7 दशमलव 8 प्रतिशत की जीडीपी ग्रोथ से गदगद पीएम मोदी वैश्विक संकट के बीच भारत का कमाल

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7 दशमलव 8 प्रतिशत की जीडीपी ग्रोथ से गदगद पीएम मोदी वैश्विक संकट के बीच भारत का कमाल
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दुनिया भर में जारी युद्ध और गंभीर आर्थिक संकट के बीच भारत ने एक बार फिर अपनी मजबूती का लोहा मनवाया है और वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत ने 7 दशमलव 8 प्रतिशत की शानदार जीडीपी ग्रोथ दर्ज की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विकास दर पर खुशी जाहिर करते हुए इसे देश की सामूहिक शक्ति का परिणाम बताया है। एक ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था सप्लाई चेन की दिक्कतों और मंदी के साये में है, भारत की यह उपलब्धि अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार का मानना है कि यह विकास दर केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह 140 करोड़ भारतीयों के अटूट विश्वास और उनकी कड़ी मेहनत का जीवंत प्रमाण है।

निराशावादियों को मिला करारा जवाब

इस ऐतिहासिक कामयाबी के साथ ही सरकार ने उन तत्वों को भी कड़ा संदेश दिया है जो देश के भीतर निराशा का माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। सरकार के अनुसार, कुछ लोग 'झूठ की गूंज' के माध्यम से देश की प्रगति को कमतर आंकने और जनता के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश में लगे हैं। इन तमाम चुनौतियों और नकारात्मकता के बावजूद, भारत ने विकास की तेज रफ्तार पकड़ ली है। साल 2020 में आई कोविड महामारी के बाद से वैश्विक स्तर पर अस्थिरता का दौर जारी है, लेकिन भारत ने हर बाधा को पार करते हुए अपनी अर्थव्यवस्था को एक मजबूत मुकाम पर पहुंचाया है। यह सफलता देशवासियों की उस संकल्प शक्ति को समर्पित है जिसने हर मुश्किल घड़ी में देश का साथ दिया है।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की बंपर छलांग

इस विकास दर को हासिल करने में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की भूमिका सबसे अहम रही है। आंकड़ों के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने 9 दशमलव 2 प्रतिशत की शानदार ग्रोथ दर्ज की है। अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी इन आंकड़ों पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यह वृद्धि केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि अर्थव्यवस्था के हर हिस्से में सकारात्मक बदलाव दिख रहे हैं। विदेशी चुनौतियों और वैश्विक अस्थिरता के बावजूद अगर भारतीय अर्थव्यवस्था 7 दशमलव 8 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, तो इसका सीधा श्रेय भारतीयों की कड़ी मेहनत को जाता है।

स्वदेशी का मंत्र और विदेशी दौरों से परहेज

विकास की इस गति को भविष्य में भी बनाए रखने के लिए सरकार ने आत्मनिर्भर भारत के संकल्प पर जोर दिया है और जनता से 'वोकल फॉर लोकल' और 'मेक इन इंडिया' को पूरी तरह अपनाने की अपील की गई है। इसके साथ ही सरकार ने कुछ विशेष सुझाव भी दिए हैं, जैसे कि बेवजह की विदेश यात्राओं से बचना और विदेशों में डेस्टिनेशन वेडिंग करने से परहेज करना। सरकार का सुझाव है कि यदि बहुत जरूरी न हो, तो सोना खरीदने से भी बचना चाहिए। इन कदमों का उद्देश्य देश के पैसे को देश के भीतर ही रखना और घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है और सरकार का लक्ष्य है कि स्वदेशी पर बल देकर आजादी के 100वें साल तक युवाओं को एक विकसित भारत सौंपा जा सके।

पुराने कानूनों का खात्मा और बढ़ता भरोसा

व्यापार को सुगम बनाने के लिए सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं। नागरिकों और व्यापारियों पर से नियमों का बोझ कम करने के लिए करीब 1000 पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। इसके अलावा, 40000 से ज्यादा नियमों को सरल बनाया गया है ताकि बिजनेस करना आसान हो सके। उद्योग जगत के साथ सरकार का निरंतर संवाद जारी है और कई देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते किए जा रहे हैं। विदेशी निवेश और अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) का पैसा लगातार भारतीय बैंकों में जमा हो रहा है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारतीय बैंकिंग प्रणाली पर लोगों का भरोसा पहले के मुकाबले काफी बढ़ गया है।

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