ईरान से आ रही अपुष्ट रिपोर्टों के अनुसार, देश के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद की एक संयुक्त सैन्य कार्रवाई में मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के विभिन्न ठिकानों, विशेष रूप से राजधानी तेहरान को निशाना बनाकर किए गए हमलों में यह घटना हुई है। यह घटनाक्रम ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबरों के ठीक बाद सामने आया है। आधिकारिक सूत्रों और स्थानीय मीडिया के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, तेहरान पर लगातार मिसाइल और हवाई हमले किए जा रहे हैं, जिसमें कई महत्वपूर्ण सरकारी और सैन्य प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान पहुँचा है।
सैन्य अभियान और तेहरान पर हवाई हमले
सैन्य सूत्रों के अनुसार, अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ एक व्यापक संयुक्त अभियान शुरू किया है। इस हमले में कथित तौर पर 30 से अधिक B2 बॉम्बर विमानों का उपयोग किया गया है, जिन्होंने तेहरान के रणनीतिक ठिकानों पर बमबारी की। रिपोर्टों में कहा गया है कि इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरानी नेतृत्व के प्रमुख केंद्रों को नष्ट करना था। महमूद अहमदीनेजाद, जो 2005 से 2013 तक ईरान के राष्ट्रपति रहे थे, कथित तौर पर उस समय हमले की चपेट में आए जब वे एक सुरक्षित ठिकाने पर मौजूद थे। इस हमले में न केवल सैन्य ढांचे को निशाना बनाया गया, बल्कि नेतृत्व के आवासों पर भी भारी गोलाबारी की गई है।
महमूद अहमदीनेजाद का राजनीतिक सफर और प्रभाव
महमूद अहमदीनेजाद ईरान के छठे राष्ट्रपति के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने 2005 में सत्ता संभाली और 2013 तक लगातार दो कार्यकाल पूरे किए। राष्ट्रपति बनने से पहले, उन्होंने 2003 से 2005 तक तेहरान के मेयर के रूप में कार्य किया था। मेयर के रूप में उनके कार्यकाल को उनके पूर्ववर्तियों द्वारा किए गए उदारवादी सुधारों को पलटने और धार्मिक रूप से कठोर नीतियों को लागू करने के लिए याद किया जाता है। 2005 के राष्ट्रपति चुनाव में उन्हें 62% वोट मिले थे, जो उनके कट्टरपंथी और लोकलुभावन रुख की लोकप्रियता को दर्शाता था। उनके शासनकाल के दौरान ईरान का परमाणु कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बना रहा और उन्होंने पश्चिमी देशों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था।
सुप्रीम लीडर खामेनेई और उनके परिवार की क्षति
ईरान के सरकारी मीडिया और अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के अनुसार, सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की भी एक हमले में मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि जिस परिसर में खामेनेई मौजूद थे, वहां भारी बमबारी की गई। इस हमले में केवल खामेनेई ही नहीं, बल्कि उनकी बेटी, पोती, बहू और दामाद सहित परिवार के कई अन्य सदस्य भी मारे गए हैं। यह हमला ईरान के शीर्ष नेतृत्व के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। खामेनेई दशकों से ईरान की सर्वोच्च सत्ता के केंद्र थे और उनके निधन से देश में एक बड़ा राजनीतिक शून्य पैदा होने की संभावना जताई जा रही है।
अलीरेजा अराफी: ईरान के नए नेतृत्व की घोषणा
खामेनेई की मौत की खबरों के बीच, ईरान में सत्ता के हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू होने की सूचना मिली है। रिपोर्टों के अनुसार, अलीरेजा अराफी को ईरान का नया सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया है। अराफी को खामेनेई का करीबी माना जाता रहा है और वे ईरानी शासन व्यवस्था में महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं और नए नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती मौजूदा सैन्य संकट से निपटना और देश के भीतर स्थिरता बनाए रखना होगा। अराफी की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब ईरान के कई प्रमुख नेता या तो मारे गए हैं या उनके बारे में कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।
क्षेत्रीय तनाव और अंतरराष्ट्रीय सैन्य समन्वय
ईरान पर अमेरिका और इजरायल की यह संयुक्त कार्रवाई मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का परिणाम मानी जा रही है और पिछले कुछ महीनों से इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हुई थीं। अमेरिकी रक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने और क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाया गया है और तेहरान के अलावा ईरान के अन्य प्रांतों में भी सैन्य ठिकानों पर हमले की खबरें हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहा है, क्योंकि ईरान के नेतृत्व में इस तरह के बड़े बदलाव और सैन्य हमलों के परिणाम पूरे वैश्विक भू-राजनीति पर पड़ सकते हैं।