संसद में महिला आरक्षण बिल (नारीशक्ति वंदन अधिनियम संशोधन) पर हुआ मतदान आखिरकार उम्मीदों के विपरीत रहा और यह महत्वपूर्ण बिल पारित होने में विफल रहा और मतदान के दौरान बिल को आवश्यक संवैधानिक बहुमत प्राप्त नहीं हो सका, जिसके परिणामस्वरूप यह गिर गया। इस विधायी प्रक्रिया के संपन्न होने के साथ ही संसद की कार्यवाही को कल तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।
मतदान के आंकड़े और संवैधानिक अनिवार्यता
संसद में हुए मतदान के पहले राउंड में कुल 528 सांसदों ने अपने मत डाले। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 298 सांसदों ने बिल के पक्ष में मतदान किया, जबकि 230 सांसदों ने इसके खिलाफ अपना वोट दिया। हालांकि आंकड़ों में समर्थन का पलड़ा भारी दिखा, लेकिन संवैधानिक नियमों के तहत इस बिल को पास होने के लिए सदन में उपस्थित सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी। इस नियम के अनुसार बिल को पारित करने के लिए 352 वोटों की जरूरत थी, जो पूरी नहीं हो सकी। इसी कारण यह अहम बिल पास नहीं हो पाया और गिर गया।
राहुल गांधी का विरोध और 'एंटी-नेशनल' का आरोप
बिल पर मतदान और इसके गिरने से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस संशोधन की तीखी आलोचना की। शुक्रवार को अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यह बिल असल में महिलाओं के कल्याण के लिए नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बिल ओबीसी (OBC), एससी-एसटी (SC-ST) और छोटे राज्यों के हितों के खिलाफ है। राहुल गांधी ने आगे कहा कि यह देश के अलग-अलग हिस्सों, जैसे दक्षिण भारत, उत्तर-पूर्व और उत्तर-पश्चिम के साथ भी अन्याय करता है और उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, "हम भारत जोड़ने वाले न किसी का हक छिनने देंगे, न देश को बंटने देंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भावुक अपील और तर्क
बिल पर मतदान से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर विस्तृत पोस्ट साझा कर सभी दलों से समर्थन मांगा था। पीएम मोदी ने लिखा था कि संसद में नारीशक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन पर गहन चर्चा चल रही है और कल रात भी एक बजे तक इस पर विमर्श हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी भ्रम फैलाए गए थे, उनका तर्कबद्ध जवाब दिया गया है और हर आशंका का समाधान किया गया है। उन्होंने सदस्यों को जानकारी के अभाव को दूर करने और विरोध के विषयों को सुलझाने का आश्वासन दिया था।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा, "महिला आरक्षण के इस विषय पर देश में चार दशक तक बहुत राजनीति कर ली गई है। अब समय है कि देश की आधी आबादी को उसके अधिकार अवश्य मिलें। " उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेने और नारी शक्ति की भावनाओं का सम्मान करने की अपील की थी। पीएम ने सांसदों से अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनने और मां-बहन-बेटी-पत्नी का स्मरण करते हुए मतदान करने का आग्रह किया था ताकि देश का लोकतंत्र और सशक्त हो सके।
अमित शाह का लक्ष्य और भविष्य की योजना
लोकसभा में चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सरकार के दृष्टिकोण को स्पष्ट किया था। उन्होंने कहा था कि सरकार का लक्ष्य है कि 2029 तक महिलाओं को आरक्षण पूरी तरह लागू कर दिया जाए, ताकि उन्हें राजनीति में अधिक अवसर प्राप्त हो सकें। हालांकि, सदन में बहुमत न मिल पाने के कारण वर्तमान में यह बिल गिर गया है और 2029 तक के इस लक्ष्य पर अब अनिश्चितता के बादल हैं।