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: महंगाई का बड़ा झटका: दूध, पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर के दाम बढ़े, देखें पूरी लिस्ट

- महंगाई का बड़ा झटका: दूध, पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर के दाम बढ़े, देखें पूरी लिस्ट
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मई महीने के पहले पंद्रह दिन भारतीय आम आदमी के लिए आर्थिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण साबित हुए हैं। इस अवधि के दौरान देश में महंगाई की मार तेजी से बढ़ी है, जिससे मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों का बजट पूरी तरह से चरमरा गया है। पहली तारीख से लेकर अब तक की स्थिति पर नजर डालें तो रसोई गैस सिलेंडर से लेकर सड़क पर चलने वाले वाहनों के ईंधन यानी पेट्रोल-डीजल और सीएनजी तक के दाम बढ़ चुके हैं। इस महंगाई के पीछे मुख्य कारणों में मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी तनाव को माना जा रहा है, जिसका सीधा असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतें और डॉलर के मुकाबले रुपये में आ रही गिरावट ने देश की इकोनॉमी के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। इसी वैश्विक और आर्थिक अस्थिरता का नतीजा है कि देश में दैनिक जीवन के लिए जरूरी कई चीजों के दाम में भारी बढ़ोतरी की गई है।

कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी उछाल

मई महीने की शुरुआत ही उपभोक्ताओं के लिए झटके भरी रही। महीने की पहली तारीख को ही सरकारी तेल कंपनियों ने कमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में भारी बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया। कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 993 रुपये का इजाफा कर दिया। 50 रुपये के स्तर पर पहुंच गए। दिल्ली के अलावा मुंबई सहित देश के कई अन्य प्रमुख शहरों में भी कमर्शियल सिलेंडर के रेट 3000 रुपये के आस-पास दर्ज किए गए हैं। हालांकि, राहत की बात यह रही कि सरकार ने इस महीने घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के दामों में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन कमर्शियल सिलेंडर महंगा होने से बाहर खाना-पीना महंगा होने की आशंका बढ़ गई है।

गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी में वृद्धि और प्रधानमंत्री की अपील

देश के विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने और चालू खाता घाटे (CAD) पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एक विशेष अपील की है। उन्होंने लोगों से अनुरोध किया कि वे अगले एक साल तक सोना खरीदने से बचें। इसके साथ ही उन्होंने पेट्रोल और डीजल की खपत में भी कमी लाने का आग्रह किया है ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके। प्रधानमंत्री की इस अपील के तुरंत बाद सरकार ने ठोस कदम उठाते हुए गोल्ड, सिल्वर और अन्य कीमती धातुओं पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) में भारी बढ़ोतरी कर दी। जो इंपोर्ट टैक्स पहले 6 फीसदी के स्तर पर था, उसे बढ़ाकर अब 15 फीसदी कर दिया गया है। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से आने वाले समय में सोने के आयात में कमी आएगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी।

दूध की कीमतों में भी हुई बढ़ोतरी

महंगाई का अगला प्रहार आम आदमी की रसोई पर हुआ जब देश की दो प्रमुख डेयरी कंपनियों, मदर डेयरी और अमूल ने दूध के दाम बढ़ाने का फैसला किया। इन दोनों दिग्गज कंपनियों ने एक ही दिन, 13 मई 2026 को दूध की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की। सबसे पहले अमूल ने दूध के दाम में 2 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि का ऐलान किया, जिसके कुछ ही घंटों बाद शाम को मदर डेयरी ने भी अपने विभिन्न प्रकार के दूध पर 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी। मदर डेयरी द्वारा बुधवार को जारी किए गए आधिकारिक बयान में कहा गया कि पिछले एक साल के दौरान किसानों से दूध खरीदने की लागत में लगभग 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसके कारण कीमतों में यह बदलाव करना अनिवार्य हो गया था।

सीएनजी के दामों में इजाफा और परिवहन पर असर

जिस दिन दूध की बढ़ी हुई कीमतें लागू होनी थीं, उसी दिन यानी 14 मई 2026 को मुंबई में सीएनजी (CNG) के दामों में भी बढ़ोतरी कर दी गई। मुंबई में सीएनजी की कीमतों में 2 रुपये प्रति किलोग्राम का इजाफा किया गया, जिसके बाद वहां सीएनजी के दाम 84 रुपये प्रति किलो हो गए। इस बढ़ोतरी के कारण स्थानीय स्तर पर ऑटो और टैक्सी के किराए बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इसके ठीक अगले दिन, यानी 15 मई को देश की राजधानी दिल्ली में भी सीएनजी के दाम बढ़ा दिए गए। 09 रुपये प्रति किलो हो गई है।

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राष्ट्रव्यापी वृद्धि

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का सबसे बड़ा असर ईंधन की कीमतों पर पड़ा है। कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz) की नाकेबंदी की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उबाल ला दिया है। सरकारी तेल कंपनियां कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण लाखों-करोड़ों रुपये का घाटा उठा रही थीं और इसी दबाव के बीच आज पूरे देश में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए गए हैं। सरकार ने पूरे देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर का एकमुश्त इजाफा कर दिया है। कच्चे तेल की सप्लाई में आ रही बाधाओं और वैश्विक अस्थिरता के कारण आम जनता को अब आवाजाही के लिए अधिक जेब ढीली करनी होगी।

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