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मध्य-पूर्व तनाव: भारत में घरेलू और कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतें बढ़ीं

मध्य-पूर्व तनाव: भारत में घरेलू और कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतें बढ़ीं
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भारत में रसोई गैस (LPG) की कीमतों में एक बार फिर उछाल देखा गया है। तेल विपणन कंपनियों ने घरेलू और कमर्शियल दोनों श्रेणियों के गैस सिलेंडरों की दरों में वृद्धि की घोषणा की है। इस मूल्य वृद्धि का मुख्य कारण मध्य-पूर्व में ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव बताया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में अस्थिरता के कारण भारतीय तेल कंपनियों ने यह कदम उठाया है। सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाए रखने के लिए कई प्रशासनिक निर्देश जारी किए हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार और होर्मुज़ जलडमरूमध्य का प्रभाव

ईरान और इज़राइल के बीच जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को गहराई से प्रभावित किया है और विशेष रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में उत्पन्न बाधाओं ने वैश्विक गैस आपूर्ति को संकट में डाल दिया है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस पारगमन बिंदुओं में से एक है। अधिकारियों के अनुसार, इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से माल ढुलाई की लागत और बीमा प्रीमियम में वृद्धि हुई है, जिसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ रहा है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं।

घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर की नई दरें

तेल कंपनियों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 7 मार्च 2026 से घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में ₹60 की बढ़ोतरी प्रभावी हो गई है। 2 किलो वाले बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत ₹913 हो गई है। वहीं, 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में ₹114 से ₹115 तक का इजाफा किया गया है, जिससे इसकी कीमत ₹1883 के स्तर पर पहुंच गई है। मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे महानगरों में भी इसी अनुपात में कीमतें बढ़ाई गई हैं, जिससे होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने की संभावना है।

भारत की आयात निर्भरता और मध्य-पूर्वी देशों की भूमिका

भारत अपनी कुल LPG खपत का लगभग 60% हिस्सा अंतरराष्ट्रीय बाजारों से आयात करता है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस आयात का करीब 80% से 90% हिस्सा सऊदी अरब, कतर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे मध्य-पूर्वी देशों से आता है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य अस्थिरता या आपूर्ति मार्ग में अवरोध सीधे तौर पर भारत की घरेलू उपलब्धता को प्रभावित करता है। वर्तमान संकट के कारण वैश्विक बेंचमार्क कीमतों में हुई वृद्धि को घरेलू बाजार में समायोजित किया जा रहा है।

सरकार द्वारा उठाए गए प्रशासनिक कदम

बढ़ती कीमतों और संभावित कमी की खबरों के बीच केंद्र सरकार ने सक्रिय कदम उठाए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने सभी घरेलू तेल रिफाइनरियों को LPG का उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं ताकि आयात पर निर्भरता को अस्थायी रूप से कम किया जा सके। इसके अतिरिक्त, गैस की कालाबाजारी और जमाखोरी को रोकने के लिए नए नियम लागू किए गए हैं। अब दो सिलेंडर बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिन का अनिवार्य अंतर तय किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और घरेलू उपभोक्ताओं को आपूर्ति में प्राथमिकता दी जाएगी।

पेट्रोलियम मंत्रालय का आधिकारिक वक्तव्य

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्थिति पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि देश में रसोई गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है। उन्होंने जनता से अपील की है कि वे घबराहट में आकर अतिरिक्त सिलेंडर जमा न करें। मंत्रालय के अनुसार, सरकार अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रख रही है और वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों की संभावनाओं को भी तलाश रही है। अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए आपूर्ति श्रृंखला को टूटने नहीं दिया जाएगा और वितरण नेटवर्क को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

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