सुप्रीम कोर्ट ने देश और दुनिया में उत्पन्न हुए ईंधन संकट के मद्देनजर तत्काल प्रभाव से कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक उपाय लागू करने का निर्णय लिया है और केंद्र सरकार द्वारा ईंधन बचाने के आह्वान पर कदम उठाते हुए, शीर्ष अदालत ने कुछ विशिष्ट श्रेणियों के मामलों के लिए अनिवार्य वर्चुअल सुनवाई, माननीय न्यायाधीशों के लिए कार-पूलिंग और रजिस्ट्री स्टाफ के लिए कुछ हद तक वर्क-फ्रॉम-होम (WFH) की व्यवस्था समेत कई तत्काल प्रशासनिक बदलाव शुरू किए हैं। शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक सर्कुलर के माध्यम से इन निर्णयों की जानकारी दी गई है। सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल भरत पाराशर द्वारा जारी इस सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि ये कदम अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद उत्पन्न हुए ईंधन संकट को देखते हुए उठाए गए हैं। यह निर्णय डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) द्वारा 12 तारीख को जारी किए गए एक ऑफिस मेमोरेंडम के अनुरूप लिया गया है, ताकि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच संसाधनों का प्रभावी और विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
वर्चुअल सुनवाई और तकनीकी व्यवस्था के नए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब मिसलेनियस डेज (विविध दिनों) पर केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही मामलों की सुनवाई की जाएगी। इसमें विशेष रूप से सोमवार और शुक्रवार के दिन शामिल हैं, जिन्हें अब पूरी तरह से वर्चुअल सुनवाई के लिए आरक्षित किया गया है। इसके अलावा, आंशिक कार्य दिवसों (Partial Working Days) के दौरान भी अदालती कार्यवाही वर्चुअल मोड में ही संचालित होगी। सर्कुलर में यह स्पष्ट किया गया है कि सोमवार और शुक्रवार सहित अलग-अलग दिनों में लिस्टेड सभी मामले, साथ ही कोर्ट के कुछ हद तक काम करने वाले दिनों के दौरान तय किए गए मामले, अब अगले आदेश तक सिर्फ वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ही सुने जाएंगे। इस व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए रजिस्ट्री को विशेष निर्देश दिए गए हैं। रजिस्ट्री को यह सुनिश्चित करना होगा कि वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग लिंक का समय पर सर्कुलेशन हो और सुनवाई के दौरान स्टेबल कनेक्टिविटी बनी रहे। साथ ही, कार्यवाही के दौरान न्यायाधीशों को किसी भी प्रकार की तकनीकी असुविधा से बचाने के लिए तुरंत टेक्निकल सपोर्ट प्रदान करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
जजों के लिए कार-पूलिंग और स्टाफ हेतु वर्क-फ्रॉम-होम
ईंधन की बचत के इस अभियान में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने भी अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की है। सर्कुलर के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के जजों ने आपस में कार-पूलिंग अरेंजमेंट को बढ़ावा देने के लिए “एकमत से” फैसला किया है। यह कदम न केवल ईंधन की खपत को कम करेगा बल्कि प्रशासनिक स्तर पर एक मिसाल भी पेश करेगा। इसके साथ ही, रजिस्ट्री के कर्मचारियों के लिए भी नए कार्य नियम निर्धारित किए गए हैं। कोर्ट ने रजिस्ट्री की हर ब्रांच या सेक्शन में 50 प्रतिशत तक स्टाफ को हफ्ते में ज्यादा से ज्यादा दो दिन घर से काम (Work From Home) करने की अनुमति प्रदान की है। इस व्यवस्था का उद्देश्य कार्यालय आने-जाने में होने वाले ईंधन खर्च को कम करना है। हालांकि, सर्कुलर में यह भी साफ किया गया है कि अदालत के कामकाज में कोई रुकावट न आए, इसके लिए पर्याप्त संख्या में स्टाफ को ऑफिस में भौतिक रूप से मौजूद रहना अनिवार्य होगा।
प्रशासनिक सुचारुता और जवाबदेही के नियम
रजिस्ट्री के कामकाज को व्यवस्थित रखने के लिए रजिस्ट्रारों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे पहले से ही एक साप्ताहिक रोस्टर (Weekly Roster) तैयार करें, जिससे यह स्पष्ट रहे कि कौन सा कर्मचारी किस दिन कार्यालय आएगा और कौन घर से काम करेगा।
सर्कुलर में रजिस्ट्री अधिकारियों को वर्क-फ्रॉम-होम अरेंजमेंट को कम करने या उसमें बदलाव करने की फ्लेक्सिबिलिटी (लचीलापन) भी दी गई है। यदि किसी खास ब्रांच या सेक्शन में काम की प्रकृति ऐसी है कि वहां वर्क-फ्रॉम-होम व्यवस्था व्यावहारिक नहीं है, तो अधिकारी अपने विवेक से निर्णय ले सकते हैं। रजिस्ट्रारों को साप्ताहिक रोस्टर बनाने और आवश्यकता पड़ने पर कर्मचारियों को तुरंत कार्यालय बुलाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं ताकि न्यायपालिका के कार्यों को बिना किसी बाधा के जारी रखा जा सके।