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बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के ठिकानों पर आयकर विभाग की छापेमारी

बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के ठिकानों पर आयकर विभाग की छापेमारी
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह के लखनऊ स्थित आवास पर बुधवार सुबह आयकर विभाग की टीम ने छापेमारी की। प्राप्त जानकारी के अनुसार आयकर विभाग की तीन अलग-अलग टीमें विधायक के गोमतीनगर स्थित आवास और कार्यालय पर पहुंचीं। इस कार्रवाई में लगभग 50 अधिकारियों का दस्ता शामिल है जो सुबह से ही विभिन्न दस्तावेजों की सघन जांच कर रहा है। यह छापेमारी ऐसे समय में हुई है जब बलिया की रसड़ा सीट से विधायक उमाशंकर सिंह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं और अधिकारियों ने परिसर को चारों तरफ से घेर लिया है और किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

लखनऊ आवास पर सघन तलाशी अभियान

आयकर विभाग के अधिकारियों ने लखनऊ के पॉश इलाके गोमतीनगर में स्थित उमाशंकर सिंह के आवास और उनके आधिकारिक कार्यालय पर एक साथ दस्तक दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह तड़के ही विभाग की गाड़ियां विधायक के आवास पर पहुंच गई थीं। टीम के साथ सुरक्षा बल के जवान भी तैनात हैं ताकि जांच प्रक्रिया में कोई बाधा न आए। अधिकारियों ने विधायक के आवास के अंदर मौजूद सभी फाइलों इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और कंप्यूटरों को अपने कब्जे में ले लिया है। सूत्रों के अनुसार विभाग को कुछ संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की सूचना मिली थी जिसके आधार पर यह कार्रवाई की जा रही है। जांच टीम बैंक खातों के विवरण निवेश से जुड़े कागजात और अचल संपत्तियों के दस्तावेजों का मिलान कर रही है।

विधायक की स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सा प्रतिबंध

बसपा विधायक उमाशंकर सिंह वर्तमान में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं और लखनऊ स्थित अपने आवास पर ही आइसोलेशन में रहकर स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। बताया जा रहा है कि उनके अब तक दो बड़े ऑपरेशन हो चुके हैं और वे निरंतर चिकित्सकीय देखरेख में हैं। छापेमारी के दौरान आयकर विभाग की टीम ने सुरक्षा कारणों और जांच की गोपनीयता बनाए रखने के लिए घर के अंदर डॉक्टरों और नर्सों के आने-जाने पर भी अस्थायी रोक लगा दी है। हालांकि विधायक के परिवार ने उनके स्वास्थ्य का हवाला देते हुए मानवीय आधार पर चिकित्सा सहायता की अनुमति मांगी है। विभाग के अधिकारी विधायक के स्वास्थ्य की स्थिति को ध्यान में रखते हुए अपनी कार्रवाई को आगे बढ़ा रहे हैं लेकिन जांच के दायरे में कोई ढील नहीं दी गई है।

सोनभद्र में खनन व्यापारियों पर समानांतर कार्रवाई

लखनऊ के साथ-साथ आयकर विभाग ने उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में भी बड़े पैमाने पर छापेमारी की है। सोनभद्र में विभाग की टीम लगभग 25 गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंची जिसमें 60 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं। यहां पर विभाग ने लगभग आधा दर्जन ऐसे व्यापारियों के ठिकानों पर छापा मारा है जो मुख्य रूप से खनन व्यवसाय से जुड़े हुए हैं और इन व्यापारियों का संबंध विधायक उमाशंकर सिंह के व्यावसायिक हितों से होने की संभावना जताई जा रही है। सोनभद्र में हुई इस अचानक कार्रवाई से स्थानीय व्यापारिक जगत में हड़कंप मच गया है। यहां भी टीम ने डिजिटल साक्ष्य और बही-खातों को जब्त किया है ताकि आय और व्यय के बीच के अंतर का पता लगाया जा सके।

वित्तीय जांच और दस्तावेजों का सत्यापन

आयकर विभाग की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य विधायक और उनसे जुड़े व्यवसायियों की अघोषित आय का पता लगाना है। अधिकारियों के अनुसार पिछले कुछ समय से विधायक के वित्तीय पोर्टफोलियो में विसंगतियों की शिकायतें मिल रही थीं। टीम विशेष रूप से उन ठेकों और परियोजनाओं की जांच कर रही है जिनमें विधायक या उनके करीबियों की भागीदारी रही है। जब्त किए गए दस्तावेजों में कई बेनामी संपत्तियों और संदिग्ध बैंक ट्रांजेक्शन के संकेत मिलने की बात कही जा रही है। हालांकि आयकर विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है कि इस छापेमारी में अब तक कितनी नकदी या आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई है और जांच प्रक्रिया अभी भी जारी है और अधिकारियों का कहना है कि सभी दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

विधायक उमाशंकर सिंह की राजनीतिक पृष्ठभूमि

उमाशंकर सिंह उत्तर प्रदेश विधानसभा में बहुजन समाज पार्टी के इकलौते प्रतिनिधि हैं और वे बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं। बसपा के कद्दावर नेताओं में शुमार उमाशंकर सिंह अपनी बेबाक शैली और क्षेत्र में अपनी पकड़ के लिए जाने जाते हैं। 2022 के विधानसभा चुनावों में जब बसपा का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा था तब भी उमाशंकर सिंह अपनी सीट बचाने में सफल रहे थे। वे सदन में बसपा की आवाज के रूप में सक्रिय रहते हैं। राजनीतिक हलकों में इस छापेमारी को लेकर विभिन्न चर्चाएं व्याप्त हैं लेकिन विभाग ने इसे विशुद्ध रूप से एक प्रशासनिक और वित्तीय जांच करार दिया है। विधायक के समर्थकों का कहना है कि वे जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।

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