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महिला आरक्षण: प्रियंका गांधी ने OBC कोटे और परिसीमन पर सरकार को घेरा

महिला आरक्षण: प्रियंका गांधी ने OBC कोटे और परिसीमन पर सरकार को घेरा
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कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने महिला आरक्षण कानून को लागू करने को भविष्य में होने वाले परिसीमन (डिलिमिटेशन) से जोड़ने के केंद्र सरकार के फैसले पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने सरकार की मंशा पर संदेह व्यक्त करते हुए पूछा कि सीटों की संख्या बढ़ाए बिना तुरंत कोटा क्यों नहीं लागू किया जा सकता? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दावे को चुनौती देते हुए कि किसी को भी अपनी कुर्सी जाने का डर नहीं है, प्रियंका गांधी ने कहा कि अगर यह सच है, तो परिसीमन का इंतजार किए बिना आरक्षण लागू करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए।

OBC आरक्षण और 'तकनीकी मुद्दे' पर तीखा प्रहार

प्रियंका गांधी ने लोकसभा में बोलते हुए महिला आरक्षण ढांचे में ओबीसी (OBC) प्रतिनिधित्व से जुड़ी चिंताओं को कम करके आंकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की और उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी कि इस मुद्दे को बाद में सुलझाया जा सकता है, ने एक बड़ी सामाजिक मांग को महज एक 'तकनीकी मुद्दे' में बदल दिया है। प्रियंका गांधी ने जोर देकर कहा कि ओबीसी समुदाय समाज के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है जिसका संघर्ष का लंबा इतिहास रहा है। उनके सही हिस्से की मांग को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और इसे गंभीरता से सुलझाया जाना चाहिए।

परिसीमन और लोकतंत्र पर खतरे का दावा

प्रियंका गांधी ने परिसीमन को लेकर सरकार को घेरते हुए कहा कि प्रधानमंत्री किस बात से घबरा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम ओबीसी का हक छीनना चाहते हैं और उनके साथ बड़ा अन्याय करना चाहते हैं, जिसे कांग्रेस नहीं होने देगी। उन्होंने संसद के 50 फीसदी प्रस्तावित विस्तार पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें राज्यों की भागीदारी के नियम स्पष्ट नहीं हैं। असम का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह वहां मनचाही सीटों को काटा गया और राजनीतिक फायदे के लिए नई सीमाएं बनाई गईं, वही पूरे देश में दोहराया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह विधेयक इसी रूप में पारित होता है, तो लोकतंत्र पर खुला वार होगा और देश की अखंडता प्रभावित होगी।

महिला आरक्षण का ऐतिहासिक संदर्भ और कांग्रेस की भूमिका

प्रियंका गांधी वाड्रा ने भारत में महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों की ऐतिहासिक जड़ों का उल्लेख किया और उन्होंने बताया कि इसकी नींव आजादी के आंदोलन के दौरान रखी गई थी। उन्होंने मोतीलाल नेहरू की 1928 की रिपोर्ट का जिक्र किया जिसमें 19 मौलिक अधिकारों की सूची थी। साथ ही, 1931 के कराची सत्र का उल्लेख किया, जिसकी अध्यक्षता सरदार पटेल ने की थी और जहां महिलाओं के समान अधिकारों को औपचारिक रूप से मान्यता दी गई थी। उन्होंने कहा कि 'एक वोट, एक नागरिक, एक मूल्य' का सिद्धांत भारत के राजनीतिक ढांचे में शुरू से ही शामिल था।

सरकार की मंशा और अधूरे ब्यौरे पर सवाल

प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री पर आरोप लगाया कि उन्होंने संसद में कानून के बारे में अधूरा ब्यौरा दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ऐसे बोल रहे थे जैसे भाजपा ने हमेशा इस बिल का समर्थन किया हो। प्रियंका ने इसे सत्ता में बने रहने का एक 'कमजोर बहाना' करार दिया और कहा कि ऐसी संसद बनाने की कोशिश हो रही है जहां पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व का अभाव होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्षी दलों को धर्मसंकट में डालने के लिए ऐसा माहौल बनाया जा रहा है, जहां एक तरफ महिला आरक्षण है और दूसरी तरफ ओबीसी वर्ग को नकारने की स्वतंत्रता ली जा रही है।

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