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ईरान का ओमान के सलालाह पोर्ट पर ड्रोन हमला, तेल टैंकों को बनाया निशाना

ईरान का ओमान के सलालाह पोर्ट पर ड्रोन हमला, तेल टैंकों को बनाया निशाना
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ओमान के सलालाह पोर्ट पर ईरानी ड्रोन्स द्वारा किए गए हमले ने क्षेत्रीय तनाव को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने ओमान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सलालाह पोर्ट पर तेल भंडारण टैंकों को निशाना बनाकर कई ड्रोन हमले किए। इस हमले के बाद बंदरगाह क्षेत्र में आग की ऊंची लपटें और धुएं का गुबार देखा गया और ब्रिटिश मैरीटाइम सिक्योरिटी फर्म एम्ब्रे ने इस हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि हमले में बंदरगाह के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है, हालांकि शुरुआती जानकारी के अनुसार किसी भी मर्चेंट जहाज को प्रत्यक्ष क्षति नहीं हुई है।

सलालाह पोर्ट पर हमले का विवरण

ओमान टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला उस समय हुआ जब क्षेत्र में इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियां चरम पर हैं। ईरानी ड्रोन्स ने सटीक रूप से तेल भंडारण सुविधाओं को निशाना बनाया, जिससे वहां स्थित टैंकों में भीषण आग लग गई। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमला ईरान की उस रणनीति का हिस्सा हो सकता है जिसके तहत वह क्षेत्रीय ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहा है। हमले के तुरंत बाद स्थानीय अग्निशमन सेवाओं और सुरक्षा बलों को तैनात किया गया ताकि आग पर नियंत्रण पाया जा सके और आगे के नुकसान को रोका जा सके।

ओमान के सुल्तान की कड़ी प्रतिक्रिया

इस हमले के बाद ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल-सईद ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से सीधा संपर्क किया। सुल्तान ने ओमानी क्षेत्र पर हुए इन हमलों पर अपनी गहरी नाराजगी और चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि ओमान हमेशा से क्षेत्रीय संघर्षों में एक तटस्थ मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है और उसकी संप्रभुता का उल्लंघन स्वीकार्य नहीं है। सुल्तान ने दोहराया कि ओमान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा। यह कूटनीतिक संवाद ऐसे समय में हुआ है जब ओमान ने हाल ही में ईरान के नए नेतृत्व के साथ औपचारिक संबंध बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई थी।

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती असुरक्षा

सलालाह पोर्ट पर हमले के साथ-साथ होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास भी सुरक्षा स्थिति गंभीर बनी हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इसी समयावधि के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य के पास 3 व्यावसायिक जहाजों पर भी हमले की खबरें आई हैं। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और यहां होने वाली कोई भी अस्थिरता अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकती है और सुरक्षा फर्मों ने इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों के लिए अलर्ट जारी किया है और अतिरिक्त सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं।

क्षेत्रीय संघर्ष और ओमान की मध्यस्थता की भूमिका

ओमान लंबे समय से तेहरान और वाशिंगटन के बीच एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ के रूप में कार्य करता रहा है। हालांकि, हालिया हमलों ने इस मध्यस्थता की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इजरायल और अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान द्वारा खाड़ी देशों में की जा रही कार्रवाइयों ने ओमान जैसे शांतिप्रिय देशों को भी युद्ध की चपेट में आने के जोखिम में डाल दिया है और ओमान के अधिकारियों के अनुसार, वे क्षेत्र में शांति बहाली के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदायों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, लेकिन अपनी सीमाओं के भीतर किसी भी सैन्य हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

सुरक्षा एजेंसियों की प्रारंभिक रिपोर्ट

ब्रिटिश सुरक्षा फर्म एम्ब्रे और अन्य अंतरराष्ट्रीय निगरानी एजेंसियों ने इस हमले के तकनीकी पहलुओं की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, हमले में इस्तेमाल किए गए ड्रोन्स की प्रकृति और उनकी मारक क्षमता ईरानी सैन्य तकनीक से मेल खाती है। एम्ब्रे ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हालांकि तेल टैंकों को निशाना बनाया गया, लेकिन बंदरगाह के अन्य परिचालन क्षेत्रों को सुरक्षित रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के हमले समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करते हैं, जिससे वैश्विक लॉजिस्टिक्स और बीमा लागत में वृद्धि होने की संभावना रहती है।

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