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भारतीय विमान कंपनियों का बड़ा फैसला, 350 फ्लाइट्स रद्द, ऐसे मिलेगा रिफंड

भारतीय विमान कंपनियों का बड़ा फैसला, 350 फ्लाइट्स रद्द, ऐसे मिलेगा रिफंड
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मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता और हवाई क्षेत्र में लगाई गई पाबंदियों का व्यापक असर भारतीय विमानन क्षेत्र पर पड़ा है। रविवार, 1 मार्च को भारतीय एयरलाइंस की 350 से अधिक उड़ानें रद्द कर दी गईं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, हवाई क्षेत्र की सुरक्षा और परिचालन संबंधी बाधाओं के कारण यह बड़ा फेरबदल करना पड़ा है। हालांकि, शुरुआती अनुमानों में 444 उड़ानों के रद्द होने की आशंका जताई गई थी, लेकिन वास्तविक संख्या 350 तक सीमित रही, जो यात्रियों के लिए आंशिक राहत की बात है।

दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों पर परिचालन प्रभाव

विमानन मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, इस अंतरराष्ट्रीय संकट का सबसे गंभीर प्रभाव देश के दो सबसे व्यस्त हवाई अड्डों, दिल्ली और मुंबई पर देखा गया है। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लगभग 100 उड़ानों का परिचालन ठप रहा। वहीं, मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 125 उड़ानों को रद्द करना पड़ा। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इससे एक दिन पहले, 28 फरवरी को भी घरेलू कंपनियों की 410 उड़ानें रद्द हुई थीं। हवाई अड्डों पर यात्रियों की बढ़ती भीड़ को प्रबंधित करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती की गई है और सभी प्रमुख हवाई अड्डों को ‘ऑपरेशनल अलर्ट’ पर रखा गया है ताकि किसी भी आपातकालीन डायवर्जन की स्थिति में सुचारू रूप से निपटा जा सके।

अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर संकट और एयर इंडिया का फैसला

यह संकट केवल घरेलू मार्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी इसका गहरा असर पड़ा है। टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया ने रविवार के लिए अपनी 22 अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय सेवाओं को रद्द करने की घोषणा की है। इसके साथ ही, मध्य पूर्व संकट के कारण एयर इंडिया द्वारा रद्द की गई कुल विदेशी उड़ानों की संख्या अब 50 तक पहुंच गई है। एयरलाइन प्रबंधन के अनुसार, मध्य पूर्व के हवाई क्षेत्र का उपयोग करने वाली चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का निलंबन 2 मार्च तक के लिए बढ़ा दिया गया है। एयरलाइन ने कहा है कि यह कदम सुरक्षा और स्थिति के निरंतर मूल्यांकन के बाद एहतियात के तौर पर उठाया गया है।

स्पाइसजेट और वैश्विक एयरलाइंस की स्थिति

भारतीय एयरलाइंस के साथ-साथ वैश्विक विमानन कंपनियों का परिचालन भी इस तनाव से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। स्पाइसजेट ने 2 मार्च के लिए भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच अपनी 33 उड़ानों को रद्द कर दिया है। इसके अलावा, लुफ्थांसा और एमिरेट्स जैसी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस को भी अपने रूट बदलने या उड़ानें रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, हवाई क्षेत्र के बंद होने से उड़ानों की दूरी और समय में वृद्धि हुई है, जिससे परिचालन लागत पर भी दबाव बढ़ रहा है और मंत्रालय और एयरलाइन संचालक लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं ताकि सुरक्षा मानकों से समझौता किए बिना उड़ानों को पुनः बहाल किया जा सके।

यात्रियों के लिए रिफंड और रीशेड्यूलिंग के नियम

उड़ानों के अचानक रद्द होने से हजारों यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हुई हैं। इस स्थिति को देखते हुए, प्रमुख भारतीय विमानन कंपनियों ने यात्रियों को आर्थिक राहत देने के लिए विशेष प्रावधान किए हैं और इंडिगो और एयर इंडिया ने मध्य पूर्व से आने-जाने वाले यात्रियों के लिए बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के टिकट रीशेड्यूल करने या पूरा रिफंड (पैसे वापसी) लेने की सुविधा प्रदान की है। इंडिगो के अनुसार, 28 फरवरी या उससे पहले बुक किए गए टिकटों पर 7 मार्च तक की यात्रा के लिए पूर्ण शुल्क माफी (वेवर) लागू रहेगी। वहीं, एयर इंडिया ने 28 फरवरी तक की गई बुकिंग, जिनकी यात्रा 5 मार्च तक निर्धारित थी, के लिए समान सुविधा की घोषणा की है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे हवाई अड्डे के लिए निकलने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति की जांच अवश्य कर लें।

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