मध्य पूर्व में जारी संघर्ष एक नए और अधिक विनाशकारी चरण में प्रवेश कर गया है और ईरान द्वारा इजरायल पर किए गए हालिया मिसाइल हमले ने क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को बदल दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की ओर से दागी गई कई बैलिस्टिक मिसाइलों को इजरायल का उन्नत वायु रक्षा तंत्र 'आयरन डोम' इंटरसेप्ट करने में विफल रहा, जिसके परिणामस्वरूप इजरायली क्षेत्रों में भारी विस्फोट और क्षति हुई है। इस हमले के वीडियो साक्ष्य सामने आए हैं, जिनमें मिसाइलों के सीधे प्रभाव और उसके बाद होने वाले शक्तिशाली धमाकों को देखा जा सकता है और यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने भी ईरानी नौसेना के खिलाफ सीधी सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और माइन्स का खतरा
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक महत्वपूर्ण अभियान चलाया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरानी नौसेना की 10 से अधिक उन नावों को नष्ट कर दिया है जो इस महत्वपूर्ण जलमार्ग में समुद्री माइन्स बिछाने के कार्य में संलग्न थीं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि की है। उन्होंने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि बिछाई गई सभी माइन्स को तुरंत हटाया जाना चाहिए, अन्यथा इसके गंभीर परिणाम होंगे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस अभियान के वीडियो और साक्ष्य भी जारी किए हैं, जिनमें ईरानी जहाजों और पनडुब्बियों के विनाश को दिखाया गया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने इस क्षेत्र में लगभग 6000 उन्नत सेंसर-आधारित माइन्स बिछाई हैं, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
इजरायल पर ईरानी मिसाइल प्रहार और आयरन डोम की स्थिति
ईरान और इजरायल के बीच सीधे टकराव में तेजी आई है। ईरान की ओर से किए गए मिसाइल हमले ने इजरायल की रक्षा प्रणालियों को चुनौती दी है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उनके ड्रोन और मिसाइल हमलों ने तेल अवीव के दक्षिण में स्थित हाइला में एक प्रमुख सैटेलाइट संचार और खुफिया केंद्र को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है और इस हमले के दौरान आयरन डोम की विफलता ने सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच चिंता पैदा कर दी है। धमाकों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इसके प्रभाव दूर-दराज के इलाकों में महसूस किए गए। ईरान ने इस हमले को जवाबी कार्रवाई बताते हुए बैलिस्टिक मिसाइलों के लॉन्च का वीडियो भी जारी किया है, जिसमें एक के बाद एक कई मिसाइलें दागते हुए देखा जा सकता है।
वैश्विक तेल बाजार और भारत की रणनीतिक भूमिका
युद्ध के कारण वैश्विक तेल कीमतों में अस्थिरता की स्थिति बनी हुई है। इस संदर्भ में अमेरिका ने भारत की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के अनुसार, भारत दुनिया भर में तेल की कीमतों को स्थिर बनाए रखने में एक प्रमुख भागीदार रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि रूस से भारत द्वारा की जा रही तेल की निरंतर खरीद वैश्विक बाजार में आपूर्ति बनाए रखने का एक हिस्सा है। राजदूत ने स्पष्ट किया कि भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल उपभोक्ताओं और शोधकों में से एक है, इसलिए अमेरिकी और भारतीय नागरिकों के हित में बाजार की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए दोनों देशों का सहयोग आवश्यक है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के कारण ऊर्जा संकट गहराने की आशंका बनी हुई है।
लेबनान में इजरायली सैन्य अभियान और हिजबुल्ला को नुकसान
इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने लेबनान की राजधानी बेरूत में अपनी सैन्य गतिविधियों को तेज कर दिया है। इजरायल ने हिजबुल्ला के वित्तीय विंग, अल-करद अल-हसन के ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। इन हमलों का उद्देश्य संगठन की आर्थिक रीढ़ को तोड़ना है। इजरायली सेना ने पुष्टि की है कि इन अभियानों के दौरान हिजबुल्ला के कमांडर हसन सलामेह को मार गिराया गया है। इसके जवाब में हिजबुल्ला ने उत्तरी इजरायल में स्थित सैन्य ठिकानों पर रॉकेटों की बौछार की है। साथ ही, इजरायल और अमेरिकी बल ईरान के भीतर भी रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना रहे हैं, जिनमें बोनाब पुलिस मुख्यालय और इस्फहान का खातामाई एयरबेस शामिल है। सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिले हैं कि इस्फहान परमाणु स्थल के पास सुरक्षा बढ़ाने के लिए नई सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है।
क्षेत्रीय विस्तार की आशंका और तुर्की को चेतावनी
मध्य पूर्व का यह संघर्ष अब अन्य देशों को भी अपनी चपेट में ले सकता है। इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है, जिसमें उन्होंने कहा है कि ईरान के बाद इजरायल का अगला निशाना तुर्की हो सकता है। बेनेट के अनुसार, तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन 'कट्टरपंथी सुन्नी इस्लाम' का एक नया गठबंधन बनाने का प्रयास कर रहे हैं और उनके संबंध सीरिया, कतर और हमास जैसे समूहों से गहरे हो रहे हैं। बेनेट ने स्पष्ट किया कि यदि इजरायल को आतंक से घेरने की कोशिश की गई, तो इजरायल मूकदर्शक नहीं बना रहेगा। इस बयान ने क्षेत्र में कूटनीतिक और सैन्य तनाव को और अधिक बढ़ा दिया है, जिससे आने वाले समय में संघर्ष के और अधिक फैलने की संभावना जताई जा रही है।