सुभाष चंद्रा को झटका: NCLT ने दिवालियापन के फैसले पर लगाई रोक, संपत्तियों की बिक्री प्रतिबंधित

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सुभाष चंद्रा को झटका: NCLT ने दिवालियापन के फैसले पर लगाई रोक, संपत्तियों की बिक्री प्रतिबंधित
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नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा से जुड़े दिवालियापन के मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने अपने 25 अगस्त के पिछले आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह आदेश सुभाष चंद्रा के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि इसके साथ ही ट्रिब्यूनल ने उनकी संपत्तियों की बिक्री और हस्तांतरण पर भी कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। ट्रिब्यूनल ने यह कदम मामले में सामने आए विरोधाभासों और कानूनी जटिलताओं को देखते हुए उठाया है।

संपत्तियों के हस्तांतरण पर पूर्ण प्रतिबंध

NCLT ने स्पष्ट निर्देश जारी किया है कि सुभाष चंद्रा, जो इस मामले में एक गारंटर की भूमिका में हैं, अपनी किसी भी संपत्ति को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से किसी अन्य पक्ष को नहीं सौंप सकते हैं और ट्रिब्यूनल ने यह सुनिश्चित करने के लिए कि दिवालियापन की कार्यवाही के दौरान संपत्तियों की स्थिति यथावत बनी रहे, उनकी बिक्री पर पूरी तरह से ब्रेक लगा दिया है। यह निर्देश तब तक प्रभावी रहेगा जब तक कि मामले की अगली सुनवाई और अंतिम निर्णय नहीं हो जाता। ट्रिब्यूनल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लेनदारों के हितों की रक्षा हो सके और संपत्तियों का कोई अनधिकृत हस्तांतरण न हो।

पांच सदस्यीय विशेष बेंच का गठन

इस मामले की जटिलता और पहले के आदेशों में मौजूद विरोधाभासों को देखते हुए, अब इसे NCLT की पांच सदस्यों वाली एक विशेष बेंच के सुपुर्द कर दिया गया है और मंगलवार को जब इस विशेष बेंच ने मामले की सुनवाई शुरू की, तो उन्होंने पाया कि पहले के तीन सदस्यों वाले आदेशों में काफी अंतर था। बेंच ने गौर किया कि पिछले आदेशों में कोई स्पष्ट बहुमत वाली राय नहीं थी जिसे कानूनी रूप से लागू किया जा सके। इसी कारण से, ट्रिब्यूनल ने मामले से जुड़े सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं और अब इस पर नए सिरे से विचार किया जाएगा। पांच सदस्यों वाली यह बेंच अब दिवालियापन की कार्यवाही में आगे की दिशा तय करने से पहले सभी पहलुओं की समीक्षा करेगी।

विवाद का मुख्य कारण: 22,000 करोड़ बनाम 6 करोड़ 25 लाख

इस पूरे विवाद की जड़ में वह आदेश है जिसने सुभाष चंद्रा के लिए अपनी दिवालियापन की कार्यवाही को केवल 6 करोड़ 25 लाख रुपये का भुगतान करके निपटाने का रास्ता खोल दिया था। यह राशि उन पर किए गए कुल दावों की तुलना में बेहद मामूली थी, क्योंकि उन पर कुल दावा 22,000 करोड़ रुपये से अधिक का था। इस भारी अंतर ने कई सवाल खड़े कर दिए थे कि इतने बड़े कर्ज और दावों का निपटारा इतनी छोटी राशि से कैसे संभव हो सकता है और अब पांच सदस्यीय बेंच इन सभी पहलुओं और पिछले सदस्यों की अलग-अलग राय पर गहराई से विचार करेगी। ट्रिब्यूनल यह देखेगा कि क्या यह निपटारा प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी या इसमें किसी सुधार की आवश्यकता है।

शेयर बाजार पर असर और जेडएमसीएल के आंकड़े

NCLT के इस फैसले का सीधा असर शेयर बाजार में एस्सेल ग्रुप की कंपनी जी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड (ZMCL) के शेयरों पर देखने को मिला है। बीएसई के आंकड़ों के अनुसार, जेडएमसीएल के शेयरों में लगभग एक प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 8 रुपये 54 पैसे के स्तर पर कारोबार करते देखे गए। कारोबारी सत्र के दौरान कंपनी के शेयरों में काफी उतार-चढ़ाव रहा और यह 8 रुपये 37 पैसे के निचले स्तर तक भी पहुंच गए। हालांकि, दिन की शुरुआत सकारात्मक रही थी और शेयर सोमवार के बंद भाव 8 रुपये 61 पैसे के मुकाबले तेजी के साथ 8 रुपये 70 पैसे पर खुले थे, लेकिन कानूनी घटनाक्रमों के बाद इसमें गिरावट आ गई। बाजार की यह प्रतिक्रिया निवेशकों के बीच अनिश्चितता को दर्शाती है।

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