वैश्विक व्यापार के क्षेत्र में भारत का दबदबा लगातार बढ़ रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका को पछाड़कर चीन एक बार फिर से भारत का सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार बन गया है। भारतीय अर्थव्यवस्था ने एक नई छलांग लगाई है और दुनिया भर के बाजारों में भारत का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। आज हर बड़ा देश भारत के साथ कारोबार करने के लिए कतार में खड़ा है। चीन के बाजारों में भारतीय सामानों की मांग में तेजी से वृद्धि हुई है, जो इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक स्तर पर भारतीय उत्पादों पर भरोसा बढ़ रहा है।
चीन के बाजारों में ‘मेड इन इंडिया’ का विस्तार
पिछले कुछ वर्षों में भारत द्वारा घरेलू उत्पादन और निर्यात पर दिए गए जोर का सकारात्मक असर दिखने लगा है। 1 अरब डॉलर का व्यापार हुआ है। 66% (लगभग 37%) का जबरदस्त उछाल आया है। 47 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया है। चीन की कंपनियां और उपभोक्ता भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
औद्योगिक विकास और चीन से आयात का स्वरूप
भारत में तेजी से हो रहे विकास और नई फैक्ट्रियों की स्थापना के कारण कच्चे माल और मशीनों की आवश्यकता बढ़ी है। 63 अरब डॉलर की खरीदारी की है। यह आयात मुख्य रूप से देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, नई तकनीक जुटाने और घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। विदेशों से मशीनें लाकर देश के भीतर उत्पादन बढ़ाना भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है।
अमेरिका के साथ व्यापारिक मुनाफा और वैश्विक पहुंच
भारत का व्यापारिक लाभ केवल चीन तक सीमित नहीं है और दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, अमेरिका के साथ भारत का व्यापार काफी मुनाफे में है। 4 अरब डॉलर के व्यापार अधिशेष (मुनाफे) की स्थिति में है। अमेरिका में भारतीय आईटी सेवाओं, दवाओं और अन्य उत्पादों की भारी मांग है। इसके अतिरिक्त, वाणिज्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सामान अब यूएई, जर्मनी, इटली, स्पेन, ब्राजील, नेपाल और वियतनाम जैसे देशों में भी तेजी से पहुंच रहा है।