उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले में स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) परिचालन के लिए पूरी तरह तैयार है। करीब 25 साल पहले प्रस्तावित यह महत्वाकांक्षी परियोजना अब धरातल पर उतर चुकी है। आधिकारिक घोषणा के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 28 मार्च को इस एयरपोर्ट का भव्य उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित केंद्र और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे। पहले चरण में यह एयरपोर्ट 1334 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किया गया है, जिसे भविष्य में 5100 हेक्टेयर तक विस्तारित करने की योजना है।
आधुनिक इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम और रनवे क्षमता
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी विशेषता इसका आधुनिक इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) है। उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान घने कोहरे के कारण उड़ानों का प्रभावित होना एक बड़ी चुनौती रही है। अधिकारियों के अनुसार, यहां स्थापित ILS तकनीक की मदद से 50 मीटर जैसी अत्यंत कम दृश्यता (Visibility) में भी विमानों की सुरक्षित लैंडिंग और टेक-ऑफ संभव हो सकेगा। एयरपोर्ट का पहला रनवे 3900 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा बनाया गया है, जो दुनिया के सबसे बड़े और भारी वाणिज्यिक विमानों को संभालने में सक्षम है। भविष्य में यहां कुल 6 रनवे बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जो इसे देश का सबसे बड़ा विमानन केंद्र बना देगा।
प्रमुख एयरलाइंस और गंतव्य शहरों का विवरण
उद्घाटन के बाद शुरुआती चरण में इंडिगो, आकासा एयर और एयर इंडिया एक्सप्रेस जैसी प्रमुख विमानन कंपनियां यहां से अपना परिचालन शुरू करेंगी। पहले चरण में देश के 11 प्रमुख शहरों के लिए सीधी हवाई सेवा उपलब्ध होगी। इनमें वाराणसी, लखनऊ, अहमदाबाद, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, जयपुर, चेन्नई, पटना, कानपुर और श्रीनगर शामिल हैं। शुरुआती परिचालन के दौरान प्रतिदिन लगभग 150 उड़ानों के आवागमन की उम्मीद है। इस एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर यात्री दबाव में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है।
कार्गो हब और लॉजिस्टिक बुनियादी ढांचा
जेवर एयरपोर्ट को केवल यात्री परिवहन तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे एक वैश्विक कार्गो और लॉजिस्टिक हब के रूप में डिजाइन किया गया है। 5 मिलियन टन कार्गो संभालने की प्रारंभिक क्षमता विकसित की गई है। इसके अतिरिक्त, विमानों के रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (MRO) के लिए विशेष सुविधाएं भी स्थापित की गई हैं। यह बुनियादी ढांचा उत्तर प्रदेश को एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायक होगा, जिससे निर्यात और स्थानीय उद्योगों को गति मिलेगी।
सुरक्षा व्यवस्था और परिचालन मानक
एयरपोर्ट की सुरक्षा का उत्तरदायित्व केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को सौंपा गया है। सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने के लिए पहले चरण में 1047 जवानों की तैनाती की जाएगी। इसके अलावा, आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए यहां एयरक्राफ्ट रेस्क्यू एंड फायरफाइटिंग (ARFF) श्रेणी की उच्चतम सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। सुरक्षा और परिचालन के मामले में यह एयरपोर्ट अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के कड़े मानकों का पालन करता है।
कनेक्टिविटी और पर्यावरण अनुकूल मॉडल
भौगोलिक दृष्टि से यह एयरपोर्ट दिल्ली से 72 किमी, नोएडा से 52 किमी और आगरा से 130 किमी की दूरी पर स्थित है। यमुना एक्सप्रेसवे के माध्यम से इसे सड़क मार्ग से जोड़ा गया है, जबकि भविष्य में इसे मेट्रो और रैपिड रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजना पर काम चल रहा है। इसे एक 'ग्रीन एयरपोर्ट' के रूप में विकसित किया गया है, जहां सौर ऊर्जा का व्यापक उपयोग, वर्षा जल संचयन और शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्यों को प्राथमिकता दी गई है। एयरपोर्ट परिसर में बड़े स्तर पर हरित क्षेत्र विकसित किया गया है ताकि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बना रहे।