भारत और बेल्जियम के बीच द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाते हुए दोनों देशों ने कई रणनीतिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौते किए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने गुरुवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक के बाद कई समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए, जिनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच साझेदारी को फिर से परिभाषित करना है। इन चर्चाओं में व्यापार, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत तकनीक जैसे विषयों को शामिल किया गया, जो नई दिल्ली और ब्रसेल्स के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ते हैं।
रणनीतिक रक्षा सहयोग और जोरावर टैंक परियोजना
द्विपक्षीय वार्ता के सबसे प्रमुख आकर्षणों में से एक रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर ध्यान केंद्रित करना था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष रूप से जोरावर टैंक परियोजना का उल्लेख किया और इसे भारत और बेल्जियम के बीच बढ़ते संबंधों का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देश इस परियोजना पर मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे दोनों देशों की रक्षा क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। जोरावर टैंक परियोजना विदेशी तकनीक और घरेलू विनिर्माण क्षमताओं के बीच एक बेहतर तालमेल का प्रतिनिधित्व करती है, जिसे भारत अपने रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करने के लिए सक्रिय रूप से अपना रहा है। पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि रक्षा और सुरक्षा सहयोग भारत-बेल्जियम संबंधों का एक प्राथमिक स्तंभ बना हुआ है और आने वाले वर्षों में इस सहयोग के दायरे को और बढ़ाने की योजना है।
आर्थिक विकास और वैश्विक विश्वास
साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की आर्थिक प्रगति के बारे में जानकारी साझा की और बताया कि पिछली तिमाही में देश की विकास दर 7 दशमलव 8 प्रतिशत रही। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत की तीव्र आर्थिक प्रगति दुनिया के लिए भरोसे का एक स्रोत है और वैश्विक समुदाय के लिए नए अवसर प्रदान करती है। इस आर्थिक स्थिरता और विकास को अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के लिए प्रमुख चालक के रूप में देखा जा रहा है, जिससे भारत रणनीतिक निवेश और तकनीकी सहयोग के लिए एक आकर्षक गंतव्य बन गया है। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने भारत के आर्थिक उत्थान को स्वीकार किया और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली और ब्रसेल्स के बीच संबंध पहले से कहीं अधिक व्यापक और रणनीतिक होते जा रहे हैं।
आतंकवाद को जड़ से खत्म करने की प्रतिबद्धता
चर्चा का एक बड़ा हिस्सा वैश्विक आतंकवाद की चुनौती को समर्पित था। प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि भारत और बेल्जियम दोनों ही आतंकवाद के हर रूप को जड़ से समाप्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को द्विपक्षीय संबंधों का एक महत्वपूर्ण घटक बताया और इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई एक साझा जिम्मेदारी है। दोनों नेताओं ने खुफिया जानकारी साझा करने और आतंकवाद विरोधी उपायों पर अधिक निकटता से सहयोग करने पर सहमति व्यक्त की ताकि क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। यह प्रतिबद्धता इस आपसी समझ को दर्शाती है कि आर्थिक और सामाजिक प्रगति के लिए एक सुरक्षित वातावरण अनिवार्य है।
वैश्विक संघर्षों पर रुख: यूक्रेन और पश्चिम एशिया
जारी वैश्विक तनावों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्षों के बारे में बात की और उन्होंने कहा कि भारत उन सभी प्रयासों का समर्थन करता है जिनका उद्देश्य इन संघर्षों को जल्द से जल्द समाप्त करना और स्थायी शांति लाना है। पीएम मोदी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब दुनिया कई बड़े संघर्षों का सामना कर रही है और उन्होंने कूटनीति और संवाद की वकालत करने वाली भारत की लंबे समय से चली आ रही नीति को दोहराया। चाहे वह यूक्रेन की स्थिति हो या पश्चिम एशिया में तनाव, भारत उन पहलों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है जो शत्रुता को समाप्त करने और शांति की बहाली की ओर ले जाती हैं। प्रधानमंत्री का यह बयान एक अस्थिर अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में स्थिरता चाहने वाले एक जिम्मेदार वैश्विक खिलाड़ी के रूप में भारत की भूमिका को रेखांकित करता है।
व्यापार और तकनीक में सहयोग का विस्तार
दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित समझौतों में व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज, स्वच्छ ऊर्जा और प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। दोनों देशों ने इन क्षेत्रों में अपने सहयोग को काफी बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की और सतत विकास और तकनीकी नवाचार के महत्व को स्वीकार किया। महत्वपूर्ण खनिजों और स्वच्छ ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित करना हरित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने के वैश्विक प्रयासों के अनुरूप है। उन्नत तकनीक पर सहयोग करके भारत और बेल्जियम का लक्ष्य नवाचार और आर्थिक विकास को गति देने के लिए एक-दूसरे की ताकत का लाभ उठाना है। बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि आज जो संबंध बनाए जा रहे हैं वे दीर्घकालिक और रणनीतिक हैं, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि दोनों देशों को बदलते वैश्विक आर्थिक और तकनीकी परिदृश्य से लाभ मिले।