित्र और अनुदेशक ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए उनके हितों का ध्यान रखना सरकार की प्राथमिकता है और कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब विभाग ने जिलों को क्रियान्वयन के संबंध में दिशा-निर्देश भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

ऐतिहासिक संदर्भ और 2017 के बाद का बदलाव

उत्तर प्रदेश में शिक्षा मित्रों के मानदेय में इससे पहले बड़ा बदलाव वर्ष 2017 में देखा गया था। उस समय राज्य सरकार ने शिक्षा मित्रों का मानदेय ₹3,500 से बढ़ाकर ₹10,000 किया था। लगभग नौ वर्षों के अंतराल के बाद अब एक बार फिर उनके मानदेय में ₹8,000 की बड़ी वृद्धि की गई है। अनुदेशकों के मामले में भी यह अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि मानी जा रही है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, समय-समय पर बढ़ती महंगाई और जीवन निर्वाह लागत को देखते हुए मानदेय में संशोधन की मांग की जा रही थी, जिसे सरकार ने अब स्वीकार कर लिया है।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और भविष्य का रोडमैप

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस निर्णय के संदर्भ में कहा है कि सरकार का विजन केवल विद्यालयों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में आमूलचूल परिवर्तन लाना है। सरकार का ध्यान तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान और कौशल आधारित शिक्षा पर केंद्रित है। शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि को इसी व्यापक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि जब शिक्षा कर्मी आर्थिक रूप से सुरक्षित महसूस करेंगे, तो वे शिक्षण कार्य में अधिक समर्पण के साथ योगदान दे सकेंगे। उत्तर प्रदेश को ज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लक्ष्य के तहत प्राथमिक शिक्षा के ढांचे को आधुनिक और समावेशी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

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