भारत सरकार के खजाने के लिए अगस्त का महीना आर्थिक मोर्चे पर बेहद शानदार रहा है। 1 सितंबर को जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत का ग्रॉस गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स यानी जीएसटी कलेक्शन सालाना आधार पर 15 प्रतिशत की बढ़त के साथ लगभग 1 लाख 99 हजार 800 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। यह लगातार तीसरा ऐसा महीना है जब जीएसटी राजस्व में दोहरे अंकों यानी डबल डिजिट की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे पहले जून के महीने में 13 पॉइंट 9 प्रतिशत और जुलाई में 15 पॉइंट 4 प्रतिशत का उछाल देखा गया था। अगर पिछले साल के आंकड़ों से तुलना करें, तो अगस्त 2025 में यह आंकड़ा 1 लाख 74 हजार करोड़ रुपये रहा था।
आयात से होने वाली कमाई में 29 प्रतिशत की जबरदस्त तेजी
अगस्त के महीने में जीएसटी कलेक्शन की इस शानदार रफ्तार के पीछे सबसे बड़ा हाथ विदेशों से होने वाले आयात का रहा है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि आयात से मिलने वाले ग्रॉस जीएसटी राजस्व में 29 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई है। यह पिछले साल के 48 हजार 546 करोड़ रुपये से बढ़कर सीधे 62 हजार 604 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। वहीं दूसरी ओर, घरेलू बाजार से प्राप्त होने वाले टैक्स में भी 9 पॉइंट 3 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। घरेलू राजस्व 1 लाख 26 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 1 लाख 37 हजार करोड़ रुपये हो गया है। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि कुल जीएसटी नंबर को ऐतिहासिक ऊंचाई पर ले जाने में आयात शुल्क का योगदान सबसे महत्वपूर्ण रहा है।
रिफंड में बढ़ोतरी का नेट रेवेन्यू पर असर
हालांकि ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं, लेकिन नेट जीएसटी राजस्व की विकास दर थोड़ी धीमी रही है। इसका मुख्य कारण सरकार द्वारा दिए जाने वाले रिफंड में आई भारी तेजी है। अगस्त के दौरान सरकार ने कुल रिफंड में 67 पॉइंट 9 प्रतिशत की बड़ी वृद्धि दर्ज की है। रिफंड का यह आंकड़ा पिछले साल के 18 हजार 935 करोड़ रुपये से बढ़कर 31 हजार 795 करोड़ रुपये हो गया है। इस अवधि में घरेलू रिफंड में 72 पॉइंट 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि आइसगेट के माध्यम से प्रोसेस किए गए एक्सपोर्ट जीएसटी रिफंड में 61 पॉइंट 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई। इसके परिणामस्वरूप, नेट जीएसटी कलेक्शन 8 पॉइंट 3 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1 लाख 68 हजार करोड़ रुपये रहा। इसमें नेट डोमेस्टिक रेवेन्यू 3 पॉइंट 4 प्रतिशत बढ़कर 1 लाख 19 हजार करोड़ रुपये और नेट कस्टम्स जीएसटी 22 पॉइंट 3 प्रतिशत उछलकर 49 हजार 299 करोड़ रुपये रहा है। चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों यानी अप्रैल से अगस्त के दौरान कुल ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन 11 प्रतिशत बढ़कर 10 लाख 43 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि नेट रेवेन्यू 9 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 8 लाख 90 हजार करोड़ रुपये रहा है।
राज्यों का प्रदर्शन: उत्तर प्रदेश और असम ने दिखाया दम
विभिन्न राज्यों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश ने घरेलू जीएसटी कलेक्शन में 19 प्रतिशत की दमदार ग्रोथ हासिल की है। इसके अलावा तेलंगाना में 16 प्रतिशत, गुजरात में 15 प्रतिशत, कर्नाटक और केरल में 13 प्रतिशत, तथा हरियाणा और पंजाब में 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। देश में सबसे अधिक टैक्स देने वाले राज्य महाराष्ट्र में 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जिससे वहां का कुल कलेक्शन 28 हजार 779 करोड़ रुपये रहा। हालांकि, असम के आंकड़ों ने सभी को चौंका दिया है, जहां टैक्स कलेक्शन में 162 प्रतिशत का अप्रत्याशित उछाल आया है। कुछ राज्यों के लिए यह महीना चुनौतीपूर्ण भी रहा, जहां तमिलनाडु के कलेक्शन में 1 प्रतिशत, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में 7 प्रतिशत, तथा राजस्थान और गोवा में 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।